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Delhi Monsoon: नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने मानसून 2026 के लिए एक अत्याधुनिक कार्य योजना पेश की है, जिसमें पहली बार रोबोटिक निरीक्षण और सेंसर आधारित निगरानी का उपयोग किया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप इस योजना में जलभराव वाले हॉटस्पॉट्स पर सीसीटीवी लगाए जाएंगे और भूमिगत नालियों की सफाई के लिए हाईटेक मशीनों का इस्तेमाल होगा. 15 जून तक गाद निकालने का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि बारिश के दौरान दिल्लीवासियों को सुचारू नागरिक सुविधाएं मिल सकें और जलभराव की समस्या का समाधान हो सके.
मानसून में जलभराव को रोकने की तैयारी.
Delhi Monsoon Waterlogging: देश की राजधानी को इस बार मानसून की भारी बारिश में डूबने से बचाने के लिए नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने कमर कस ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्मार्ट, स्वच्छ और प्रौद्योगिकी-आधारित शहरी शासन’ के सपने को धरातल पर उतारते हुए एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने शुक्रवार को ‘मानसून कार्य योजना-2026’ का भव्य अनावरण किया. इस बार दिल्ली की सड़कों पर केवल नगर निगम के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक रोबोट और सेंसर आधारित सिस्टम भी तैनात रहेंगे, जो पल-पल की जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचाएंगे. इस व्यापक योजना का मुख्य उद्देश्य बारिश के दौरान नागरिकों के लिए सुचारू सेवाएं सुनिश्चित करना और उन इलाकों में जलभराव को जड़ से खत्म करना है, जो सालों से दिल्ली के लिए मुसीबत बने हुए हैं.
एनडीएमसी की इस नई रणनीति में तकनीक का ऐसा संगम देखने को मिलेगा जो पहले कभी नहीं हुआ. कुलजीत सिंह चहल ने बताया कि परिषद ने जलभराव वाले क्षेत्रों की सटीक निगरानी के लिए भूमिगत जल निकासी नेटवर्क की जीआईएस (GIS) मैपिंग शुरू कर दी है. इसमें बेलमाउथ, गली ट्रैप, मैनहोल और ईंटों से बने बैरल ड्रेन तक का पूरा नक्शा डिजिटल रूप से तैयार किया गया है. मानसून से पहले की तैयारियों के तहत गाद निकालने का पहला चरण 31 मार्च तक शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है, जबकि दूसरा चरण 15 जून की समय सीमा तक संपन्न हो जाएगा. परिषद का लक्ष्य है कि बारिश शुरू होने से पहले ही नालियों और तूफानी जल निकासी चैनलों की व्यापक सफाई सुनिश्चित कर ली जाए ताकि पानी का बहाव बिना किसी रुकावट के जारी रहे.
सीसीटीवी और सेंसर आधारित निगरानी
दिल्ली के प्रमुख जलभराव वाले हॉटस्पॉट्स जैसे पुराना किला, दयाल सिंह कॉलेज, पंचकुइयां रोड, हनुमान मंदिर और सत्य सदन पर इस बार खास नजर रहेगी. इन स्थानों पर त्वरित कार्रवाई के लिए न केवल जल निकासी पंप और डीजी सेट लगाए गए हैं, बल्कि सीसीटीवी कैमरे और सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली भी स्थापित की जा रही है. इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जैसे ही पानी का स्तर बढ़ेगा, सेंसर तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेज देंगे. इसके साथ ही, पहली बार ताज मानसिंह के पास क्यू पॉइंट पर भूमिगत और ढकी हुई नालियों का रोबोटिक निरीक्षण शुरू किया गया है. यह रोबोटिक सर्वे अब तक 85 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जो नालियों के अंदर मौजूद मलबे, रुकावटों और क्षतिग्रस्त हिस्सों की सटीक पहचान करने में सफल रहा है.
सुपर सकर मशीनों से नालों की सफाई
भविष्य की तैयारियों को लेकर भी एनडीएमसी ने बड़ा निवेश किया है. अगले वर्ष के लिए क्यू पॉइंट, डीटीसी डिपो और दयाल सिंह कॉलेज जैसे बड़े क्षेत्रों में रोबोटिक तकनीक के माध्यम से गाद हटाने के लिए 43 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट रखा गया है. वर्तमान में 35 लाख रुपये की लागत वाली सुपर सकर मशीनों का उपयोग किया जा रहा है. सरोजिनी नगर जैसे संवेदनशील इलाकों में जल जमाव की समस्या को हल करने के लिए परिषद ने पाया कि वहां के नाले का तल मुख्य नाले से ऊंचा है, जिसे ठीक करने के लिए उच्च क्षमता वाले स्थायी पंप लगा दिए गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर 15 जून तक अतिरिक्त पंप भी जोड़ दिए जाएंगे.
तेज आंधी और तूफान से दिल्ली को बचाने के उपाए
नागरिकों की सुरक्षा केवल जलभराव रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसून के दौरान होने वाली बीमारियों और दुर्घटनाओं को रोकना भी इस योजना का अहम हिस्सा है. एनडीएमसी द्वारा जलजनित रोगों की रोकथाम, अपशिष्ट के सही निपटान और नालियों में मलबा न डालने के लिए एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. साथ ही, तेज आंधी और तूफान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पेड़ों की छंटाई और कमजोर शाखाओं को हटाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. कुलजीत सिंह चहल ने भरोसा जताया कि इस आधुनिक और तकनीक-आधारित योजना से दिल्लीवासी इस बार एक सुरक्षित और बेहतर मानसून का अनुभव करेंगे. (IANS इनपुट्स)
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