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डॉ. रंजन तोमर ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार काले हिरणों की मौत और शिकार की सबसे अधिक घटनाएं आंध्र प्रदेश में दर्ज की गई हैं. हालांकि शिकार के मामलों में कार्रवाई के स्तर पर मध्य प्रदेश सबसे आगे दिखाई दिया, जहां इस अवधि के दौरान सबसे अधिक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश में 7, कर्नाटक में 6, महाराष्ट्र में 4, झारखंड में 4 तथा बिहार में 1 आरोपी की गिरफ्तारी दर्ज की गई.
नोएडा: भारत में संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे तमाम दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. मूल रूप से नोएडा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. रंजन तोमर द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 से अप्रैल 2026 तक देशभर में काले हिरण (ब्लैकबक) के शिकार अथवा अवैध शिकार से जुड़ी कुल 114 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें इन दुर्लभ वन्यजीवों की मौत हुई.
यह जानकारी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), भारत सरकार के मुख्यालय, नई दिल्ली द्वारा उपलब्ध कराई गई है. ब्यूरो ने स्पष्ट किया कि यह आंकड़े विभिन्न राज्यों के वन विभागों और पुलिस विभागों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संकलित किए गए हैं. काला हिरण संरक्षित प्रजातियों में शामिल है और उसका शिकार गंभीर अपराध माना जाता है.
आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक घटनाएं
डॉ. रंजन तोमर ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार काले हिरणों की मौत और शिकार की सबसे अधिक घटनाएं आंध्र प्रदेश में दर्ज की गई हैं. हालांकि शिकार के मामलों में कार्रवाई के स्तर पर मध्य प्रदेश सबसे आगे दिखाई दिया, जहां इस अवधि के दौरान सबसे अधिक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश में 7, कर्नाटक में 6, महाराष्ट्र में 4, झारखंड में 4 तथा बिहार में 1 आरोपी की गिरफ्तारी दर्ज की गई. आंकड़े यह बताते हैं कि कई राज्यों में शिकार की घटनाएं सामने आने के बावजूद आरोपियों तक पहुंचने और उन्हें गिरफ्तार करने की प्रक्रिया अभी भी चुनौती बनी हुई है. इनका मानना है कि वन्यजीव अपराधों की जांच और निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है.
जैव विविधता का अहम हिस्सा है काला हिरण
डॉ. रंजन तोमर ने कहा कि काला हिरण केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि देश की जैव विविधता और प्राकृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके बावजूद लगातार सामने आ रही शिकार की घटनाएं चिंता पैदा करती हैं. उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों के बावजूद यदि छह वर्षों में 114 काले हिरणों की मौत शिकार या उससे जुड़ी घटनाओं हुई है, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है. उनके अनुसार इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, तकनीकी निगरानी और प्रभावी खुफिया तंत्र विकसित करने की जरूरत है.
जनजागरुकता की है जरूरत
डॉ. तोमर ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर नागरिक की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने काले हिरण समेत अन्य संरक्षित प्रजातियों के शिकार से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा, त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. उनका कहना है कि जब तक जन-जागरूकता नहीं बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा. आरटीआई से सामने आए ये आंकड़े एक बार फिर यह सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर देश की संरक्षित वन्यजीव संपदा को बचाने के लिए और कितने मजबूत कदम उठाने की जरूरत है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
