पटना/नई दिल्ली/असनसोल. बंगाल चुनाव परिणाम के बाद लोगों के मन एक सवाल फिर से घूम रहा है. क्या तृणमूल कांग्रेस सांसद शत्रुघ्न सिन्हा एक बार फिर सियासी पाला बदलने की तैयारी में हैं? यह सवाल इन दिनों राजनीतिक गलियारों में तेजी से गूंज रहा है. इसकी बड़ी कुछ दिनों पहले उनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर की गई तारीफ है. खासकर पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बयान को कई तरह से देखा जा रहा है. ऐसे में पटना साहिब के पूर्व सांसद और बिहार बाबू के नाम से मशहूर फिल्म अभिनेता सह सांसद शत्रुघ्न सिन्हा कौन सा कदम उठाएंगे, यह देखना होगा?
मोदी की तारीफ ने बढ़ाई सियासी चर्चा
दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज और ऊर्जा की जमकर सराहना की थी. उन्होंने कहा था कि “पीएम मोदी का एनर्जी लेवल बेहद ऊंचा है और शायद ही कोई दूसरा नेता इस स्तर की ऊर्जा के साथ काम कर पाता हो.” उन्होंने भगवान से प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना भी की, ताकि देश उनकी कार्यशैली से लाभान्वित होता रहे. शत्रुघ्न सिन्हा ने यह भी जोड़ा कि वह हमेशा “हेल्दी पॉलिटिक्स” में विश्वास रखते हैं और सच बोलने से पीछे नहीं हटते. उन्होंने कहा कि अगर उनकी बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आती, तब भी वह सच ही बोलेंगे. यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक माहौल बेहद संवेदनशील है और हर शब्द के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं.
बीजेपी से दूरी की पृष्ठभूमि
शत्रुघ्न सिन्हा का राजनीतिक सफर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है. वह करीब चार दशकों तक भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े रहे और पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे. लेकिन 2019 में उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया. उस समय पटना साहिब सीट से टिकट नहीं मिलने और उनकी जगह रवि शंकर प्रसाद को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने खुलकर नाराजगी जताई थी. उन्होंने पार्टी पर “वन मैन शो” होने और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाया.
कांग्रेस से लेकर टीएमसी तक का सफर
बीजेपी छोड़ने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए. उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास को अपनी पसंद बताया. हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद 2022 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया. पार्टी ने उन्हें आसनसोल उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज की. इस जीत ने उनके राजनीतिक करियर को नई दिशा दी और वह एक बार फिर सक्रिय राजनीति के केंद्र में आ गए.
ममता बनर्जी के साथ, लेकिन पीएम के लिए संतुलित बयानबाजी
फिलहाल शत्रुघ्न सिन्हा टीएमसी के सांसद हैं और ममता बनर्जी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं. हालांकि दिलचस्प बात यह है कि वे समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी करते रहते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उनकी “संतुलित राजनीति” का हिस्सा हो सकता है, जहां वे विरोध के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर सम्मान बनाए रखते हैं.
बंगाल चुनाव और बदलते समीकरण
पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि बीजेपी बंगाल में मजबूत स्थिति में आ रही है तो क्या ऐसे में शत्रुघ्न सिन्हा फिर से अपने पुराने राजनीतिक घर की ओर लौट सकते हैं? हालांकि इस सवाल का कोई सीधा जवाब अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन उनके हालिया बयानों ने इस बहस को जरूर हवा दे दी है. खासकर तब, जब भारतीय राजनीति में दल-बदल और नए गठजोड़ आम बात हो गई है.
पुराने रिश्तों का असर
शत्रुघ्न सिन्हा का बीजेपी के साथ लंबा जुड़ाव रहा है. ऐसे में राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भले ही उन्होंने पार्टी छोड़ दी हो, लेकिन उनके पुराने रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. यही वजह है कि उनके हर बयान को गंभीरता से लिया जाता है और उसके राजनीतिक मायने निकाले जाते हैं.
फिलहाल अटकलों का दौर जारी
फिलहाल स्थिति यह है कि शत्रुघ्न सिन्हा टीएमसी के साथ सक्रिय हैं और पार्टी के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने बीजेपी में वापसी को लेकर कोई संकेत नहीं दिया है. लेकिन, उनकी ओर से प्रधानमंत्री मोदी की लगातार तारीफ और “हेल्दी पॉलिटिक्स” की बात ने यह जरूर संकेत दिया है कि वे राजनीतिक रिश्तों को पूरी तरह तोड़ने के पक्ष में नहीं हैं. ऐसे में आने वाले समय में क्या वे फिर से कोई बड़ा सियासी फैसला लेते हैं या नहीं, यह देखने वाली बात होगी. अभी के लिए इतना जरूर कहा जा सकता है कि उनके एक बयान ने बिहार से लेकर बंगाल तक की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.
