दिल्ली के जनकपुरी इलाके में स्थित प्रतिष्ठित एसएस मोटा सिंह सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल में हाल ही में नर्सरी में पढ़ने वाली मासूम बच्ची के साथ गंभीर छेड़छाड़ का मामला सामने आया था. स्कूल में इस गंभीर सुरक्षा लापरवाही के आरोप पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा निदेशालय ने कड़ा नोटिस जारी किया है.
निदेशालय ने स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस देते हुए पूछा है कि उसकी मान्यता क्यों न रद्द कर दी जाए. मामले की शुरुआत नर्सरी कक्षा की एक छोटी बच्ची के साथ स्कूल परिसर में हुई कथित छेड़छाड़ की घटना से हुई. घटना स्कूल समय के दौरान हुई, जिसे विभाग ने बेहद गंभीर लिया है.
बता दें कि दिल्ली सरकार ने 8 मई को स्कूल प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. इस मामले में आज जवाब दाखिल करने को कहा गया है. शिक्षा निदेशालय (DoE) ने चेतावनी दी है कि अगर स्कूल का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो स्कूल प्रबंधन का टेकओवर करने की कार्रवाई भी की जा सकती है.
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए. स्कूल के संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे और बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस निगरानी व्यवस्था नहीं थी. विभाग का कहना है कि स्कूल प्रशासन बच्चों की सुरक्षा, निगरानी और रोकथाम के उपाय करने में पूरी तरह विफल रहा.
सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्कूल की नर्सरी और प्री-प्राइमरी कक्षाएं मुख्य परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर एक निजी बिल्डिंग में चलाई जा रही थीं. इसकी शिक्षा निदेशालय या किसी अन्य प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली गई थी. विभाग ने इसे दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, DDA भूमि आवंटन नियमों और मान्यता शर्तों का सीधा उल्लंघन बताया है.
शिक्षा विभाग के अनुसार, निजी परिसर में बच्चों को पढ़ाने से उनकी सुरक्षा, फायर सेफ्टी, भवन मजबूती और स्वास्थ्य मानकों पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा था. नोटिस में कहा गया है कि स्कूल प्रशासन पर लंबे समय से सुरक्षा और संचालन संबंधी कई शिकायतें आ रही थीं, लेकिन प्रबंधन ने कोई सुधार नहीं किया. विभाग ने इस रवैये को “घोर लापरवाही” और “कर्तव्य में गंभीर चूक” करार दिया है.
शिक्षा निदेशालय ने स्कूल से 11 मई 2026 तक विस्तृत जवाब मांगा है. स्कूल को घटना की पूरी रिपोर्ट, सीसीटीवी रिकॉर्ड (यदि कोई हो), स्टाफ की ड्यूटी चार्ट, FIR की कॉपी, सुरक्षा नीति और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के उपाय जमा करने होंगे. साथ ही निजी परिसर की स्वामित्व जानकारी, सुरक्षा और फायर सेफ्टी दस्तावेज भी मांगे गए हैं.
अगर स्कूल संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया तो विभाग मान्यता रद्द करने, स्कूल प्रबंधन को अधिग्रहित करने (Rule 24(4) के तहत) और DDA को स्कूल की जमीन की लीज रद्द करने की सिफारिश कर सकता है.
यह मामला दिल्ली के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और मानकों के सख्ती से पालन को लेकर नई बहस छेड़ सकता है. अभिभावक अब अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं.
