दिल्ली के पूर्व कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायपालिका और केंद्र सरकार के रिश्तों पर गंभीर सवाल उठाए. दिल्ली हाईकोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा ने एक दिन पहले ही पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की याचिका को खारिज कर दियाथा, जिसमें उन्होंने जज के ‘हितों के टकराव’ का हवाला देते हुए खुद को केस से अलग करने की मांग की थी. सौरभ भारद्वाज ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के सबसे बड़े वकील (सॉलिसिटर जनरल) ही यह तय करते हैं कि जज स्वर्णकांता शर्मा के पुत्र को कितने और कौन से सरकारी मुकदमे दिए जाएंगे.
भारद्वाज ने कहा, “जब जज के बच्चे सीधे तौर पर सरकार के पैनल में हों और उन्हें वहां से पैसा मिलता हो तो यह स्पष्ट रूप से हितों के टकराव का मामला है. अरविंद केजरीवाल जी ने यही संदेह अदालत के सामने रखा था कि ऐसे माहौल में हमें न्याय की उम्मीद नहीं है.”
महिला कार्ड और ममता बनर्जी का जिक्र
बीजेपी द्वारा उठाए जा रहे महिला कार्ड पर पलटवार करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब भी कोई ठोस सवाल पूछा जाता है तो बीजेपी इसे महिला सम्मान से जोड़ देती है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “क्या ममता बनर्जी महिला नहीं हैं? बंगाल में तो बीजेपी उन्हें अलग नजरिए से देखती है. यहां जज या दिल्ली सीएम के महिला होने का तर्क देकर आप असल मुद्दों से नहीं भाग सकते.”
बीजेपी की पीसी पर साधा निशाना
केजरीवाल की याचिका खारिज होने के बाद बीजेपी नेताओं द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी इस फैसले से जरूरत से ज्यादा उत्साहित है. उन्होंने कहा, “बीजेपी नेता हमें मजबूर कर रहे हैं कि हम मीडिया के सामने आकर सच रखें. कोर्ट ने खुद माना है कि यह फैक्ट सही है कि जज के पुत्र और पुत्री सरकारी पैनल में हैं और जज साहिबा खुद अधिवक्ता परिषद (RSS से प्रेरित संस्था) के कार्यक्रमों में जाती रही हैं.”
सौरभ भारद्वाज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्वाइंट
· हितों का टकराव: सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि जज के बच्चों का सरकारी पैनल में होना निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठाता है.
· संदेह का आधार: केजरीवाल ने कोर्ट में कहा कि उन्हें इस अदालत से न्याय मिलने की ‘रीजनेबल’ आशंका है.
· अधिवक्ता परिषद का कनेक्शन: जज स्वर्णकांता शर्मा ने स्वीकार किया है कि वह अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रही हैं.
· बीजेपी का दोहरा मापदंड: भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी ‘महिला कार्ड’ खेल रही है, जबकि ममता बनर्जी के मामले में उनका रुख अलग होता है.
· न्यायिक शुचिता: आप ने सवाल उठाया कि क्या सरकारी लाभ लेने वाले परिवारों के सदस्य विपक्ष के नेताओं के भाग्य का फैसला करेंगे?
· नेपो किड (Nepo Kid) पर हमला: सौरभ भारद्वाज ने बांसुरी स्वराज को ‘नेपो किड’ करार देते हुए कहा कि बीजेपी के आम कार्यकर्ता दरी बिछाते रह गए और वे ऊपर से आकर सीधे वकील और सांसद बन गईं.
· बांसुरी स्वराज को क्यों बुरा लगा?: भारद्वाज ने दावा किया कि चूंकि बांसुरी खुद एक वकील और ‘नेपो किड’ हैं, इसलिए उन्हें जज के बच्चों के सरकारी पैनल में होने पर उठाए गए सवाल चुभ रहे हैं.
· मौलिक अधिकार बनाम सरकारी पैनल: सौरभ ने तर्क दिया कि जज के बच्चों का ‘वकील’ बनना उनका मौलिक अधिकार हो सकता है, लेकिन ‘सरकार का वकील’ (सरकारी पैनल में होना) मौलिक अधिकार की श्रेणी में नहीं आता. यह सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है.
· अदालत बदलने का उदाहरण: सत्येंद्र जैन के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उनका केस जज गीतांजलि गोयल से लेकर दूसरे जज को ट्रांसफर कर दिया गया था, इसलिए जज बदलने की मांग कोई नई बात नहीं है.
· भारतीय ड्रामा कंपनी: भारद्वाज ने बांसुरी स्वराज का एक मीम साझा करते हुए उन्हें ‘भारतीय ड्रामा कंपनी’ का हिस्सा बताया और पुलिस हिरासत के दौरान उनके व्यवहार पर तंज कसा.
· सुप्रीम कोर्ट जाने पर रुख: जज के फैसले के खिलाफ या जज को हटाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने के सवाल पर भारद्वाज ने कहा कि इसका अंतिम निर्णय उनकी लीगल टीम लेगी.
· कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार: दिल्ली की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खास लोगों को बार-बार SHO बनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि जो SHO 5 करोड़ देकर पद पाता है, वह 15 करोड़ बनाने के चक्कर में अपराध पर लगाम नहीं लगा पाता.
· वाजिब संदेह: भारद्वाज ने दोहराया कि जब जज खुद मान चुकी हैं कि वह अधिवक्ता परिषद (RSS से जुड़ी संस्था) के कार्यक्रमों में जाती रही हैं, तो केजरीवाल का निष्पक्ष न्याय न मिलने का संदेह ‘वाजिब’ है.
सवाल-जवाब
सौरभ भारद्वाज ने जज स्वर्णकांता शर्मा पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाया?
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि जज के पुत्र और पुत्री सरकारी पैनल में वकील हैं और उन्हें केंद्र सरकार से काम और पैसा मिलता है जो कि अरविंद केजरीवाल के मामले में ‘कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ पैदा करता है.
अरविंद केजरीवाल ने अदालत से अपनी याचिका में क्या मांग की थी?
केजरीवाल ने मांग की थी कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इस केस की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लें, क्योंकि उनके मन में निष्पक्ष न्याय न मिलने का तर्कसंगत संदेह है.
‘महिला कार्ड’ के आरोप पर सौरभ भारद्वाज ने क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने कहा कि बीजेपी हर बात पर महिला कार्ड खेलती है. उन्होंने सवाल किया कि क्या ममता बनर्जी महिला नहीं हैं, जिनके खिलाफ बीजेपी अक्सर आक्रामक रहती है.
क्या कोर्ट ने जज के बच्चों के सरकारी वकील होने की बात स्वीकार की है?
सौरभ भारद्वाज के अनुसार, कोर्ट में इस फैक्ट को सही माना गया है कि जज के बच्चे सरकारी पैनल का हिस्सा हैं.
