Bhajan Lal Sharma: बहन के साथ किराए के कमरे में रहें भजनलाल शर्मा… मामा के साथ की खेती, आज बने सीएम

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भरतपुर जिले के गोपालगढ़ मोहल्ले में वह अपनी बहन के साथ किराए के कमरे में रहते थें. 4 साल तक वह इस कमरे में रहे और यहां से ही उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की.

अंकित राजपूत/जयपुर. प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में भजनलाल शर्मा को पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री बनाया है लेकिन भजनलाल शर्मा नाम सामने आते ही प्रदेश की जनता से लेकर पार्टी के कार्यकर्ता और नेता मंत्री भी चौंक गए. लेकिन हम आपको बताते हैं कि भजनलाल शर्मा के पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में आलाकमान का दिल जीत लिया और उन्हें उनकी मेहनत का इनाम इतना बड़ा मिला कि उन्होंने भी नहीं सोचा था. भजनलाल शर्मा का राजनीतिक करियर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं. सबसे पहले हम आपकों उनके परिवार से रूबरू करवाते हैं. भजनलाल शर्मा जन्म भरतपुर जिले के अटारी गांव में हुआ अभी उनके परिवार में उनके माता-पिता और पत्नी सहित दो बेटे हैं.

भजनलाल शर्मा का अधिकतर बच्चन उनके नाना गिर्राज प्रसाद शर्मा और उनकी नान किस्सो देवी के साथ कनवर गांव में बिता. नाना-नानी के साथ उनके तीन मामा हैं धनीराम शर्मा, मामा बाबूलाल शर्मा, मामा सुखराम शर्मा की देखभाल में वह बड़े हुए और उनकी कुछ समय की स्कूली शिक्षा भी कनावर गांव से हुई हैं. मुख्यमंत्री की खबर मिलते ही उनके गांव और जिस स्कूल में भजनलाल शर्मा पढ़ें थे वहां शिक्षकों और लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

मामा के साथ खेतों में किया काम

उनके मामा के लड़के और परिजन बताते हैं कि बच्चन से ही भजनलाल को दही, कलाकंद, करेले की सब्जी और लस्सी पीने के शौकिन रहें हैं. मुख्य रूप से भजनलाल शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा उनके गांव अटारी से हुई. 5वीं कक्षा के बाद वह गांव गगवाना में माध्यमिक शिक्षा के लिए गए और उसके बाद उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षा की पढ़ाई नदबई से की. भजनलाल शर्मा एक किसान परिवार से आते हैं यहां गांव में रहने वाले उनके परिवार और गांव के लोग बताते हैं कि उन्होंने भी यहां खेतों में काम किया है. भजनलाल शर्मा कुल चार भाई बहन हैं जिसमें वह सबसे बड़े हैं.

किराए के कमरे से कि राजनीति की शुरुआत
भजनलाल शर्मा अपनी शुरुआत शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए भरतपुर चले गए. यहां भरतपुर जिले के गोपालगढ़ मोहल्ले में वह अपनी बहन के साथ किराए के कमरे में रहते थे. 4 साल तक वह किराए के कमरे में रहे और इसी किराए के कमरे से उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. 12वीं कक्षा के समय से वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गये और छात्र नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई. भजनलाल शर्मा के पिता किशन स्वरूप शर्मा बताते हैं कि वह भजनलाल को शिक्षक बनाने चाहते थे लेकिन उनकी रूचि कॉलेज के समय से राजनीति की और होने लगी. तो पिता ने फिर उन्हें कभी नहीं टोका और वह लगातार राजनीति में सक्रिय होते चले गये और आज प्रदेश की राजनीति के सबसे बड़े पद तक पहुंच गये हैं.

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