मोबाइल की लत छुड़ाने का खास कोर्स शुरू, 5000 बच्चों में 'तीसरी आंख' एक्टिव करने का दावा

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मोबाइल की लत छुड़ाने का खास कोर्स शुरू, बच्चों में एक्टिव होगी ‘तीसरी आंख’

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स्पिरिचुअल एक्सपो में प्रभात पाण्डेय के स्टॉल पर लोगों की भारी भीड़ जुटी. यहां बच्चों की आंखों पर पट्टी बांधकर उनसे नोटों पर लिखे नंबर और अलग-अलग रंगों की वस्तुओं की पहचान कराई गई. बच्चों द्वारा सही जवाब देने पर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए.

नई दिल्ली: छोटे बच्चों में मोबाइल फोन की बढ़ती लत आज माता-पिता के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है. कई अभिभावकों का मानना है कि लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों की एकाग्रता, व्यवहार और याददाश्त पर असर पड़ रहा है. इसी समस्या से परेशान होकर दिल्ली-एनसीआर के रहने वाले प्रभात पाण्डेय ने ‘सत्य अनुभूति आश्रम’ की शुरुआत की. उनका दावा है कि यहां विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों की ‘तीसरी आंख’ यानी मानसिक क्षमताओं को विकसित करने का प्रयास किया जाता है.

स्पिरिचुअल एक्सपो में कार्यों का प्रदर्शन
नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक स्पिरिचुअल एक्सपो के दौरान प्रभात पाण्डेय ने अपने कार्यों का प्रदर्शन किया. इस दौरान कुछ बच्चों की आंखों पर पट्टी बांधकर उनसे नोटों पर लिखे नंबर और विभिन्न रंगों की वस्तुओं की पहचान कराई गई. इस प्रदर्शन ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया.

नौकरी छोड़कर आश्रम की स्थापना
प्रभात पाण्डेय का कहना है कि वह पिछले 25 वर्षों से बच्चों के व्यक्तित्व विकास, ज्योतिष और अन्य आध्यात्मिक विधाओं से जुड़े कार्य कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में काम करने के लिए उन्होंने कई बार कॉर्पोरेट क्षेत्र की नौकरी भी छोड़ी. वर्ष 2016 में उन्होंने पूरी तरह नौकरी छोड़कर सत्य अनुभूति आश्रम की स्थापना की.

बच्चों को इस प्रशिक्षण से लाभ
उनका दावा है कि अब तक 5,000 से अधिक बच्चों को इस प्रशिक्षण से लाभ मिला है. प्रभात के अनुसार, इस प्रक्रिया का संबंध मस्तिष्क में स्थित पीनियल ग्लैंड (Pineal Gland) से है, जिसे कुछ आध्यात्मिक परंपराओं में ‘तीसरा नेत्र’ भी कहा जाता है. उन्होंने बताया कि 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए करीब डेढ़ महीने का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाता है.

ऑनलाइन और ऑफलाइन कोर्स
प्रभात पाण्डेय का कहना है कि उनका उद्देश्य बच्चों में सकारात्मक सोच, अच्छे संस्कार और मोबाइल जैसी बुरी आदतों से दूरी बनाने में मदद करना है. उनके संस्थान से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बच्चे जुड़ रहे हैं.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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