लिफ्ट की जगह सीढ़ी, बदले कपड़े, फर्जी ID पर होटल… सब कुछ था परफेक्ट, फिर कैसे धरे गए DU प्रोफेसर के हत्यारे?

नई दिल्‍ली. रात का सन्नाटा, चेहरे पर नकाब, हाथों में धारदार उस्तरा और दिमाग में खूनी साजिश. दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक महिला प्रोफेसर को रास्ते से हटाने के लिए अपनों ने ही मौत का ऐसा खौफनाक जाल बुना जिसे देखकर दिल्ली पुलिस की तफ्तीश टीम भी दंग रह गई. 3 जून 2026 की उस मनहूस शाम को जब वारदात को अंजाम देकर कातिल परिवार बेहद शातिराना अंदाज में दिल्ली से करीब 1200 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के बर्दवान भाग गया तो उन्हें लगा कि वे कानून की नजरों से बच निकले हैं. सीसीटीवी कैमरों के आगे चेहरा छिपाना, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल, बार-बार कपड़े बदलना और पुलिस को गुमराह करने के लिए दूसरों के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करना, कातिलों ने बचने की हर मुमकिन कोशिश की थी. लेकिन वे यह भूल गए कि क्राइम कितना भी परफेक्ट क्यों न हो, कानून के हाथ कातिल के गिरेबान तक पहुंच ही जाते हैं. ईस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस की जांबाज टीम ने महज 72 घंटों के भीतर आसमान से लेकर जमीन तक ऐसा चक्रव्यूह रचा कि कलाई काटने वाले उस्तरे और लूटे गए मोबाइल के साथ पूरा परिवार सलाखों के पीछे पहुंच गया.

डिजिटल-फिजिकल मास्क भी नहीं बचा पाए
क्राइम इंवेस्टिगेशन के नजरिए से देखा जाए तो डीयू प्रोफेसर हत्याकांड आधुनिक फॉरेंसिक, डिजिटल सर्विलांस और ट्रेडिशनल पुलिसिंग के बेहतरीन तालमेल का एक सटीक उदाहरण है. आरोपियों ने पुलिस को चकमा देने के लिए डिजिटल मास्क (दूसरों के पहचान पत्रों का इस्तेमाल) और फिजिकल मास्क (कपड़े बदलना, चेहरे छिपाना) दोनों का इस्तेमाल किया था. अक्सर ऐसे मामलों में पुलिस शुरुआती तौर पर गुमराह हो जाती है क्योंकि गेस्ट हाउस के रिकॉर्ड्स में नाम और पते फर्जी थे.

दोबारा छिपने का मौका ही नहीं दिया
लेकिन दिल्ली पुलिस की ईस्ट डिस्ट्रिक्ट टीम ने इस ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए ‘रिवर्स इंवेस्टिगेशन’ तकनीक का सहारा लिया. उन्होंने घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरों की कड़ियों को आपस में जोड़ा, जिससे गेस्ट हाउस का सुराग मिला. इसके बाद, फर्जी आईडी से लिंक सेलुलर नेटवर्क को ट्रैक कर पुलिस ने आरोपियों की यात्रा के रूट (ट्रेन जर्नी) को डिकोड किया. समय की महत्ता को समझते हुए पुलिस ने ट्रेन या सड़क मार्ग के बजाय हवाई मार्ग (Air Route) चुना, जिसने आरोपियों को संभलने या दोबारा छिपने का मौका ही नहीं दिया. मृतका का मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल उस्तरा बरामद होना कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ सबसे बड़ा पुख्ता सबूत साबित होगा.

डीयू प्रोफेसर हत्‍याकांड 5 मुख्य बातें

• संपत्ति का खूनी विवाद: पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी रामप्रसाद दास (42) अपनी पत्नी बनाश्री दास और नाबालिग बेटे के साथ साल 2023 से बर्दवान में प्रोफेसर की पुश्तैनी संपत्ति पर अवैध कब्जा जमाए बैठा था. बार-बार मकान खाली करने की अल्टीमेटम से परेशान होकर उन्होंने प्रोफेसर की हत्या की खौफनाक साजिश रची.

• पहचान छिपाने के लिए फर्जी आईडी: आरोपियों ने दिल्ली के दल्लूपुरा स्थित ‘रेस्टिन गेस्ट हाउस’ में ठहरने के लिए दूसरों के नाम पर जारी पहचान पत्रों की जानकारी का इस्तेमाल किया था. पुलिस ने जब गेस्ट हाउस के रिकॉर्ड खंगाले तो फर्जी पते मिले, जिसने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया.

• डिजिटल फुटप्रिंट और सर्विलांस: शातिर कातिलों ने वारदात के बाद सीसीटीवी से बचने के लिए कपड़े बदले और चेहरे छिपाए. लेकिन पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और उन फर्जी पहचान पत्रों से जुड़े मोबाइल नंबरों को ट्रैक करना शुरू किया, जिससे कातिलों की लाइव लोकेशन पुलिस के रडार पर आ गई.

• पूर्वा एक्सप्रेस का वो सुराग: सीसीटीवी फुटेज और ऑटो-टैक्सी के ट्रेल का पीछा करते हुए ईस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस को पता चला कि आरोपी वारदात के तुरंत बाद आनंद विहार से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे और शाम 5:40 बजे पूर्वा एक्सप्रेस में सवार होकर 4 जून को बर्दवान भाग गए.

• दिल्ली पुलिस का हवाई रेस्क्यू: जैसे ही कातिलों की लोकेशन बर्दवान में पुख्ता हुई, दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम 6 जून को फ्लाइट से सीधे पश्चिम बंगाल पहुंची. स्थानीय रेलवे स्टेशन से लेकर कातिलों के ठिकाने तक का पीछा कर 7 जून को पति, पत्नी और नाबालिग बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया.

सवाल-जवाब
1. दिल्ली यूनिवर्सिटी की महिला प्रोफेसर की हत्या के पीछे मुख्य मकसद क्या था?
हत्या के पीछे मुख्य वजह पुश्तैनी संपत्ति का विवाद था. आरोपी परिवार बर्दवान में प्रोफेसर के मकान में रह रहा था. जब प्रोफेसर ने मकान खाली करने की आखिरी चेतावनी दी, तो आरोपियों ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए हत्या कर दी.

2. आरोपियों ने दिल्ली पुलिस को गुमराह करने के लिए क्या पैंतरे अपनाए थे?
आरोपियों ने दिल्ली के गेस्ट हाउस में रुकने के लिए दूसरों के नाम के फर्जी पहचान पत्रों [पहचान पत्र ओमिटेड] का इस्तेमाल किया. इसके अलावा वारदात के बाद सीसीटीवी से बचने के लिए उन्होंने कपड़े बदले, चेहरे छिपाए और सीढ़ियों का इस्तेमाल किया.
3. पुलिस फर्जी पहचान पत्रों के बावजूद असली आरोपियों तक कैसे पहुंच सकी?
पुलिस ने तकनीकी जांच के दौरान गेस्ट हाउस में दिए गए पहचान पत्रों से जुड़े मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लिया. इन नंबरों की लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के मिलान से पुलिस को आरोपियों के पूर्वा एक्सप्रेस से बर्दवान भागने का सुराग मिला.
4. दिल्ली पुलिस ने बर्दवान में आरोपियों को दबोचने के लिए क्या रणनीति अपनाई?
लोकेशन ट्रेस होने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम वक्त गंवाए बिना 6 जून को हवाई मार्ग (फ्लाइट) से सीधे बर्दवान पहुंची. पुलिस ने बर्दवान रेलवे स्टेशन से लेकर आरोपियों के ठिकाने तक सीसीटीवी ट्रेल का पीछा किया और 7 जून को उन्हें दबोच लिया.
5. इस हत्याकांड में पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या-क्या सामान बरामद किया है?
पुलिस ने आरोपियों के पास से मृतका का सैमसंग मोबाइल फोन, वारदात में कलाई काटने के लिए इस्तेमाल किया गया धारदार उस्तरा, एक पिट्ठू बैग, घटना के वक्त पहने गए कपड़े, कैप और आने-जाने के ट्रेन टिकट बरामद किए हैं.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *