माता-पिता की इन गलतियों से बढ़ रही बच्चों से दूरी, एक्सपर्ट ने बताया रिश्ते मजबूत करने का मंत्र

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माता-पिता की इन गलतियों से बढ़ रही बच्चों से दूरी, एक्सपर्ट ने बताया उपाय

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बच्चों के लिए माता-पिता का केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी मौजूद रहना बहुत महत्वपूर्ण है. हर बात पर रोक-टोक लगाने या लगातार विरोध करने की बजाय बच्चों को समझने और उनका समर्थन करने की कोशिश करनी चाहिए.

नई दिल्ली: बदलते समय के साथ माता-पिता और बच्चों के रिश्तों को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं. अक्सर लोग जानना चाहते हैं कि परिवार में बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए, खासकर तब जब हर पीढ़ी की सोच, जीवनशैली और प्राथमिकताएं अलग-अलग हों. आज के दौर में बच्चों और बड़ों के बीच बढ़ता जनरेशन गैप एक बड़ी चुनौती बन गया है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है खुलकर और ईमानदारी से बातचीत करना.

परिवार के साथ रोज थोड़ा समय बिताना जरूरी
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट लवलीन मल्होत्रा के अनुसार, आज की व्यस्त जीवनशैली में परिवार के लिए समय निकालना बेहद जरूरी हो गया है. उनका कहना है कि दिन में केवल 20 से 25 मिनट का फैमिली टाइम भी रिश्तों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है. उन्होंने सलाह दी कि शाम के समय परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठें, दिनभर के अनुभव साझा करें और एक-दूसरे की बातें ध्यान से सुनें. इससे परिवार के सदस्यों के बीच संवाद बढ़ता है और आपसी समझ बेहतर होती है. लवलीन मल्होत्रा का कहना है कि यदि बच्चों को पढ़ाई, नौकरी या निजी जीवन से जुड़ी किसी तरह की परेशानी हो, तो उन्हें अपने माता-पिता या परिवार के बड़े सदस्यों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए. इससे उन्हें सही मार्गदर्शन के साथ भावनात्मक सहयोग भी मिलता है.

सलाह दें, लेकिन फैसले की आजादी भी रखें
विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता का बच्चों को सलाह देना जरूरी है, लेकिन अपनी सोच या फैसले उन पर थोपना उचित नहीं है. बच्चों को अपनी जिंदगी से जुड़े निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. यदि बच्चे कोई गलती करते हैं, तो उन्हें उससे सीखने का अवसर भी देना चाहिए. लवलीन मल्होत्रा के अनुसार, गलतियां हर पीढ़ी करती है. पहले के समय में परिस्थितियां अलग थीं और लोग कई बार डर या सामाजिक दबाव के कारण अधिक सतर्क रहते थे, लेकिन आज का दौर बदल चुका है. ऐसे में बच्चों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि उनके माता-पिता हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उनका सहयोग करेंगे.

भावनात्मक रूप से मौजूद रहना जरूरी
लवलीन मल्होत्रा का कहना है कि बच्चों के लिए माता-पिता का केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी मौजूद रहना बहुत महत्वपूर्ण है. हर बात पर रोक-टोक लगाने या लगातार विरोध करने की बजाय बच्चों को समझने और उनका समर्थन करने की कोशिश करनी चाहिए.उनका मानना है कि माता-पिता को ऐसा सकारात्मक माहौल तैयार करना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात खुलकर कह सकें. इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और परिवार के प्रति उनका भरोसा भी मजबूत होता है.

प्यार, सम्मान और समझ से मजबूत होंगे रिश्ते
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि परिवार में संवाद बढ़ाया जाए, एक-दूसरे को समझने की कोशिश की जाए और सभी के विचारों एवं फैसलों का सम्मान किया जाए, तो माता-पिता और बच्चों के बीच की दूरी आसानी से कम की जा सकती है. उनका कहना है कि रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती. थोड़ा समय, धैर्य, आपसी सम्मान और खुली बातचीत ही परिवार को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और खुशहाल बना सकती है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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