छोटे आम पेड़ से क्यों गिर जाते हैं? बस अपनाएं ये 3 ट्रिक, नहीं झड़ेंगे 1 भी फल, जानें कृषि एक्सपर्ट से

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छोटे आम पेड़ से क्यों गिर जाते हैं? बस अपनाएं ये 3 ट्रिक, नहीं झड़ेंगे 1 भी फल

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Mango Farming Tips: अप्रैल में गर्मी और नमी की कमी से छोटे आम पेड़ से झड़ने लगते हैं. ऐसे में आईएआरआई वैज्ञानिक जयप्रकाश ने सिंचाई, ऑक्सिन स्प्रे और जिंक सल्फेट बोरॉन घोल से बचाव की सलाह दी है. उन्होंने 3 आसान ट्रिक बताया है. इसकी मदद से झड़ रहे आम को बचाया जा सकता है.

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नई दिल्ली: अप्रैल शुरू होते ही आम की बागवानी करने वाले किसान के पेड़ पर आम के बौर नजर आने लग जाते हैं. कहीं-कहीं छोटे-छोटे आम भी आ जाते हैं. जो यह संकेत दे देते हैं कि इस बार आम की पैदावार कैसे होगी. इसके साथ ही अप्रैल माह में गर्मी होने लग जाती है, जिस वजह से पेड़ पर लगे छोटे-छोटे आम टूट कर गिरने लग जाते हैं, जिस वजह से आम पूरी तरह से विकसित हुए बिना ही गिर जाने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में फल एवं औद्यानिकी प्रौद्यौगिकी संभाग भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के प्रमुख वैज्ञानिक जयप्रकाश ने बताया कि अप्रैल के महीने में छोटे-छोटे आम पेड़ों पर आ जाते हैं, लेकिन वह बार-बार टूट कर गिर जाते हैं, जिस वजह से किसानों को नुकसान होता है.

आम के टूटकर गिरने के ये हैं तीन प्रमुख कारण

अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के वैज्ञानिक जयप्रकाश ने बताया कि इसके पीछे 3 प्रमुख कारण होते हैं. एक नमी की मात्रा की कमी दूसरा परागण और निषेचन का सही से ना होना और तीसरा ऑक्सिन हार्मोन की मात्रा का कम होना. ऑक्सिन ऐसा हार्मोन है, जो आम को विकसित करता है और आगे बढ़ाने में मदद करता है. उन्होंने बताया कि इसके लिए बहुत जरूरी है कि आम की बागवानी करने वाले किसान नमी की मात्रा को बनाए रखने के लिए सिंचाई शुरू कर दें.

अगर आम अंडे के आकार का या फिर मटर के आकार का आ चुका है तो हल्की सिंचाई करना शुरू कर दें, जिससे नमी बनी रहेगी. बराबर नमी बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. इसके अलावा ऑक्सिन हार्मोन को बनाए रखने के लिए एना हार्मोन को 10 मिलीमीटर मात्रा में लेकर एक लीटर पानी में घोलकर इसका छिड़काव करें. इससे भी आपके फल पेड़ों से टूटकर गिरना बंद हो जाएंगे. अच्छी पैदावार होगी और आमों के विकास में मदद मिलेगी.

यह तरीका भी अपना सकते हैं किसान

फल एवं औद्यानिकी प्रौद्यौगिकी संभाग भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के वैज्ञानिक जयप्रकाश ने बताया कि अगर किसी भी आम की बागवानी करने वाले किसान ऊपर बताए गए दो तरीकों तक नहीं पहुंच पाते हैं तो वह मार्केट में मिल रहे अलग-अलग पोषक तत्वों को खरीद सकते हैं, लेकिन उसकी मात्रा 0.6 प्रतिशत की होनी चाहिए, जिसमें जिंक सल्फेट और बोरॉन ये दोनों मिले हों. क्योंकि दोनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है.

इसलिए मार्केट में मिल रहे जिन पोषक तत्वों में यह दोनों मौजूद हों, उसे ही खरीदें. फिर 6 ग्राम मात्रा को एक लीटर पानी में मिलकर इसका छिड़काव करें. कम से कम दो बार इसका छिड़काव करें. एक अभी और एक अप्रैल के अंतिम सप्ताह में अगर आपने ऐसा कर दिया तो आपके आम पेड़ों से टूट कर गिरेंगे नहीं.

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Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

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