Gen Alpha बच्चों की ये आदतें माता-पिता को कर रही हैरान, जानिए नई पीढ़ी कैसे सोचती है?

Last Updated:

Gen Alpha बच्चे बचपन से ही मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बीच बड़े हो रहे हैं, जिससे उनकी आदतें और सोच पहले की पीढ़ियों से काफी अलग नजर आती हैं. बढ़ता स्क्रीन टाइम और बाहर कम खेलना माता-पिता की चिंता बढ़ा रहा है, वहीं ये बच्चे Mental Health और अपनी feelings को लेकर ज्यादा खुलकर बात करते हैं. यही वजह है कि अब पेरेंट्स को भी बच्चों को समझने के लिए parenting का तरीका बदलना पड़ रहा है.

ख़बरें फटाफट

Gen Alpha बच्चों की खास बात.

आज की नई पीढ़ी पहले की तुलना में काफी अलग तरीके से सोचती और व्यवहार करती नजर आ रही है. खासतौर पर Gen Alpha यानी साल 2010 के बाद जन्मे बच्चे टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया के बीच बड़े हो रहे हैं. यही वजह है कि उनकी आदतें, पसंद और सोचने का तरीका भी तेजी से बदलता दिखाई देता है. कई माता-पिता को बच्चों की कुछ बातें हैरान करती हैं, क्योंकि वे अपने बचपन से बिल्कुल अलग माहौल में पल रहे हैं. जहां पहले बच्चे बाहर खेलना ज्यादा पसंद करते थे, वहीं आज की पीढ़ी ऑनलाइन दुनिया में ज्यादा सहज महसूस करती है.

Gen Alpha बच्चों की सबसे अलग बात यह मानी जाती है कि वे बहुत छोटी उम्र से ही स्मार्टफोन, टैबलेट और इंटरनेट का इस्तेमाल करना सीख जाते हैं. कई बच्चे बिना किसी मदद के मोबाइल ऐप्स चला लेते हैं, वीडियो ढूंढ लेते हैं और ऑनलाइन चीजें सीखने लगते हैं. माता-पिता के लिए यह कई बार आश्चर्य की बात होती है कि छोटे बच्चे भी टेक्नोलॉजी को इतनी जल्दी समझ लेते हैं. हालांकि इससे सीखने के नए अवसर मिल रहे हैं, लेकिन स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता भी बढ़ी है.

सवाल पूछने और अपनी राय रखने में आगे
नई पीढ़ी के बच्चे सिर्फ बातें सुनने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हर चीज को समझना चाहते हैं. वे किसी नियम या बात के पीछे की वजह जानने की कोशिश करते हैं. कई माता-पिता को लगता है कि बच्चे ज्यादा बहस करते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे उनकी curiosity और self-expression से जोड़कर देखते हैं. आज के बच्चे अपनी पसंद-नापसंद खुलकर बताते हैं और कई बार परिवार के फैसलों में भी अपनी राय देना चाहते हैं.

Mental Health को लेकर ज्यादा जागरूक
पहले बच्चों के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर इतनी खुलकर बात नहीं होती थी, लेकिन Gen Alpha में यह बदलाव तेजी से देखने को मिल रहा है. आज कई बच्चे इमोशन, तनाव और घबराहट जैसे शब्दों को समझने लगे हैं. सोशल मीडिया और इंटरनेट के कारण उन्हें अलग-अलग विषयों की जानकारी जल्दी मिल जाती है. यही वजह है कि वे अपनी feelings को खुलकर व्यक्त करने की कोशिश करते हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ज्यादा डिजिटल exposure बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर दबाव भी बढ़ा सकता है.

पारंपरिक खेलों से ज्यादा डिजिटल दुनिया की तरफ झुकाव
आज के कई बच्चे बाहर खेलने की बजाय वीडियो गेम, ऑनलाइन कंटेंट और वर्चुअल एक्टिविटीज में ज्यादा रुचि दिखाते हैं. यही बदलाव माता-पिता को सबसे ज्यादा महसूस होता है. जहां पहले मोहल्लों में बच्चों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहीं अब कई बच्चे घर के अंदर ही स्क्रीन के साथ समय बिताना पसंद करते हैं. इसका असर उनकी फिजिकल एक्टिविटी और सोशल व्यवहार पर भी पड़ सकता है.

माता-पिता को बदलना पड़ रहा है Parenting का तरीका
Gen Alpha बच्चों के साथ पुराने समय वाली parenting हर बार काम नहीं करती. आज माता-पिता को बच्चों से बातचीत का तरीका बदलना पड़ रहा है. सिर्फ डांटने या रोकने की बजाय अब उन्हें बच्चों की बात सुनने और समझाने पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नई पीढ़ी को guide करने के लिए balance जरूरी है, ताकि बच्चे टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करें और असली दुनिया से भी जुड़े रहें.

About the Author

Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *