नई दिल्ली. अक्सर अनाथालयों या चाइल्ड केयर संस्थानों में रहने वाले बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तब आती है जब वे 18 साल के हो जाते हैं. कानूनी तौर पर वयस्क होने के बाद उन्हें संस्थान छोड़ना पड़ता है जिसके बाद शिक्षा और रोजगार का संकट खड़ा हो जाता है. इसी मानवीय पक्ष को समझते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आफ्टरकेयर स्कीम फॉर यंग पर्सन्स को मंजूरी दी है. 3.5 करोड़ रुपये के बजट वाली यह योजना सुनिश्चित करेगी कि ये युवा आत्मनिर्भर बनें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें.
सशक्तिकरण की ओर एक कदम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह फैसला न केवल एक प्रशासनिक सुधार है बल्कि एक संवेदनशील नेतृत्व का परिचय भी है. आफ्टरकेयर स्कीम अनाथ युवाओं को एक सेफ्टी नेट प्रदान करती है, जिससे वे बिना किसी डर के अपने सपनों की उड़ान भर सकेंगे.
योजना की 5 बड़ी बातें
1. आर्थिक सुरक्षा और स्टाइपेंड: योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा युवाओं को दी जाने वाली मासिक आर्थिक सहायता है. स्टाइपेंड के जरिए उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना होगा जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा.
2. शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर जोर: सरकार केवल रहने की जगह नहीं दे रही बल्कि उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण का खर्च भी उठाएगी. इसका उद्देश्य युवाओं को इस काबिल बनाना है कि वे सम्मानजनक रोजगार पा सकें.
3. मेंटरिंग और काउंसलिंग: संस्थान छोड़ने के बाद युवा मानसिक रूप से अकेलापन महसूस कर सकते हैं. इसके लिए योजना में केस-विशिष्ट सहायता और करियर गाइडेंस का प्रावधान है जो उन्हें सही दिशा दिखाने में मदद करेगा.
4. जिला और राज्य स्तर पर निगरानी: योजना कागजों तक सीमित न रहे इसके लिए ‘स्टेट और डिस्ट्रिक्ट आफ्टरकेयर कमेटियों’ का गठन किया जाएगा. ये कमेटियां सीधे तौर पर युवाओं की प्रगति की निगरानी करेंगी.
5. रोजगार और इंटर्नशिप के अवसर: योजना का अंतिम लक्ष्य पुनर्वास है. सरकार युवाओं को विभिन्न कंपनियों में इंटर्नशिप और नौकरियों से जोड़ने के लिए एक सेतु का काम करेगी.
सवाल-जवाब
इस योजना का लाभ किन युवाओं को मिलेगा?
दिल्ली के 88 चाइल्ड केयर संस्थानों से 18 वर्ष की आयु पूरी कर बाहर आने वाले लगभग 150 से 200 युवाओं को हर साल इस योजना का लाभ मिलेगा.
क्या रहने के लिए भी कोई सुविधा दी जाएगी?
हां, दिल्ली में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग आफ्टरकेयर होम संचालित हैं जहां उन्हें रहने के साथ-साथ शिक्षा संबंधी सुविधाएं भी मिलती रहेंगी.
योजना के लिए कितना बजट रखा गया है?
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दिल्ली सरकार ने 3.5 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट निर्धारित किया है.
