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दिल्ली हाई कोर्ट ने Akasa Air के खिलाफ साकेत कमर्शियल कोर्ट द्वारा दिए गए 1.08 करोड़ रुपये के मुआवजे के आदेश पर रोक लगा दी है. मामला 640 हवाई टिकटों की बुकिंग कैंसल होने से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है. अदालत ने कहा कि फैसले में कुछ ऐसे कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया जो अस्तित्व में ही नहीं हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी हे. (एआई न्यूज)
Delhi High Court News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने ऐसा फैसला पलटा कि अकासा एयर की करोड़ों की मौज हो गई. अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए साकेत जिला कॉमर्शियल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. दरअसल, यह मामला अकासा एयर से जुड़ा हुआ है. मामले में अकासा एयरपोर्ट पर 640 टिकट को कैंसल करने का आरोप है. इस मामले में आरोप साबित होने के बाद साकेत जिला कॉमर्शियल कोर्ट ने एयरलाइन को 1.08 करोड़ रुपए का भुगतान र्टेल एजेंसी को करने के लिए कहा था.
न्यूज एजेंसी एनआई के अनुसार, लेकिन इस मामले में पेंच तब फंस गया, जब फैसले को लिखने में एआई के इस्तेमाल का शक हुआ. जिसके बाद, दिल्ली हाईकोर्ट को इस फैसले को तैयार करने में एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर चिंता जाहिए की. जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने 30 अप्रैल को दिए अपने आदेश में इसको लेकर टिप्पणी भी की. टिप्पणी में कहा, ऐसा लगता है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के कुछ हिस्से एआई से तैयार किए गए है. इसी के साथ कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर रोक भी लगा दी.
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में पाया कि फैसले को लिखने के तरीके में ऐसे कानूनी प्रावधानों का जिक्र किया गया, जो असल में मौजूद नहीं हैं. साथ ही, केस कानूनों में अंतर करने के तरीके ने हाईकोर्ट को शक करने में मजबूर कर दिया. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की गलत व्याख्या ट्रायल कोर्ट के फैसले में पाई गई. एनएआई के अनुसार, हाईकोर्ट ने इन सभी बातों को लेकर गंभीर चिंताए व्यक्त की हैं. बेंच ने यह भी कहा कि जुडिशियल प्रेसिडेंट्स के आधार पर ऐसी बाते कहना जो असल में मौजूद ही नहीं है, चिंता का विषय है.
एयरलाइन ने कोर्ट में दिया था यह तर्क
दरअसल, यह मामला दिल्ली की एबीएस टूर एंड ट्रैवल कंपनी द्वारा बुक किए गए 640 हवाई टिकटों को रद्द किए जाने से जुड़ा है. अकासा एयर का इसको लेकर तर्क था कि ट्रैवल एजेंसी ने एयरलाइन के नियमों के अनुसार जरूरी अग्रिम जमा राशि नहीं दी थी. इसी वजह से एयरलाइन ने टिकटों की बुकिंग कैंसल कर दी और जमा किए गए पैसे वापस कर दिए. इसके बाद डिस्ट्रिक कोर्ट ने अकासा एयर को ट्रैवल एजेंसी को 1.08 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया था. अदालत ने यह रकम एजेंसी को होने वाले संभावित नुकसान के आधार पर तय की थी.
मुनाफे की गणना में भी पाई गई गड़बड़ी
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस आदेश पर सवाल खड़े किए हैं. कोर्ट ने कहा कि मुआवजे की गणना करते समय एक बड़ी गलती हुई है. ट्रायल कोर्ट ने टिकटों की पूरी कीमत को ही एजेंसी का मुनाफा मान लिया, जबकि टिकट खरीदने में आने वाली लागत को नहीं घटाया गया. हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी मामले में मुनाफा निकालने का यह तरीका कानूनी रूप से सही नहीं माना जा सकता है. इसी आधार पर हाई कोर्ट ने फिलहाल जिला अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें
