सूखते हलक… तरसती दिल्ली! हरियाणा ने मान ली CM रेखा गुप्‍ता की बात, राजधानी में अब नहीं होगी पानी की किल्‍लत

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सूखते हलक, तरसती दिल्ली! CM रेखा की कोशिश लाई रंग, हरियाणा ने छोड़ा पानी

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Delhi Water Crisis: गंभीर जल संकट से जूझ रही दिल्ली के लिए राहत की खबर है. हरियाणा सरकार ने दिल्ली की समस्या को दूर करने के लिए मुनक नहर में 979.50 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ा है. यमुना का जल स्तर गिरने से दिल्ली के वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्र ठप होने की कगार पर थे. रेखा गुप्‍ता और नायब सिंह सैनी सरकार के बीच हुई बातचीत के बाद उठाए गए इस कदम से अगले कुछ दिनों में जलापूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है.

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दिल्‍ली में इन दिनों पानी की भारी किल्‍लत है.

नई दिल्ली: भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत से जूझ रही देश की राजधानी दिल्ली के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. दिल्ली में जारी गंभीर जल संकट को कम करने के लिए हरियाणा सरकार ने मुनक नहर में 979.50 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ दिया है. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों राज्यों की सरकारों के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत और समन्वय के बाद हरियाणा इस अतिरिक्त पानी की आपूर्ति बहाल करने पर सहमत हुआ, जिससे दिल्ली के प्रभावित इलाकों में जलापूर्ति की स्थिति में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है.

वजीराबाद और चंद्रावल प्लांट में थमा संकट
पिछले कुछ दिनों से यमुना नदी के जल स्तर में आई भारी गिरावट के कारण दिल्ली के दो सबसे प्रमुख वाटर ट्रीटमेंट प्लांट वजीराबाद और चंद्रावल का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो गया था. कच्चे पानी की भारी कमी के चलते ये दोनों बड़े प्लांट अपनी वास्तविक क्षमता से काफी कम पर काम कर रहे थे, जिसके कारण मध्य, उत्तरी और लुटियंस दिल्ली के कई हिस्सों में हाहाकार मचा हुआ था. इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों ने हैदरपुर नहर नेटवर्क से पानी को डायवर्ट करके प्रभावित इलाकों में किसी तरह सप्लाई बनाए रखने की कोशिश की थी.

अगले कुछ दिनों में सामान्य होगी स्थिति
मुनक नहर में हरियाणा द्वारा छोड़े गए इस अतिरिक्त पानी के बाद अब वजीराबाद और चंद्रावल प्लांटों में कच्चे पानी की उपलब्धता बढ़ जाएगी. दिल्ली सरकार के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नहर से पानी को दिल्ली के प्लांटों तक पहुंचने और वहां से ट्रीटमेंट के बाद पाइपलाइनों के जरिए घरों तक पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर दिल्ली के प्रभावित रिहायशी और कमर्शियल इलाकों में पानी की सप्लाई धीरे-धीरे पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी.

दिल्‍ली वाटर क्राइसेस से जुड़ी 5 मुख्य बातें

हरियाणा से मिली राहत: दिल्ली में जारी गंभीर पानी की किल्लत के बीच हरियाणा ने मुनक नहर में 979.50 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ा है.
द्विपक्षीय बातचीत का असर: यह कदम दिल्ली और हरियाणा सरकार के अधिकारियों के बीच संकट को लेकर हुई सकारात्मक बातचीत के बाद उठाया गया है.
प्लांट्स का ठप होना: यमुना का जल स्तर घटने से दिल्ली के दो सबसे महत्वपूर्ण जल शोधन संयंत्र—वजीराबाद और चंद्रावल—अपनी क्षमता से बेहद कम पर चल रहे थे.
अधिकारियों का वैकल्पिक प्रयास: संकट के दौरान आपूर्ति बनाए रखने के लिए दिल्ली के अधिकारियों ने हैदरपुर नहर नेटवर्क से पानी डायवर्ट कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया था.
जल्द सामान्य होगी सप्लाई: सूत्रों के अनुसार, अतिरिक्त पानी दिल्ली पहुंचने के साथ ही अगले कुछ दिनों में प्रभावित इलाकों में जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर लौट आएगी.

अंतर-राज्यीय जल समन्वय और दिल्ली की निर्भरता
दिल्ली में हर साल गर्मियों के मौसम में गहराने वाला जल संकट यह साफ दर्शाता है कि देश की राजधानी अपनी बुनियादी जरूरतों, विशेषकर पेयजल के लिए पूरी तरह से पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है. यमुना के घटते जल स्तर और मुनक नहर में पानी के कम प्रवाह के कारण वजीराबाद और चंद्रावल जैसे बड़े संयंत्रों का प्रभावित होना दिल्ली के जल प्रबंधन की संवेदनशीलता को उजागर करता है.

इस बार दिल्ली और हरियाणा सरकार के बीच त्वरित संवाद से 979.50 क्यूसेक पानी छुड़वाना एक बेहद सकारात्मक राजनीतिक और प्रशासनिक कदम है. यह साबित करता है कि गंभीर संकट के समय राज्यों के बीच आपसी समन्वय ही जनता को राहत दे सकता है. हालांकि, दिल्ली को इस तरह के संकटों से स्थायी रूप से उबरने के लिए जल संचयन, वाटर रीसाइक्लिंग और हैदरपुर जैसे वैकल्पिक नहर नेटवर्कों के स्थायी सुदृढ़ीकरण पर दीर्घकालिक नीति बनाने की सख्त आवश्यकता है.

सवाल-जवाब
दिल्ली को जल संकट से उबारने के लिए हरियाणा ने मुनक नहर में कितना पानी छोड़ा है?
हरियाणा सरकार ने दिल्ली की पानी की किल्लत को दूर करने के लिए मुनक नहर में 979.50 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ा है.
कच्चे पानी की कमी के कारण दिल्ली के कौन से दो प्रमुख वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रभावित हुए थे?
यमुना नदी के जल स्तर में भारी गिरावट आने के कारण दिल्ली के वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्र (Water Treatment Plants) अपनी क्षमता से कम पर काम कर रहे थे.
संकट के दौरान दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में क्या कदम उठाया था?
स्थिति से निपटने और आवश्यक जलापूर्ति को बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने अस्थाई रूप से हैदरपुर नहर नेटवर्क से पानी को डायवर्ट कर प्रभावित इलाकों में भेजने का प्रयास किया था.

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Sandeep GuptaChief Sub Editor

डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें

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