नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज मिरांडा हाउस में नए शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिला प्रक्रिया को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) बिजयालक्ष्मी नंदा ने छात्राओं को सलाह दी है कि वे केवल CUET के अंकों पर ध्यान न दें, बल्कि यह भी समझें कि उन्हें आगे किस विषय में पढ़ाई करनी है और अपने करियर को किस दिशा में ले जाना है. उन्होंने कहा कि छात्राएं अपना CUET स्कोर कार्ड और विषय मैपिंग (सब्जेक्ट मैपिंग) ध्यानपूर्वक देखें. इसकी पूरी जानकारी दिल्ली विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है. साथ ही, दाखिला प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज द्वारा आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी अवश्य देखें.
इन पाठ्यक्रमों की सबसे ज्यादा मांग
डॉ. नंदा ने बताया कि वर्तमान में पॉलिटिकल साइंस सबसे अधिक मांग वाला विषय बना हुआ है. इसके बाद इकोनॉमिक्स और हिस्ट्री में भी छात्राओं की काफी रुचि देखने को मिल रही है. वहीं, विज्ञान संकाय में लाइफ साइंस, बॉटनी और जूलॉजी जैसे विषयों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.
CUET से बढ़ा छात्रों का शैक्षणिक स्तर
उन्होंने कहा कि CUET लागू होने के बाद छात्रों की शैक्षणिक तैयारी और समझ पहले की तुलना में बेहतर हुई है. अब छात्राएं केवल 12वीं के अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि प्रवेश परीक्षा की तैयारी करके कॉलेज पहुंचती हैं, जिससे उनके ज्ञान और विषयों की समझ में भी वृद्धि हुई है.
जरूरतमंद छात्राओं को मिलेगी आर्थिक सहायता
मिरांडा हाउस में आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति और सहायता की व्यवस्था भी उपलब्ध है. डॉ. नंदा ने बताया कि कॉलेज का स्कॉलरशिप सेल एलुमनाई और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंडिंग के माध्यम से जरूरतमंद छात्राओं की मदद करता है. उन्होंने कहा कि जिन छात्राओं को दाखिले के बाद आर्थिक सहायता की आवश्यकता हो, वे कॉलेज की वेबसाइट पर उपलब्ध स्कॉलरशिप सेल के ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकती हैं.
दस्तावेज अपलोड करते समय बरतें सावधानी
प्रिंसिपल ने छात्राओं को सलाह दी कि वे फोटो, CUET स्कोर कार्ड, मार्कशीट और श्रेणी प्रमाणपत्र (कैटेगरी सर्टिफिकेट) स्पष्ट और सही तरीके से अपलोड करें. विशेष रूप से EWS और OBC प्रमाणपत्रों की वैधता और तारीख का ध्यान रखें, क्योंकि अब अधूरे या गलत दस्तावेजों के आधार पर दाखिला नहीं दिया जाएगा.
सीमित होस्टल सुविधा, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कॉलेज में सीमित सीटों के कारण सभी छात्राओं को होस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती. मिरांडा हाउस में 100 से कम छात्राओं के लिए होस्टल व्यवस्था है. हालांकि कॉलेज आसपास उपलब्ध पीजी और अन्य आवासीय विकल्पों की जानकारी भी उपलब्ध कराता है. छात्राओं की सुरक्षा के लिए कॉलेज में एंटी-रैगिंग सिस्टम, POSH एक्ट संबंधी जागरूकता, वीमेन डेवलपमेंट सेल (WDC) और पीयर मेंटरशिप सिस्टम जैसे कई सहायता तंत्र सक्रिय हैं.
जून में आयोजित होगा ओपन डे
डॉ. नंदा ने बताया कि इस वर्ष कॉलेज एक सप्ताह का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिससे नई छात्राओं को कॉलेज जीवन, शैक्षणिक माहौल और उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी मिल सके. इसके अलावा जून महीने में ओपन डे का आयोजन भी किया जाएगा, जहां छात्राएं और उनके अभिभावक कॉलेज का दौरा कर सकेंगे.
रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज में नई रिसर्च लैब, रिसर्च रूम, एयर-कंडीशंड हॉल और पुस्तकालय सुविधाओं का विस्तार एवं आधुनिकीकरण किया जा रहा है. अपने संदेश में प्रो. (डॉ.) बिजयालक्ष्मी नंदा ने कहा कि मिरांडा हाउस केवल अपनी रैंकिंग या भव्य इमारतों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां शिक्षक और छात्राओं के बीच मजबूत मानवीय संबंध विकसित होते हैं, जो लंबे समय तक बने रहते हैं. उन्होंने छात्राओं से अपील की कि यदि मिरांडा हाउस उनकी प्राथमिकता सूची में शामिल है, तो वे कॉलेज की वेबसाइट पर नियमित रूप से नजर बनाए रखें, दाखिला प्रक्रिया को अच्छी तरह समझें और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें.
