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भारत में पाए जाने वाले सबसे जहरीले सांप कोबरा, क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ स्केल्ड वाइपर के एंटीवेनम के लिए परीक्षण में अब चूहों की बलि का विकल्प ढूंढा जा रहा है. हैदराबाद के वैज्ञानिक और डॉक्टर चूहों के बजाय जहर की दवा के परीक्षण के लिए इन विट्रो टेस्ट विकसित कर रहे हैं. इससे इलाज भी सस्ता होने की संभावना जताई जा रही है. आइए जानते हैं पूरी खबर..
सांप के काटने की दवा को बनाने में अब चूहों को और बलिदान नहीं देना पड़ेगा, भारतीय वैज्ञानिक ऐसी किट बनाने जा रहे हैं.
Snake bite anti venom: मेडिकल साइंस की ज्यादातर ड्रग का ट्रायल सबसे पहले चूहों या गिनी पिग्स पर किया जाता रहा है. इतना तो फिर भी ठीक है लेकिन जब बात सांप के डसने और उसके इलाज के लिए जहरीले सांपों के जहर से तैयार होने वाली एंटी वेनम ड्रग्स की आती है तो चूहों पर उसका ट्रायल ज्यादती जैसा ही लगता है. कई बार इसे लेकर सवाल भी उठाए जा चुके हैं, लेकिन अब भारतीय डॉक्टरों कम वैज्ञानिकों ने इसका जबर्दस्त तोड़ निकाल लिया है.
हैदराबाद स्थित वैज्ञानिक ऐसा काम कर रहे हैं कि सांप के काटने का इलाज अब बिना ज्यादा जानवरों की बलि के तैयार हो सकेगा. सीएसआईआर सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वैज्ञानिकों ने भारत के चार सबसे जहरीले सांपों के लिए एंटी वेनम दवा की जांच के कम जानवरों की जरूरत को लेकर रिसर्च शुरू की है.
CSIR-CCMB अब ऐसी इन-विट्रो टेस्ट तैयार कर रहे हैं, जिसमें एंटीवेनम का परीक्षण और उत्पादन आसानी से, जल्दी और बिना जानवरों को नुकसान पहुंचाए हो सके. वहीं इस प्रोजेक्ट को ब्लॉकचेन फॉर इंपैक्ट फंड दे रहा है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में जो पॉलीवेलेंट एंटीवेनम बाजार में उपलब्ध है, वह घोड़ों से बनाया जाता है. इस एंटीवेनम की गुणवत्ता जांच करने के लिए हर उत्पादन यूनिट में औसतन 3,700 चूहों का इस्तेमाल किया जाता है. यह तरीका न सिर्फ महंगा है, बल्कि नैतिक रूप से भी गलत माना जाता है क्योंकि इसमें जानवरों पर बार-बार प्रयोग किए जाते हैं.
जबकि सीसीएमबी अब “Implementing 3Rs in production of Big4 polyvalent antivenom” पर काम कर रहा है. चीफ वैज्ञानिक डॉ. कार्तिकेयन वासुदेवन और पीआई डॉ. स्वस्ति राय चौधरी के मुताबिक यह प्रोजेक्ट तीन आर पर काम कर रहा है.
इन 4 सांपों के जहर पर होगा फोकस
वैज्ञानिक चार सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों कोबरा, क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर) के एंटीवेनम के लिए इन-विट्रो असेज (टेस्ट ट्यूब में होने वाले परीक्षण) का एक पूरा सेट विकसित कर रहे हैं.
ये नए परीक्षण ED₅₀ नामके पुराने जानवर-आधारित टेस्ट की जगह ले सकेंगे या उसकी संख्या बहुत कम कर सकेंगे. टीम इन परीक्षणों को सांख्यिकीय रूप से मान्य (statistically validated) स्कोरिंग सिस्टम के साथ जोड़ रही है, ताकि एंटीवेनम की असली ताकत (potency) सही-सही पता चल सके.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें
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