3000 से ज्यादा रेप केस, लेकिन सजा सिर्फ 133 में! RTI के आंकड़ों ने खड़े किए सवाल, जानिए पूरी रिपोर्ट

होमताजा खबरDelhi

रेप केस में सिर्फ 4% कनविक्शन रेट! क्या जांच प्रक्रिया पर उठ रहे हैं बड़े सवाल

Last Updated:

दिल्ली में रेप और दहेज प्रताड़ना मामलों के कनविक्शन रेट को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. पुरुष अधिकार कार्यकर्ता शोनी कपूर द्वारा RTI के जरिए जुटाए गए आंकड़ों में बेहद कम दोषसिद्धि दर सामने आने के बाद कानूनों के दुरुपयोग और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.

ख़बरें फटाफट

दिल्ली: महिलाओं की सुरक्षा के लिए देश में रेप और दहेज प्रताड़ना जैसे मामलों को लेकर सख्त कानून बनाए गए हैं. इन कानूनों का उद्देश्य महिलाओं को न्याय और सुरक्षा देना है, लेकिन कई बार इनके दुरुपयोग के आरोप भी सामने आते रहे हैं. अब दिल्ली में पुरुष अधिकारों पर काम करने वाले कार्यकर्ता शोनी कपूर ने RTI के जरिए कुछ ऐसे आंकड़े सामने रखे हैं, जिन पर बहस तेज हो सकती है.

RTI में सामने आए आंकड़े
शोनी कपूर के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत डेटा हासिल किया. इसमें द्वारका जिला अदालत को छोड़कर अन्य जिला अदालतों में वर्ष 2021 से 2024 के बीच निपटाए गए रेप मामलों की संख्या 3097 बताई गई है. इनमें से केवल 133 मामलों में ही दोषसिद्धि हुई, यानी कनविक्शन रेट करीब 4.29 प्रतिशत रहा. वहीं दहेज प्रताड़ना मामलों को लेकर उन्होंने दावा किया कि करीब 9976 मामलों में से सिर्फ 23 मामलों में ही दोषसिद्धि हुई, जो लगभग 0.24 प्रतिशत कनविक्शन रेट है.

कम कनविक्शन रेट पर क्या बोले कार्यकर्ता?
शोनी कपूर का कहना है कि कई मामलों में शिकायतें झूठी भी हो सकती हैं, जबकि कई केस अदालत के बाहर समझौते के जरिए खत्म हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि अगर बड़ी संख्या में मामले कोर्ट के बाहर ही सुलझ जाते हैं, तो कम कनविक्शन रेट पर भी गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए. हालांकि यह उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है.

क्या कानून में हो सकता है बदलाव?
जब उनसे पूछा गया कि क्या इन कानूनों में बदलाव संभव है, तो उनका कहना था कि बड़े स्तर पर कानून बदलने की संभावना फिलहाल कम दिखती है. हालांकि उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दहेज कानूनों के तहत तुरंत गिरफ्तारी की प्रक्रिया में बदलाव जरूर आया है. अब पुलिस पहले जांच करती है और उसके बाद कार्रवाई करती है. उनका मानना है कि भविष्य में ऐसे और बदलाव हो सकते हैं, जिससे किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामलों में फंसने से बचाया जा सके.

महिलाओं की सुरक्षा और कानून का संतुलन जरूरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून बेहद जरूरी हैं, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि उनका दुरुपयोग न हो. कानून का उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाना और निर्दोष को सुरक्षित रखना दोनों होना चाहिए.

About the Author

Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *