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Delhi Water Crisis: दिल्ली में पानी का संकट डिस्ट्रिब्यूशन की भारी असमानता के कारण गहरा गया है. करावल नगर से आधी आबादी वाले मालवीय नगर को करीब तीन गुना ज्यादा पानी मिल रहा है. वहीं, झुग्गियों से लेकर गुलमोहर पार्क जैसे करोड़ों के बंगलों तक में गटर जैसा काला और दूषित पानी आ रहा है. लोग ₹6000 तक में प्राइवेट टैंकर खरीदने को मजबूर हैं. सरकार अब इस असंतुलन को सुधारने के लिए ‘वॉटर रेशनलाइजेशन प्रोजेक्ट’ लाने की तैयारी में है.
दिल्ली जलबोर्ड के ताजा आंकड़ो से ये खुलासा हुआ.
जावेद मंसूरी, रचना उपाध्याय, प्रियंका कांडपाल.
नई दिल्ली. करावल नगर की 4.60 लाख की भारी-भरकम आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है जबकि उससे आधी यानी मात्र 2.34 लाख की आबादी वाले मालवीय नगर पर दिल्ली जल बोर्ड ऐसा मेहरबान है कि उसे करावल नगर की तुलना में करीब तीन गुना ढाई गुना ज्यादा (14.18 एमजीडी) पानी परोसा जा रहा है. दिल्ली जल बोर्ड के ही सरकारी आंकड़ों ने इस कड़वी हकीकत को उजागर कर डिस्ट्रिब्यूशन की इस घिनौनी असमानता की पोल खोल दी है. क्या दिल्ली में प्यास बुझाने के लिए भी कोई वीआईपी कोटा चल रहा है और पानी का यह ‘कन्फर्म टिकट’ आखिर किस रसूख के दम पर बांटा जा रहा है? हैरत की बात यह है कि यह संकट अब सिर्फ झुग्गी-बस्तियों तक सीमित नहीं रहा, यह अमीरी और गरीबी की सरहदों को लांघ चुका है.
दक्षिणी दिल्ली के जिस गुलमोहर पार्क में लोग करोड़ों के बंगलों में रहते हैं, वहां पिछले 15 दिनों से नलों में पानी नहीं बल्कि गटर जैसा खौलता, काला और बदबूदार जहर टपक रहा है. करोड़ों की मिल्कियत वाले इन आलीशान आशियानों के बाहर आज लोग ₹6000 तक में प्राइवेट टैंकर खरीदने को मजबूर हैं और बदबूदार पानी के कारण घरों में लोग बीमार पड़ रहे हैं. न्यू मोती नगर की झुग्गियों से लेकर वीआईपी कॉलोनियों तक, लोग चीख रहे हैं कि वे देश की आधुनिक राजधानी में नहीं, बल्कि ‘मध्यकालीन युग’ के किसी बदहाल दौर में जी रहे हैं, जहां पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी एक रसूखदार ‘लॉटरी’ बनकर रह गई है.
दिल्ली पानी संकट की 5 मुख्य बातें
• डिस्ट्रिब्यूशन में भारी असमानता: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मालवीय नगर की आबादी करावल नगर से आधी है, लेकिन उसे करावल नगर (5.58 एमजीडी) की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा (14.18 एमजीडी) पानी मिल रहा है.
• पॉश इलाकों में भी हाहाकार: सिर्फ झुग्गी-बस्तियां ही नहीं, बल्कि गुलमोहर पार्क जैसे करोड़पति इलाकों में पिछले 15 दिनों से पानी नहीं है, और लोग 3500 से 6000 रुपये तक में प्राइवेट टैंकर खरीदने को मजबूर हैं.
• दूषित पानी और बीमारी का डर: न्यू मोती नगर और गुलमोहर पार्क जैसे विभिन्न इलाकों में गटर जैसा बदबूदार और दूषित पानी आ रहा है, जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं और पीने का पानी अलग से खरीदना पड़ रहा है.
• राशनिंग प्रोजेक्ट की तैयारी: जल मंत्री परवेश वर्मा के अनुसार, दिल्ली के 12 से 13 विधानसभा क्षेत्रों में हर साल सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं, जिसे ठीक करने के लिए सरकार वॉटर रेशनलाइजेशन प्रोजेक्ट लाने की सोच रही है.
• निजी टैंकरों की लूट और भ्रष्टाचार: संकट के बीच जल बोर्ड के कर्मचारियों द्वारा अंडर-द-टेबल पैसे मांगने और प्राइवेट टैंकर माफियाओं द्वारा मनमाने दाम वसूलने के गंभीर आरोप स्थानीय जनता ने लगाए हैं.
प्रशासनिक कुप्रबंधन और लचर डिस्ट्रिब्यूशन
दिल्ली का यह जल संकट केवल प्राकृतिक या मानसून की देरी का परिणाम नहीं है बल्कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक कुप्रबंधन और लचर डिस्ट्रिब्यूशन का नतीजा है. दिल्ली जल बोर्ड के पास 5803 ट्यूबवेल और 1005 टैंकरों का विशाल बेड़ा होने के बावजूद करावल नगर और संगम विहार जैसे क्षेत्रों को उनके अधिकार का पानी नहीं मिल पा रहा है.
इस संकट ने दिल्ली के सामाजिक ढांचे को भी प्रभावित किया है; लोग पानी के संकट के कारण अपने घरों में मेहमानों को आने से मना कर रहे हैं और महिलाएं व छोटे बच्चे अपना आधा दिन सिर्फ पानी का इंतजार करने में बिता रहे हैं. पॉश इलाकों की आरडब्ल्यूए (RWA) का यह कहना कि वे मध्यकालीन युगमें जी रहे हैं, दिल्ली के शहरी विकास के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है. जब तक पानी के लीकेज, टैंकर माफियाओं की साठगांठ और वीआईपी बनाम गैर-वीआईपी क्षेत्रों के बीच पानी के इस भारी अंतर को ‘तर्कसंगत बंटवारे’ के जरिए ठीक नहीं किया जाता, तब तक दिल्ली की प्यास बुझना नामुमकिन है.
सवाल-जवाब
दिल्ली जल बोर्ड के 31 मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में कुल कितनी पानी की आपूर्ति हो रही है?
आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की कुल 234.10 लाख (2.34 करोड़) आबादी के लिए रोजाना 751.19 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) पानी की आपूर्ति की जा रही है.
दिल्ली के किन इलाकों को सबसे ज्यादा और किन इलाकों को सबसे कम पानी मिल रहा है?
दिल्ली में सबसे ज्यादा पानी मटियाला विधानसभा (26.33 एमजीडी) और नरेला (18.69 एमजीडी) को मिल रहा है. जबकि सबसे कम पानी संगम विहार (5.09 एमजीडी) और करावल नगर (5.58 एमजीडी) को मिल रहा है.
गुलमोहर पार्क और न्यू मोती नगर के निवासियों ने पानी की गुणवत्ता को लेकर क्या शिकायतें की हैं?
दोनों ही इलाकों के लोगों ने शिकायत की है कि नलों में आने वाला पानी बेहद दूषित, गंदा और गटर जैसा काला है. पानी में इतनी बदबू है कि उसका इस्तेमाल दैनिक कार्यों में नहीं किया जा सकता और लोग इसे पीकर बीमार हो रहे हैं.
जल मंत्री परवेश वर्मा का ‘वॉटर रेशनलाइजेशन प्रोजेक्ट’ को लेकर क्या कहना है?
जल मंत्री ने स्वीकार किया है कि कुछ क्षेत्रों में अधिक और कुछ में बहुत कम पानी की आपूर्ति का असंतुलन वर्षों से है. इस अंतर को मिटाने के लिए सरकार ‘वॉटर रेशनलाइजेशन प्रोजेक्ट’ के जरिए प्रत्येक नागरिक को समान और न्यायसंगत पानी देने की योजना बना रही है.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें
