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Ghaziabad News : कुष्ठ रोग की जांच गाजियाबाद के संयुक्त जिला अस्पताल में पहली बार शुरू की गई है. यह जांच यहां पूरी तरह नि:शुल्क है. अब तक मरीजों को इसकी जांच के लिए दिल्ली के बड़े अस्पतालों या प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता था. उद्घाटन के साथ ही जांच प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई. पहले ही दिन एक मरीज का सैंपल लिया गया. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में इस समय करीब 119 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है. गाजियाबाद की स्किन रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या के मुताबिक, कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से त्वचा और नसों को प्रभावित करती है.
गाजियाबाद. यूपी के गाजियाबाद में अब कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) की जांच के लिए मरीजों को दिल्ली या निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. संयुक्त जिला अस्पताल में पहली बार ऐसी आधुनिक जांच सुविधा शुरू की गई है, जिससे जिले के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी. अब तक मरीजों को जांच के लिए दिल्ली के बड़े अस्पतालों या प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता था, जहां ज्यादा जेब पर फर्क पड़ता था. अब जिले में ही यह सुविधा मिलने से मरीजों का इलाज तेजी से शुरू हो सकेगा और बीमारी की सही पहचान समय रहते हो पाएगी. यह जांच संयुक्त जिला अस्पताल में पूरी तरह नि:शुल्क है.
गाजियाबाद के संजय नगर संयुक्त जिला अस्पताल की एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला (आईपीएचएल) लैब में लेप्रोसी जांच सुविधा का शुभारंभ किया गया. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित विक्रम और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय गुप्ता ने फीता काटकर इस नई सुविधा की शुरुआत की. उद्घाटन के साथ ही जांच प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई और पहले ही दिन एक मरीज का सैंपल लिया गया.
बढ़ाया जा रहा जांच का दायरा
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, संयुक्त जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब को आईपीएचएल से जोड़ने के बाद लगातार नई जांच सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं. इसी क्रम में अब स्लिट स्किन स्मीयर (एसएसएस) जांच शुरू की गई है. यह जांच कुष्ठ रोग की पुष्टि करने में बेहद अहम मानी जाती है. पहले इस जांच के लिए मरीजों को दिल्ली रेफर किया जाता था. कई मरीज निजी अस्पतालों में महंगी जांच कराने को मजबूर थे जिससे हजारों रुपये खर्च हो जाते थे. अब यह सुविधा सरकारी अस्पताल में शुरू होने से जरूरतमंद मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा.
क्या होता है इसमें
माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सुरुचि सैनी ने बताया कि कुष्ठ रोग की जांच के दौरान मरीज के कान की लोब, त्वचा पर बने धब्बों और शरीर के प्रभावित हिस्सों से सैंपल लिया जाता है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में इस समय करीब 119 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है. हालांकि पिछले साल की तुलना में मरीजों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, जिसे स्वास्थ्य विभाग राहत की बात मान रहा है. स्किन रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या के मुताबिक, कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से त्वचा और नसों को प्रभावित करती है. इसके शुरुआती लक्षणों में शरीर पर हल्के या लाल धब्बे पड़ना, प्रभावित हिस्से में सुन्नपन, हाथ-पैरों में झनझनाहट और कमजोरी महसूस होना शामिल है. डॉक्टरों का कहना है कि समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें
