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Delhi Urban Planning: देश की राजधानी दिल्ली में शहरी विकास को नई दिशा देते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण (Delhi Development Authority) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 14,962 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी थी. इस बजट में 2,112 करोड़ रुपये का रेवेन्यू सरप्लस दर्ज किया गया है, जो लगातार तीसरे वर्ष का सरप्लस है. यह निर्णय पूर्व उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया था. बजट के साथ-साथ कई अहम नीतिगत फैसले भी लिए गए थे, जिनमें दिल्ली के 48 गांवों का शहरीकरण करने का प्रस्ताव रखा गया था. डीडीए के इस प्रस्ताव को दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अब हरी झंडी दे दी है.
48 गांवों के शहरीकरण को मिली मंजूरी: इस फैसले का सबसे बड़ा असर दिल्ली के उन 48 गांवों पर पड़ेगा जो अब तक ग्रामीण श्रेणी में आते थे. राजधानी में कुल 357 गांव हैं, जिनमें से 309 पहले ही शहरीकृत हो चुके हैं. शेष 48 गांवों को अब शहरी घोषित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. इन गांवों को Municipal Corporation of Delhi के तहत शहरी घोषित किया जाएगा, जिसके लिए दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 507 के तहत प्रक्रिया अपनाई जाएगी. (फाइल फोटो/Reuters)
इन जिलों के गांव शहर में होंगे शामिल: ये गांव बाहरी उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, दक्षिणी, दक्षिण-पश्चिमी और अन्य जिलों में फैले हुए हैं. इनमें पल्ला, बाकोली, कादीपुर, झटीकरा, मुंडेला कलां, छावला, बिंदापुर, चिल्ला और बदरपुर खादर जैसे इलाके शामिल हैं. ये क्षेत्र भौगोलिक रूप से शहर के करीब हैं, लेकिन अब तक इन पर कृषि भूमि से जुड़े नियम लागू थे. (फाइल फोटो)
विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार: अधिकारियों के अनुसार, इन गांवों में विकास कार्य अब तक इसलिए धीमे थे, क्योंकि भूमि उपयोग बदलने के लिए दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग से अनुमति लेनी पड़ती थी. शहरीकरण के बाद यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी और सड़क, सीवर, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और कूड़ा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा सकेगा. एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने इसे जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाला निर्णय बताया. उन्होंने कहा कि कई गांव पहले से ही व्यवहार में शहरी बन चुके हैं, लेकिन औपचारिक दर्जा न होने के कारण विकास बाधित था. अब इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकेगा. (फाइल फोटो/Reuters)
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DLR एक्ट से मिलेगी मुक्ति: शहरीकरण के बाद इन गांवों पर लागू Delhi Land Reforms Act का प्रभाव समाप्त हो जाएगा. इसका मतलब है कि अब जमीन का उपयोग केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा. लोग अपनी जमीन पर मकान, दुकान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर सकेंगे. यह बदलाव स्थानीय निवासियों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि जमीन की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है. साथ ही, बैंक से लोन लेना भी आसान हो जाएगा, क्योंकि शहरी संपत्ति को वित्तीय संस्थान ज्यादा सुरक्षित मानते हैं.
लैंड पूलिंग और TOD नीति का लाभ: शहरीकरण के बाद ये गांव दिल्ली की लैंड पूलिंग नीति के दायरे में आ जाएंगे. इससे जमीन मालिकों को विकसित जमीन के बदले हिस्सा मिलेगा और उन्हें बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा. इसके अलावा ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जैसी योजनाओं को भी लागू किया जा सकेगा, जिससे मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन के आसपास संगठित विकास को बढ़ावा मिलेगा. (फाइल फोटो/Reuters)
अवैध निर्माण पर लगेगा अंकुश: इस निर्णय का एक महत्वपूर्ण पहलू अवैध निर्माण पर नियंत्रण भी है. अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों की निगरानी सीमित थी, लेकिन शहरी क्षेत्र घोषित होने के बाद सभी निर्माण कार्य एमसीडी के नियमों के तहत आएंगे. इससे अनधिकृत कॉलोनियों और अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी.
बढ़ेगी आय: डीडीए ने अपनी आय बढ़ाने के लिए एक नई विज्ञापन नीति को भी मंजूरी दी है. यह नीति दिल्ली आउटडोर विज्ञापन नीति 2017 के अनुरूप होगी. इसके तहत डीडीए अपनी जमीन, पार्क, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और खाली प्लॉट्स पर विज्ञापन देकर राजस्व अर्जित करेगा. अधिकारियों के अनुसार, यह मॉडल Delhi Metro Rail Corporation और रेलवे की तरह राजस्व साझेदारी पर आधारित होगा. हालांकि, डीडीए के पार्क और परिसरों के भीतर लगाए जाने वाले विज्ञापनों पर राजस्व साझा करने की जरूरत नहीं होगी. (फाइल फोटो/Reuters)
अटल कैंटीन के लिए जमीन आवंटन: बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय अटल कैंटीन के लिए जमीन उपलब्ध कराने का लिया गया. इसके तहत खाली जमीन को दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड को मात्र एक रुपये प्रतिवर्ष के प्रतीकात्मक किराए पर अधिकतम नौ वर्षों के लिए लीज पर दिया जाएगा. इससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध कराने की योजना को बढ़ावा मिलेगा. (फाइल फोटो/Reuters)
