Malviya Nagar Delhi Hotel Fire: दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में लगी आग ने 21 लोगों की जिंदगी खाकर कर दी. लेकिन एक परिवार जो अस्पताल के बाहर उम्मीदों के सहारे खड़ा था, कुछ ही घंटों में मौत की खबरों के बीच बिखर गया. किसी ने सोचा भी नहीं था कि ICU में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे बुजुर्ग पिता के लिए दिल्ली पहुंचा परिवार खुद मौत के जाल में फंस जाएगा. साकेत के पास एक छोटे से होटल में ठहरे लोग बस यही चाहते थे कि अस्पताल पास रहे ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पहुंच सकें. लेकिन वही फैसला अब पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ा दर्द बन गया. बुधवार की सुबह जब होटल में आग लगी तो कुछ फोन कॉल्स आए, कुछ चीखें सुनाई दीं और फिर अचानक सब शांत हो गया. रिश्तेदार घंटों तक अस्पतालों और मोर्चरी के बाहर मोबाइल में तस्वीरें दिखाते रहे. कोई AIIMS के बाहर खड़ा था तो कोई मैक्स हॉस्पिटल के गलियारों में खबर का इंतजार कर रहा था. हर किसी को उम्मीद थी कि शायद कोई बच गया हो. लेकिन शाम तक सच सामने आ चुका था. परिवार के आठ लोग अब इस दुनिया में नहीं थे. यह हादसा सिर्फ एक आग की घटना नहीं है यह उन टूटते रिश्तों की कहानी है जिन्हें आखिरी बार एक ICU ने जोड़े रखा था.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस दर्दनाक हादसे के सेंटर में थे राधेश्याम अग्रवाल, जिनकी तबीयत कई दिनों से खराब थी और वे साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के ICU में भर्ती थे. परिवार के लोग अलग-अलग शहरों से दिल्ली पहुंचे थे ताकि उनके करीब रह सकें. राधेश्याम के बेटे विवेक अग्रवाल ने इसी वजह से हौज रानी स्थित फ्लोरिस स्टे नाम के एक बेड एंड ब्रेकफास्ट होटल में कमरे किराए पर लिए थे. उनके साथ मां प्रेमलता, पत्नी तरजनी और दोनों बेटियां जीविस्का और वारिया भी ठहरी हुई थीं. परिवार को उम्मीद थी कि कुछ दिनों में राधेश्याम अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौट आएंगे. लेकिन उससे पहले ही एक ऐसी त्रासदी हो गई जिसने पूरे परिवार को खत्म कर दिया. आग लगने के बाद विवेक ने अपने एक रिश्तेदार को फोन कर सिर्फ इतना कहा था, ‘यहां आग लग गई है.’ इसके बाद उनका कोई संदेश नहीं आया. सुबह होते-होते दिल्ली, गुरुग्राम और राजस्थान से रिश्तेदार अस्पतालों की ओर भागने लगे. हर चेहरे पर डर था और हर आंख किसी चमत्कार का इंतजार कर रही थी.
अस्पताल के करीब रहने की कोशिश बनी आखिरी फैसला
- रिपोर्ट के अनुसार परिवार के करीबी रिश्तेदार प्रेम बंसल ने बताया कि होटल सिर्फ इसलिए चुना गया था क्योंकि वह अस्पताल के बेहद करीब था. परिवार चाहता था कि ICU में भर्ती राधेश्याम अग्रवाल के पास हर समय कोई न कोई मौजूद रहे. विवेक अग्रवाल एक मल्टीनेशनल कंपनी में डायरेक्टर रह चुके थे और गुरुग्राम में रहते थे. उनकी एक बेटी बेंगलुरु से खासतौर पर अपने दादा से मिलने दिल्ली आई थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात परिवार की आखिरी याद बन जाएगी. हादसे के बाद करीब 40 रिश्तेदार अलग-अलग अस्पतालों और मोर्चरी के बाहर पहुंच गए थे. हर कोई अपने लोगों की तलाश कर रहा था.
- AIIMS ट्रॉमा सेंटर और मैक्स अस्पताल के बाहर पूरे दिन बेचैनी का माहौल बना रहा. कोई मोबाइल में तस्वीर दिखाकर जानकारी मांग रहा था तो कोई पुलिसकर्मियों से नामों की पुष्टि करने की कोशिश कर रहा था. शालीमार बाग निवासी योगेश अग्रवाल घंटों तक अपने रिश्तेदार अशोक गोयल और कमला की तलाश करते रहे. उन्होंने कहा कि अगर बुरी खबर भी हो तो कम से कम यह पता चल जाए कि अपने लोग कहां हैं. परिवार के कई सदस्य राजस्थान के किशनगढ़ से दिल्ली पहुंचे थे ताकि शवों की पहचान कर सकें.
- इस हादसे में सिर्फ विवेक अग्रवाल का परिवार ही नहीं, बल्कि उनके रिश्तेदार भी आग की चपेट में आ गए. होटल में विवेक के मामा अशोक गोयल, उनकी मौसी कमला और उनके पति भी ठहरे हुए थे. डॉक्टरों ने परिवार को पहले ही बता दिया था कि राधेश्याम अग्रवाल की हालत गंभीर है. इसी वजह से परिवार के कई सदस्य दिल्ली पहुंचे थे. लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि अस्पताल के बाहर एक और दुख उनका इंतजार कर रहा होगा.
आखिरी फोन कॉल ने बढ़ा दी बेचैनी
हादसे की सबसे दर्दनाक बात वह आखिरी फोन कॉल बन गई, जो विवेक अग्रवाल ने आग लगने के दौरान अपने एक रिश्तेदार को की थी. उन्होंने घबराई आवाज में सिर्फ इतना कहा, ‘यहां आग लग गई है.’ इसके बाद फोन कट गया. रिश्तेदारों ने कई बार दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. यही कॉल बाद में पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ा डर बन गई. जब तक लोग होटल पहुंचे, आग सबकुछ निगल चुकी थी.
ICU में जिंदगी की लड़ाई, बाहर परिवार खत्म
सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिस पिता के इलाज के लिए पूरा परिवार दिल्ली आया था, उन्हें अभी तक इस हादसे की जानकारी नहीं थी. राधेश्याम अग्रवाल अब भी ICU में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं. अस्पताल के एक कमरे में वह मशीनों के सहारे सांस ले रहे हैं, जबकि बाहर उनका पूरा परिवार खत्म हो चुका है. रिश्तेदारों का कहना है कि फिलहाल डॉक्टरों ने उन्हें यह खबर नहीं दी है क्योंकि उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है.
दिल्ली में फिर उठे होटल सुरक्षा पर सवाल
इस हादसे के बाद दिल्ली में छोटे होटलों और गेस्ट हाउसों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. शुरुआती जानकारी के अनुसार आग तेजी से फैली, जिससे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि होटल में फायर सेफ्टी के इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कई छोटे होटल रिहायशी इलाकों में चल रहे हैं जहां सुरक्षा नियमों का पालन सही तरीके से नहीं होता.
परिवार दिल्ली क्यों आया था?
परिवार के मुखिया राधेश्याम अग्रवाल की तबीयत काफी खराब थी और वे साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के ICU में भर्ती थे. इसी वजह से उनका बेटा विवेक अग्रवाल और परिवार के अन्य सदस्य दिल्ली आए थे ताकि अस्पताल के पास रहकर उनकी देखभाल कर सकें. परिवार को उम्मीद थी कि राधेश्याम जल्द ठीक होकर घर लौट आएंगे, लेकिन उससे पहले यह दर्दनाक हादसा हो गया.
हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
इस आग हादसे में अग्रवाल परिवार के कुल आठ लोगों की मौत हुई है. इनमें विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी, मां, बेटियां और रिश्तेदार शामिल थे. परिवार के कई सदस्य अलग-अलग शहरों से दिल्ली आए हुए थे और सभी होटल में ठहरे थे. हादसे के बाद रिश्तेदारों ने अस्पतालों और मोर्चरी में जाकर पहचान की प्रक्रिया पूरी की. वैसे कुल 21 लोगों की मौत इस हादसे में हुई है.
इस हादसे के बाद कौन से बड़े सवाल खड़े हुए?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल होटल और गेस्ट हाउसों की फायर सेफ्टी को लेकर उठ रहा है. शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि आग तेजी से फैली और लोगों को बचने का मौका नहीं मिला. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि होटल में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आपात स्थिति में बाहर निकलने के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं.
