बार-बार जा रही लाइट या नहीं है फ्रिज? गर्मी में दूध को फटने से बचाने का 100 पुराना देसी जुगाड़, मिल्क रहेगा फ्रेश एंड कूल

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How To Store Milk Without Fridge: फ्रिज होने से दूध के फटने या खराब होने की चिंता नहीं होती है. लेकिन जब गर्मी के दिनों में बिजली बार-बार कट रही हो तो समझ नहीं आता कि दूध को कैसे फ्रेश रखें. ऐसे में पुराना देसी जुगाड़ बेहद उपयोगी साबित होता है. यहां आप दूध को लंबे समय तक ताजा रखने का यही नेचुरल तरीका जानेंगे.

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आज के समय में दूध को ताजा रखने के लिए ज्यादातर लोग फ्रिज का इस्तेमाल करते हैं.लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्रिज के आने से बहुत पहले भी भारतीय घरों में दूध को गर्मियों में खराब होने से बचाने का एक बेहद आसान और असरदार तरीका अपनाया जाता था? यह देसी ट्रिक पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी कई जगहों पर उपयोग की जाती है.

गर्मियों में जब तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब दूध बहुत जल्दी खराब हो सकता है. ऐसे में पुराने समय के लोग दूध को खराब होने से बचाने के लिए एक खास नियम का पालन करते थे. घर में दूध आते ही उसे अच्छी तरह उबाला जाता था. इससे दूध में मौजूद कई बैक्टीरिया खत्म हो जाते थे और उसके खराब होने की संभावना भी कम हो जाती थी.

दूध को फटने से कैसे बचाएं?
दूध को फटने से बचाने का असली ट्रिक सिर्फ एक बार दूध उबालने में नहीं थी. पुराने समय में लोग हर 8 से 10 घंटे के गैप में दूध को दोबारा उबाल लेते थे. जरूरत पड़ने पर इसे तीसरी बार भी गर्म किया जाता था. बार-बार उबालने से बैक्टीरिया धीमे-धीमे बढ़ते थे और दूध लंबे समय तक ताजा बना रहता था.

दूध को लंबे समय तक ताजा रखने के टिप्स
दूध को घर लाते ही अच्छी तरह उबालें.
गर्मियों में हर 8-10 घंटे बाद दूध को दोबारा गर्म कर लें.
दूध को हमेशा ढककर रखें ताकि धूल और गर्म हवा का असर न पड़े.
साफ और सूखे बर्तनों का ही इस्तेमाल करें.
पुराने दूध में नया दूध मिलाने से पहले उसे दोबारा उबाल लें.
यदि फ्रिज उपलब्ध न हो तो मिट्टी के बर्तन में दूध रखें

मलाई भी जमती है मोटी
पुराने घरों की बनावट भी दूध को सेफ रखने में मदद करती थी. मोटी दीवारें, पत्थर के फर्श और हवादार कमरे घर के अंदर का तापमान ठंडा रखते थे. कई लोग दूध के बर्तन को पानी से भरी थाली में रख देते थे, जिससे हल्की ठंडक मिलती थी. दिलचस्प बात यह है कि बार-बार उबालने से दूध पर मलाई की मोटी परत जम जाती थी. इसी मलाई को इकट्ठा करके बाद में मक्खन और घी बनाया जाता था.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

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