Jewar Airport: 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जेवर एयरपोर्ट के भव्य उद्घाटन के बाद से ही हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था ‘आखिर यहां से विमान उड़ेंगे कब?’ अब इस सवाल का आधिकारिक जवाब मिल गया है. स्थानीय समाचार पत्र के मुताबिक, जेवर एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) की बोर्ड बैठक में यह तय किया गया है कि 30 मई 2026 से आम नागरिकों के लिए हवाई सेवाएं विधिवत शुरू कर दी जाएंगी.
हालांकि, इस तारीख के एलान के साथ ही एक और बड़ी खबर सामने आई है. एयरपोर्ट से उड़ान शुरू करने में आ रही कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कंपनी ने अपने वर्तमान विदेशी CEO क्रिस्टॉफ स्नेलमान को हटाने का फैसला किया है. उनके स्थान पर अब किसी भारतीय नागरिक को CEO की कमान सौंपी जाएगी.
सुरक्षा नियमों के पेच में क्यों फंसी थी उड़ान?
जेवर एयरपोर्ट बनकर तैयार है, रनवे चकाचक है और उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन तकनीकी रूप से एक ऐसा पेंच फंसा था जिसे नजरअंदाज करना भारत सरकार के लिए मुमकिन नहीं था. दरअसल, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के 2011 के नियमों के अनुसार, देश के किसी भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का सीईओ भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है.
भारत सरकार देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त है. नियम यह है कि एयरपोर्ट का सीईओ ही वहां का ‘सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर’ होता है. सुरक्षा से जुड़े सभी अहम फैसलों की जिम्मेदारी उसी की होती है. चूंकि YIAPL के वर्तमान CEO क्रिस्टॉफ स्नेलमान एक विदेशी नागरिक हैं, इसलिए गृह मंत्रालय की ओर से सुरक्षा क्लियरेंस और उड़ान की अंतिम अनुमति मिलने में दिक्कत आ रही थी.
विदेशी CEO की जगह अब भारतीय संभालेगा कमान
YIAPL ने पहले भारत सरकार से नियमों में ढील देने की अपील की थी, लेकिन सुरक्षा मामलों में कोई समझौता न होता देख कंपनी ने व्यावहारिक रास्ता चुना है. सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने तय किया है कि किसी भी भारतीय दिग्गज को नया सीईओ बनाया जाए ताकि गृह मंत्रालय से तुरंत मंजूरी मिल सके. जैसे ही नए भारतीय सीईओ के नाम की घोषणा होगी, उड़ान संचालन की प्रक्रिया में तेजी आ जाएगी. यह फैसला इसलिए भी जरूरी था क्योंकि नियमों में बदलाव की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल हो सकती थी, जिससे एयरपोर्ट का संचालन और अधिक लटक सकता था.
30 मई ही क्यों? समझिए पूरा गणित
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, एयरोड्रम लाइसेंस मिलने और कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के बीच आमतौर पर 45 दिनों का समय लगता है. जेवर एयरपोर्ट को 11 मार्च को एयरोड्रम लाइसेंस मिल चुका है. इस 45 दिन की अवधि में विमानन कंपनियां अपना स्टाफ तैनात करती हैं, काउंटर तैयार होते हैं और ट्रायल रन को अंतिम रूप दिया जाता है. 21 अप्रैल को हुई बोर्ड बैठक में तमाम तैयारियों की समीक्षा के बाद 30 मई की तारीख को ‘डेडलाइन’ के तौर पर चुना गया है.
इन 13 बड़े शहरों के लिए मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी
जेवर एयरपोर्ट (Noida International Airport) के शुरू होने से न केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के यात्रियों को दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट के ट्रैफिक से मुक्ति मिलेगी. शुरुआत में यहाँ से देश के प्रमुख व्यापारिक और पर्यटन केंद्रों के लिए उड़ानें शुरू होंगी, जिसमें मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गोवा, वाराणसी, भोपाल और जम्मू भी शामिल है. अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और अन्य घरेलू शहरों को भी इस लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा.
टिकट बुकिंग पर क्या है अपडेट?
हवाई सफर की योजना बना रहे लोगों के मन में टिकट बुकिंग को लेकर भी उत्साह है. एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, जैसे ही उड़ानों का अंतिम शेड्यूल जारी होगा, विमानन कंपनियां अपनी वेबसाइट पर बुकिंग ओपन कर देंगी. उम्मीद की जा रही है कि मई के दूसरे सप्ताह से यात्री इन 13 शहरों के लिए अपनी सीटों की बुकिंग शुरू कर सकेंगे.
NCR का नया एविएशन हब: विकास को मिलेगी रफ्तार
जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के लिए आर्थिक इंजन साबित होने वाला है. 30 मई से कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के बाद इस इलाके में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन क्षेत्र में भारी उछाल आने की उम्मीद है. यमुना अथॉरिटी और YIAPL अब दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि 30 मई को पहली फ्लाइट के टेक-ऑफ में कोई कमी न रह जाए.
