इस सवाल पर लोग अक्सर भ्रमित होते हैं कि आखिर एमिकस क्यूरी कौन होते हैं. जब हाईकोर्ट में अरविंद केजरीवाल के बहिष्कार के बाद उनके मामले को कोर्ट में रखने के लिए एमिकस क्यूरी रखे गए तो लोगों को लगा कि ये केजरीवाल की ओर से उनका केस लड़ेगा. वास्तव में ऐसा नहीं है. तो ये समझना होगा कि ऐमिकस क्यूरी क्या होता है, ये क्या करता है, इसकी नियुक्ति क्यों होती है. अरविंद केजरीवाल के मामले में क्यों हाईकोर्ट ने उसकी नियुक्ति की है.
तो इतना साफ समझ लीजिए कि एमिकस क्यूरी अरविंद केजरीवाल का केस उनके वकील की तरह नहीं लड़ेगा, बल्कि अदालत की मदद के लिए नियुक्त वरिष्ठ वकील होगा जो निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करेगा.
दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक के बहिष्कार के बाद तीन सीनियर एडवोकेट को एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का फैसला लिया है, ताकि आरोपियों का पक्ष अदालत में रखा जाए.
दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई की अपील पर सुनवाई हो रही है, फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल समेत आरोपियों को बरी कर दिया था. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 4 मई 2026 को कहा कि आरोपियों के पेश न होने पर भी सुनवाई चलेगी. एमिकस क्यूरी उनका पक्ष रखेंगे.
क्या होते हैं एमिकस क्यूरी, क्यों उन्हें लेकर अक्सर होता है असमंजस
– एमिकस क्यूरी को हिन्दी अर्थों में अदालत का मित्र कहा जाता है. ये किसी पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि कानूनी बिंदुओं को स्पष्ट कर निष्पक्षता सुनिश्चित करता है. यह कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होता जिसे किसी मामले के किसी पक्ष (वादी या प्रतिवादी) ने नियुक्त किया हो, बल्कि यह अदालत की सहायता के लिए उपस्थित होता है.
केजरीवाल के बहिष्कार के बाद कोर्ट ने औपचारिक नियुक्ति का आदेश देने की बात कही है, अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित है. केजरीवाल ने जज पर पक्षपात का आरोप लगाकर बहिष्कार का फैसला लिया, इसे सत्याग्रह बताया. कोर्ट ने उनकी रिक्वसल याचिका खारिज कर दी थी, अब एमिकस के माध्यम से आगे बढ़ेगा मामला.
एमिकस क्यूरी की व्यवस्था कब होती है और इसका उद्देश्य क्या होता है
– यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि एक पक्ष की अनुपस्थिति से न्याय प्रभावित न हो. कोर्ट मानती है कि निष्पक्ष और कानूनी रूप से संतुलित सुनवाई के लिए ये व्यवस्था जरूरी है.
एमिकस क्यूरी किसे बनाया जाता है?
ये आमतौर पर वरिष्ठ और अनुभवी वकील होते हैं, जिन्हें कानून की गहरी समझ होती है. वे किसी भी पक्ष की तरफ से बहस नहीं करते. उनका काम अदालत को कानून के जटिल मुद्दों या सार्वजनिक महत्व के विषयों पर निष्पक्ष राय देना होता है. कई बार किसी विशेष क्षेत्र के विशेषज्ञों जैसे पर्यावरणविद या अर्थशास्त्री को भी तकनीकी जानकारी के लिए एमिकस क्यूरी बनाया जा सकता है.
एमिकस क्यूरी की नियुक्ति कब होती है?
कई स्थितियों में न्यायालय एमिकस क्यूरी की नियुक्ति करता है.
– जब कोई केस ऐसा हो जिसका असर पूरे समाज या देश पर पड़ रहा हो.
– जब अदालत को किसी कानून की व्याख्या करने में सहायता की जरूरत हो.
अगर किसी मामले में एक पक्ष के पास वकील नहीं है या वह अपना पक्ष रखने में सक्षम नहीं है, तो अदालत न्याय सुनिश्चित करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त कर सकती है.
– जनहित याचिकाओं में अक्सर अदालत किसी वकील को तथ्यों की जांच करने या रिपोर्ट पेश करने की जिम्मेदारी सौंपती है.
ऐसा ही मामला 26/11 मुंबई हमला के दोषी अजमल कसाब का भी था. उस मामले में एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की गई थी या सरकार ने पैरवी के लिए वकील दिया था.
– मुंबई बमकांड यानि 26/11 मुंबई हमला मामले में अजमल कसाब के लिए एमिकस क्यूरी की बजाय राज्य सरकार ने वकील नियुक्त किए थे. ट्रायल कोर्ट में सबसे पहले अंजलि वाघमारे को नियुक्त किया, लेकिन तकनीकी कारणों से उन्हें हटा दिया गया. उसके बाद अब्बास काजमी को लगाया गया पर अदालत के साथ सहयोग न करने पर उन्हें भी बीच में हटा दिया गया. आखिरकार के.पी. पवार ने कसाब का मुकदमा लड़ा.
सुप्रीम कोर्ट में अपील के दौरान सीनियर वकील राजू रामचंद्रन को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त किया गया, लेकिन यह राज्य-नियुक्त वकीलों के बाद की व्यवस्था थी. ये सुनिश्चित करने के लिए था कि कसाब का पक्ष रखा जाए, क्योंकि उसके अपने वकील नहीं थे.
कसाब के मामले में आरोपी विदेशी था और सरकार ने सीधे वकील दिए, जबकि केजरीवाल मामले में बहिष्कार के कारण कोर्ट ने खुद एमिकस नियुक्त किया. दोनों में निष्पक्ष सुनवाई का लक्ष्य समान था.
एमिकस क्यूरी को पैसा कौन देता है
– चूंकि एमिकस क्यूरी अदालत की सहायता के लिए काम करते हैं, इसलिए उनके पारिश्रमिक के नियम इस प्रकार हैं-
अक्सर वरिष्ठ वकील इस भूमिका को एक सम्मान और अपनी पेशेवर जिम्मेदारी समझकर मुफ्त निभाते हैं. यदि मामला बहुत लंबा है या उसमें अधिक संसाधन लग रहे हैं, तो अदालत आदेश दे सकती है कि एमिकस क्यूरी को सरकार द्वारा एक निर्धारित मानदेय दिया जाए. कुछ मामलों में अदालत केस के पक्षों को एमिकस क्यूरी की फीस या खर्चों का भुगतान करने का निर्देश भी दे सकती है. यानि केजरीवाल से भी कह सकती है कि एमिकस क्यूरी का खर्च उन्हें ही देना होगा.
किन चर्चित मामलों में एमिकस क्यूरी की व्यवस्था की गई थी
भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक और संवेदनशील मामले रहे हैं जहां सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स ने न्याय को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए एमिकस क्यूरी की सहायता ली.
1. निर्भया कांड (2012) – इस जघन्य अपराध के बाद, जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया. उनका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना था कि दोषियों को दी गई मौत की सजा कानूनी रूप से पूरी तरह न्यायसंगत है या नहीं और क्या बचाव पक्ष की ओर से कोई ऐसा बिंदु रह गया है जिस पर विचार करना जरूरी हो.
2. सलमान खान ‘हिट एंड रन’ मामला – बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस चर्चित मामले में कानूनी पेचीदगियों को समझने के लिए एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की थी. अदालत ने उनसे मुख्य रूप से इस बात पर राय मांगी थी कि क्या विदेशी गवाहों के बयानों को भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत उसी रूप में स्वीकार किया जा सकता है.
3. जगन्नाथ मंदिर (पुरी) प्रबंधन मामला – ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में प्रशासनिक सुधारों और भक्तों को होने वाली असुविधाओं को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था. उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुधार के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी.
4. जेल सुधार और कैदियों की स्थिति – सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों में कैदियों की अमानवीय स्थिति और वहां होने वाली भीड़भाड़ को लेकर खुद संज्ञान लिया था. इस मामले में एमिकस क्यूरी ने अदालत को यह बताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि जेलों में सुधार के लिए किन अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया जा सकता है.
5. पर्यावरण और वायु प्रदूषण मामले-दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ लंबित मामलों में अदालत अक्सर वरिष्ठ वकीलों को एमिकस क्यूरी नियुक्त करती है. ये विशेषज्ञ वैज्ञानिक आंकड़ों और विशेषज्ञों की राय को सरल भाषा में अदालत के सामने रखते हैं ताकि प्रभावी आदेश पारित किए जा सकें.
6. मणिपुर एनकाउंटर मामला – मणिपुर में सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित फर्जी एनकाउंटर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी की मदद ली. उन्होंने सैकड़ों मामलों की फाइलों का अध्ययन किया और अदालत को बताया कि किन मामलों में प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ.
एमिकस क्यूरी का प्रभाव क्यों महत्वपूर्ण है?
वे भावनात्मक या राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर केवल कानून की बात करते हैं. वे अदालत का बहुत सारा समय बचाते हैं क्योंकि वे हजारों पन्नों के दस्तावेजों का सारांश तैयार करते हैं. वे उन तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं जो शायद वादी या प्रतिवादी के वकील छोड़ देते हैं.
