दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र यानी O ज़ोन को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. राजधानी की करीब 94 कॉलोनियों और कई पुराने गांवों में रहने वाले लाखों लोगों के बीच इन दिनों भय और अनिश्चितता का माहौल है. लोगों को आशंका है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) इन इलाकों में कार्रवाई कर सकता है, जिससे करीब 15 लाख परिवार प्रभावित हो सकते हैं. दरअसल, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर, सोनिया विहार और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों में O ज़ोन के बोर्ड लगाए गए हैं. इसके बाद स्थानीय निवासियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि उनके घरों को अवैध निर्माण मानते हुए बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है. कई परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इन इलाकों में रह रहे हैं और अब अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं.
यह मुद्दा अब केवल कानूनी या प्रशासनिक नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है. DDA के खिलाफ स्थानीय लोगों के साथ-साथ दिल्ली की बीजेपी सरकार और पार्टी के सांसद भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं. दक्षिण दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने DDA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिन कॉलोनियों को वर्ष 2008 में नियमित (रेगुलराइज) किया गया था, उन्हीं पर अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. उनका आरोप है कि कई ऐसे इलाके, जिन्हें पहले नियमित किया जा चुका है, उन्हें दोबारा O ज़ोन के दायरे में दिखाया जा रहा है.
रामवीर सिंह बिधूड़ी का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों तक अपनी बात पहुंचाई है. उनके अनुसार उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी कॉलोनी में बुलडोजर कार्रवाई होती है तो वह सबसे पहले उसका विरोध करेंगे. उनका दावा है कि लाखों लोगों को बेघर करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा.
विवाद को और बढ़ाने वाली बात यह है कि एक ओर DDA इन क्षेत्रों को O ज़ोन के तहत चिन्हित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली सरकार इन्हीं इलाकों में विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है. हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोनिया विहार क्षेत्र में करीब 138 करोड़ रुपये की लागत से 44 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन परियोजना का शिलान्यास किया. इसके बाद स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि यदि क्षेत्र विकास योजनाओं का हिस्सा है, तो फिर यहां रहने वाले लोगों को बेदखली का डर क्यों सता रहा है.
O ज़ोन दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के तहत यमुना के फ्लडप्लेन क्षेत्र को कहा जाता है. यह वजीराबाद से ओखला तक फैला लगभग 9,700 हेक्टेयर क्षेत्र है. पर्यावरणीय दृष्टि से यह इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है और यहां निर्माण गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध हैं. यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी नए निर्माण या नियमितीकरण को लेकर हमेशा विवाद बना रहता है.
इस पूरे विवाद का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है. यमुना के किनारे बसे कई इलाके पहले भी बाढ़ की मार झेल चुके हैं. सोनिया विहार, गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर, जैतपुर और मीठापुर जैसे क्षेत्रों में अतीत में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है. पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लडप्लेन क्षेत्र में अनियोजित निर्माण भविष्य में बड़े खतरे को जन्म दे सकता है और दिल्ली की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.
फिलहाल स्थिति यह है कि कानूनी लड़ाई अब अदालतों से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुकी है. गांवों और कॉलोनियों के लोग संगठित होकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं. ऐसे में O ज़ोन का विवाद अब सिर्फ जमीन और मकानों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, शहरी नियोजन और लाखों लोगों के भविष्य से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है.
