दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज की छात्रा श्रृष्टि दहिया ने योग की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल किया है. गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित पहले योग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में श्रृष्टि ने भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर देश और अपने कॉलेज का नाम रोशन किया है. उनकी यह जीत सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि 9 साल की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का नतीजा है.
9 साल की मेहनत और लगातार अभ्यास
श्रृष्टि दहिया पिछले 9 सालों से योग कर रही हैं. उन्होंने बताया कि 10 साल की उम्र में योग शुरू किया था. शुरुआत में वह अपने भाई को देखकर घर पर बेसिक योग करती थीं. बाद में हरियाणा के करनाल स्टेडियम में योग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और यहीं से उनका सफर आगे बढ़ा.
श्रृष्टि ने बताया कि वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए उन्होंने पिछले 6 महीनों तक लगातार कड़ी मेहनत की. सुबह और शाम दोनों समय करीब 2-2 घंटे अभ्यास करती थीं. इसके बाद भारतीय टीम के ट्रायल सोनीपत साई सेंटर में हुए, जहां सिलेक्शन के बाद 20 दिन का कैंप अहमदाबाद में लगा.
वर्ल्ड कप में श्रीलंका को हराकर जीता गोल्ड
यह प्रतियोगिता 4 जून से 8 जून तक गुजरात के अहमदाबाद में हुई थी. श्रृष्टि सीनियर गर्ल्स ट्रेडिशनल ग्रुप इवेंट का हिस्सा थीं. फाइनल मुकाबला श्रीलंका की टीम से हुआ, जिसमें भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. श्रृष्टि ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान टीम ने दो राउंड खेले और अंत में भारत ने जीत हासिल की. उन्होंने कहा कि पहली योग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में देश के लिए गोल्ड जीतना उनके लिए गर्व की बात है.
तिरंगा लेकर राष्ट्रगान सुनना था सपना
गोल्ड मेडल जीतने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए श्रृष्टि ने कहा कि उनका सपना था कि वह पोडियम पर खड़ी होकर तिरंगा हाथ में लें और राष्ट्रगान गाएं. अपनी इस सफलता का श्रेय परिवार, दोस्तों, शिक्षकों और कॉलेज को दिया. खासतौर पर मिरांडा हाउस कॉलेज की प्रिन्सिपल नंदा मैम का धन्यवाद भी किया. आपको बता दें श्रृष्टि अब तक योग में करीब 120 मेडल जीत चुकी हैं, जिनमें 30 से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर के मेडल शामिल हैं.
पढ़ाई और खेल साथ साथ
मिरांडा हाउस में फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट श्रृष्टि के लिए पढ़ाई और स्पोर्ट्स को एक साथ करना आसान नहीं था. उसने बताया कि 12वीं क्लास में नेशनल कॉम्पिटिशन और पढ़ाई को एक साथ करना मुश्किल था. इसके बावजूद, वह अपने गोल पर फोकस रही, अच्छे मार्क्स लाए और मिरांडा हाउस में एडमिशन मिला.
फिटनेस के लिए प्रोटीन और हाइड्रेशन जरूरी
योग से शरीर की मसल्स पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है. इसलिए श्रृष्टि ने अपनी डाइट में प्रोटीन और हाइड्रेशन को सबसे ज्यादा महत्व दिया. कैंप के दौरान, एथलीट्स को प्रोटीन से भरपूर खाना दिया गया ताकि उनका शरीर जल्दी ठीक हो सके.
नेगेटिव कमेंट्स को नजरअंदाज करना
श्रृष्टि ने बताया कि लड़की होने की वजह से उन्हें अक्सर नेगेटिव कमेंट्स सुनने को मिलते थे. लोग कहते थे कि लड़कियों को बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने से बचना चाहिए और अपने करियर पर ध्यान देना चाहिए.
लेकिन इन कमेंट्स पर ध्यान देने के बजाय, उन्होंने अपने लक्ष्यों और अपने सपोर्टर्स पर भरोसा किया. श्रृष्टि ने युवाओं को सलाह देते हुए कहा कि अगर कोई सपना पूरा करना है, तो अनुशासन और लगातार मेहनत बहुत जरूरी है.
