नई दिल्ली. करीब 3000 करोड़ रुपये के चर्चित मुद्रा पोर्ट ड्रग्स बरामदगी और उससे जुड़े नार्को-टेरर नेटवर्क की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तफ्तीश के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस हाई-प्रोफाइल मामले में एंट्री कर ली है. बुधवार को ईडी ने दिल्ली समेत कुल 5 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाकर अहम दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं. जांच एजेंसियों के रडार पर अब दिल्ली के कुछ नाइट क्लब और उनसे जुड़े कारोबारी भी हैं, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान से जुड़े ड्रग्स सिंडिकेट की कमाई का एक हिस्सा राजधानी के नाइट क्लब कारोबार में लगाया गया.
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की मौजूदा जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि भारत में तस्करी कर लाए गए मादक पदार्थों से अर्जित अवैध धन को किस तरह वैध कारोबारी निवेश के रूप में खपाया गया. शुरुआती जांच में यह संदेह मजबूत हुआ है कि ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े कुछ आरोपी और उनके सहयोगी दिल्ली-एनसीआर में नाइटलाइफ और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के जरिए काले धन को सफेद बनाने की कोशिश कर रहे थे. इसी एंगल की पड़ताल के लिए ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के प्रावधानों के तहत छापेमारी शुरू की है. सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई नाइट क्लब ऑपरेटर्स, निवेशकों और उनसे जुड़े संदिग्ध बिचौलियों से पूछताछ हो सकती है.
मुद्रा पोर्ट से जुड़ा मामला
यह मामला मूल रूप से मुद्रा पोर्ट पर भारी मात्रा में हेरोइन बरामदगी से जुड़ा है, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों को झकझोर दिया था. कुछ साल पहले अफगानिस्तान से ईरान के बंदर अब्बास रूट के जरिए भारत पहुंची एक खेप से लगभग 2988.210 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी. शुरुआती खुलासा राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने किया था. इसके बाद जब जांच में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट, हवाला, फर्जी आयात-निर्यात और आतंकी नेटवर्क के बीच कड़ियों के संकेत मिलने लगे, तब मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे NIA को सौंप दिया गया. एनआईए ने 14 अक्टूबर 2021 को केस टेकओवर किया और उसके बाद से इस नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की जा रही है.
नार्को-टेरर मॉड्यूल
एनआईए की जांच में यह सामने आया कि यह कोई साधारण ड्रग्स तस्करी का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नार्को-टेरर मॉड्यूल का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, दुबई और भारत के कई शहरों तक फैला नेटवर्क सक्रिय था. एजेंसी ने अपनी जांच के दौरान पाया कि अफगानिस्तान से संचालित कारोबारी और तस्करी नेटवर्क भारत में मौजूद सहयोगियों, फर्जी कंपनियों और लॉजिस्टिक चैनलों की मदद से हेरोइन की खेप भारत तक पहुंचा रहे थे. इसके लिए वैध व्यापार की आड़, शेल कंपनियों, आयात-निर्यात दस्तावेजों और संदिग्ध कारोबारी संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया.
अब तक कई चार्जशीट दाखिल
इसी मामले में एनआईए ने 2022 और 2023 के दौरान कई चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कीं. पहली चार्जशीट 14 मार्च 2022 को दायर की गई थी, जिसमें 16 आरोपियों को नामजद किया गया. इसके बाद 28 अगस्त 2022 को पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हुई, जिसमें 9 और आरोपियों को शामिल किया गया. फिर 20 फरवरी 2023 को एनआईए ने अहम दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 22 आरोपियों और उनसे जुड़ी कंपनियों को नामजद किया गया. इन आरोपियों में भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से जुड़े व्यक्ति तथा कई कारोबारी फर्म शामिल हैं.
आरोप-पत्र में कई आरोपी
एनआईए की चार्जशीट में जिन प्रमुख नामों का जिक्र है, उनमें दिल्ली के हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार, प्रिंस शर्मा, जसबीर सिंह और वित्याश कोसेर उर्फ राजू जैसे आरोपी शामिल हैं. इनके अलावा अफगानिस्तान से जुड़े राह मातुल्ला काकर, शहीनशाह जाहिर, फरीदून अमानी उर्फ जावेद अमानी, अब्दुल सलाम नूरजई, मोहम्मद हुसैन दाद और मोहम्मद हसन शाह जैसे नाम भी जांच के केंद्र में हैं. PoK से जुड़े मोहम्मद इकबाल आवान का नाम भी आरोपियों में शामिल है. जांच एजेंसी ने कई भारतीय और अफगान कंपनियों को भी आरोपी बनाया है, जिनके जरिए कथित तौर पर तस्करी और मनी ट्रेल को छिपाने की कोशिश की गई.
क्या कर रही है ईडी?
सूत्रों के अनुसार, ईडी की ताजा कार्रवाई में उन वित्तीय कड़ियों को खंगाला जा रहा है जो एनआईए की जांच में सामने आई थीं. इसमें यह देखा जा रहा है कि ड्रग्स से कमाए गए पैसों को किस माध्यम से दिल्ली और अन्य शहरों में घुमाया गया, किन लोगों के खातों में रकम पहुंची, किन कंपनियों में निवेश हुआ और किन व्यवसायों का इस्तेमाल लेयरिंग तथा इंटीग्रेशन के लिए किया गया. जांच एजेंसी खास तौर पर इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या ड्रग्स मनी को कैश, हवाला और फर्जी कारोबारी एंट्री के जरिए नाइट क्लब, रेस्टो-बार और हॉस्पिटैलिटी कारोबार में लगाया गया. अगर ऐसा साबित होता है, तो यह मामला सिर्फ मादक पदार्थ तस्करी या हवाला तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठित अपराध, आतंक वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े गठजोड़ के रूप में सामने आ सकता है.
लश्कर की भूमिका से टेंशन
जांच एजेंसियों के लिए सबसे चिंताजनक पहलू इस केस में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की कथित भूमिका का सामने आना है. एनआईए की जांच में यह आरोप सामने आया कि हेरोइन की तस्करी से हासिल धन का इस्तेमाल भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाना था. एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ऑपरेटिव्स को मदद पहुंचाई जा रही थी और नशे के कारोबार से होने वाली कमाई आतंक के ढांचे को मजबूत करने में लगाई जा रही थी. यही वजह है कि यह केस महज ड्रग्स बरामदगी का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला बन गया.
अब मामले की दो हिस्सों में जांच
ईडी की एंट्री के बाद अब इस केस का फोकस दो हिस्सों में बंट गया है. पहला, एनआईए की ओर से आतंकी साजिश, अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की जांच; और दूसरा, ईडी की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध निवेश, बेनामी संपत्तियों और कारोबारी प्रतिष्ठानों के जरिए काले धन को सफेद करने के प्रयासों की पड़ताल. सूत्रों का कहना है कि ईडी जल्द ही कुछ आरोपियों, उनके परिजनों, कारोबारी साझेदारों और नाइट क्लब इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है. कई बैंक खातों, संपत्तियों और कंपनियों के दस्तावेजों की भी फोरेंसिक जांच की जा रही है.
इस मामले में पहले से गिरफ्तार हो चुके आरोपी हरप्रीत सिंह तलवार और शम्सुद्दीन समेत अन्य संदिग्धों से जुड़े नेटवर्क को भी दोबारा खंगाला जा रहा है. हालांकि इनमें से कुछ आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं, लेकिन एजेंसियां उनकी गतिविधियों, कारोबारी संबंधों और कथित निवेश चैनलों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. माना जा रहा है कि ईडी की तफ्तीश के बाद इस केस में नए नाम सामने आ सकते हैं और दिल्ली-एनसीआर के मनोरंजन व हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट की बड़ी साजिश
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट अब सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने नेटवर्क को वैध कारोबार की परतों के भीतर छिपाकर लंबे समय तक सक्रिय रखना चाहते हैं. ड्रग्स, हवाला, शेल कंपनियां, सीमा पार आतंकी संगठन और शहरी लाइफस्टाइल कारोबार इन सबका मेल सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है. यही वजह है कि मुंद्रा पोर्ट हेरोइन केस की जांच अब केवल जब्ती और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसे संगठित आपराधिक-आतंकी वित्तीय ढांचे की पड़ताल बन चुकी है, जिसकी जड़ें देश के भीतर और बाहर तक फैली हुई हैं.
