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Ayurvedic Doctor Course : केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी ने 10वीं के बाद गुरुकुल पद्धति से बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी में नीट बिना सीधा प्रवेश करने का मौका दे रही है. इससे छात्र आईआईटी में भी शोध करेंगे. अब छात्रों को बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी करने के लिए नीट का भारी भरकम पेपर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
नई दिल्ली: आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने की राह अब बहुत आसान हो गई है. जो भी छात्र-छात्राएं आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने का सपना बुन रहे हैं. उनको जानकर खुशी होगी कि अब उन्हें बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी करने के लिए नीट का भारी भरकम पेपर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ना ही लंबी तैयारी के बाद अपनी रैंक आने का इंतजार करना होगा. क्योंकि दिल्ली की केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी अब 10वीं के बाद ही बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी करने का शानदार मौका देश भर के छात्र-छात्राओं को दे रही है. जिसमें वो आवेदन करके सीधे तौर पर दाखिला ले सकते हैं. यह जानकारी दी है केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने दी.
कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने लोकल 18 से बताया कि अभी तक जिन भी छात्र-छात्राओं को बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन और सर्जरी करना होता था तो वो नीट का पेपर देते थे और ज्यादातर यह देखने के लिए मिलता था कि जिन छात्र-छात्राओं को एमबीबीएस नहीं मिल पाता था तो वो मजबूरी में अपना साल बर्बाद ना करके बीएएमएस में चले जाते थे, जिस वजह से वो आयुर्वेदिक डॉक्टर बन तो जाते थे, लेकिन उनकी श्रद्धा इसके प्रति देखने को नहीं मिलती थी. उन्होंने बताया कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एनसीआईएसएम के माध्यम से आयुर्वेद गुरुकुल संबद्धता की मान्यता देगा. साथ ही प्री-आयुर्वेद बीएएमएस परीक्षा का आयोजन भी करेगा, जिसमें परीक्षार्थी कक्षा 10 के बाद परीक्षा के माध्यम से आयुर्वेद गुरुकुलम बीएमएस डॉक्टर के पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकेंगे.
गुरुकुल पद्धति के तहत की गई पहल
कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो सपना आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत का है. उसे शिक्षा मंत्रालय ने काफी गंभीरता से लिया है और यही वजह है कि शिक्षा मंत्रालय गुरुकुल पद्धति को बढ़ावा दे रहा है. इसी के तहत केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी गुरुकुल पद्धति को अपनाते हुए 10वीं के बाद बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी करने का मौका छात्र-छात्राओं को दे रही है. उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी के इस कोर्स में 10वीं के बाद कोई भी छात्र-छात्राएं जिनकी दिलचस्पी आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने की है, वो आवेदन कर सकते हैं.
इसके अलावा उन्होंने बताया कि आज लोग यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं. यूपीएससी का सिलेबस पढ़ रहे हैं. आईएएस की पढ़ाई कर रहे हैं और तमाम विभिन्न कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं. क्यों ना इन्हीं कोर्स को हम गुरुकुल पद्धति के तहत पढ़ाएं और गुरुकुल पद्धति को दोबारा जागृत करें. इसलिए फैसला लिया गया है. गुरुकुल पद्धति से बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी काफी दूर हो गया था, उसे अब दोबारा गुरुकुल पद्धति के तहत लाने का काम किया गया है. अब 10वीं के बाद जो आयुर्वेदिक डॉक्टर बनना चाहेंगे, वो दिल से आयुर्वेदिक डॉक्टर बनेंगे ना की मजबूरी में और हम सब जानते हैं कि आयुर्वेद हमारे देश की पुरानी पद्धति है, जिसमें बड़ी से बड़ी बीमारी को ठीक करने की क्षमता होती है.
आईआईटी जाकर शोध करने का भी मिलेगा मौका
कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि सेतुबंध स्कॉलर और विद्वान योजना (शिक्षा और अनुसंधान) शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) विभाग द्वारा यह एक अनूठी राष्ट्रीय पहल की गई है, जिसमें देश की गुरुकुल पद्धति चाहे वो शास्त्र हो, संगीत हो या कोई भी ऐसी विधा हो, जिसमें गुरुकुल पद्धति से पढ़ाई की गई हो उसके तहत स्नातक छात्र-छात्राओं को शोध करने की दृष्टि से उनका दाखिला लिया गया है. 40 छात्र छात्राओं ने इसमें भाग लिया है.
इन छात्र-छात्राओं को हर महीने शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कॉलरशिप दी जाती है. ये छात्र-छात्राएं देश के किसी भी आईआईटी और बड़े संस्थान में जाकर उनकी फैकल्टी के साथ रिसर्च करेंगे. यह शोध कार्यक्रम अगले दो साल तक होगा. इस कार्यक्रम का फायदा यह होगा कि हमारी गुरुकुल पद्धति और आधुनिक टेक्नोलॉजी दोनों मिलकर रिसर्च करेंगे. इसके तहत आधुनिक विधाओं को भारतीय विधाओं से जोड़ने का शानदार मौका मिलेगा. इसका रिजल्ट भी बहुत अच्छा सामने आ सकता है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
