अब तेल कंपन‍ियां नहीं लगा पाएंगी चपत, सरकार ने कर दिया ऐसा काम, महंगाई का हो जाएगा काम तमाम!

नई द‍िल्‍ली. देशभर के उपभोक्ताओं को खाद्य तेल खरीदते समय अब कंपनियां ग्राम और अजीबो-गरीब पैक साइज़ के नाम पर चपत नहीं लगा सकेंगी. उपभोक्ता मामलों का विभाग खाद्य तेलों के लिए मानक पैक साइज़ तय करने की तैयारी कर रहा है, ताकि कीमतों की तुलना आसान हो सके और महंगाई के खेल पर लगाम लगे.

फिलहाल बाजार में 650 ग्राम, 700 ग्राम, 810 ग्राम, 850 ग्राम और 870 ग्राम जैसे तरह-तरह के पैक उपलब्ध हैं. दिखने में लगभग एक जैसे पैक में अलग-अलग मात्रा होने की वजह से आम उपभोक्ता के लिए सही तुलना करना मुश्किल हो जाता है और कंपनियां इसी भ्रम का फायदा उठा लेती हैं. अब प्रस्ताव है कि खाद्य तेल के पैक साइज़ को 200 ml, 500 ml, 1 लीटर, 2 लीटर, 3 लीटर, 4 लीटर, 5 लीटर, 15 लीटर/15 किलो और 20 लीटर/20 किलो जैसे मानकों में सीमित किया जाए.

सरकार क‍िसके साथ कर रही है व‍िचार
इस पहल पर विचार लीगल मेट्रोलॉजी ढांचे के तहत किया जा रहा है. कुछ दिन पहले उपभोक्ता मामलों के विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इंडियन वेजिटेबल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA), सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA), सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA), सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (COOIT) और मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (MOPA) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. ये संगठन देश के करीब 90 प्रतिशत खाद्य तेल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.

पैक साइज तय करने का सुझााव
उद्योग संगठनों ने बैठक में कहा कि मौजूदा हालात में अलग-अलग मात्रा वाले पैक के कारण बाजार में भ्रम की स्थिति है, जिससे उपभोक्ता असल कीमत नहीं समझ पाते. इसलिए 200 ml से लेकर 20 लीटर/20 किलो तक के मानक पैक साइज तय करने का सुझाव दिया गया. प्रस्ताव में पाम, सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटनसीड, कॉर्न और ब्लेंडेड एडिबल ऑयल जैसे प्रमुख खाद्य तेलों को शामिल करने की बात कही गई है.

200 ग्राम के छोटे पैक को रखा गया है बाहर
हालांकि, सुझाव यह भी दिया गया है कि 200 ml से छोटे पैक को मानकीकरण से बाहर रखा जाए, ताकि कम कीमत वाले छोटे पैक बाजार में उपलब्ध रह सकें और गरीब व छोटे उपभोक्ताओं की जरूरतें भी पूरी होती रहें. इसके साथ ही कुछ ‘माइनर एडिबल ऑयल’ को भी इस दायरे से छूट देने की बात कही गई है. उद्योग ने मांग की है कि नए नियम लागू करने से पहले कंपनियों को पैकेजिंग और उत्पादन में बदलाव के लिए लगभग 3 महीने का ट्रांजिशन पीरियड दिया जाए. साथ ही जो निर्माता पहले से नए पैक साइज़ अपनाना चाहें, उन्हें इसकी अनुमति दी जाए.

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो यह घरेलू और आयातित, दोनों तरह के खाद्य तेलों पर समान रूप से लागू होगी. विभाग के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं के लिए कीमत तुलना आसान बनाना और निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं को बढ़ावा देना है. इससे कंपनियों द्वारा ग्राम के खेल के जरिए की जा रही चालबाजी पर रोक लगेगी और महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है.

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