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Hula-hoop World Record Holder Sanaya Biyani: जयपुर की 8 वर्षीय सनाया बियानी ने हुला-हूप खेल में नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर राजस्थान का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है. उन्होंने 30 सेकेंड में 101 हुला-हूप आर्म रोटेशन पूरे कर यह उपलब्धि हासिल की. महज 6 साल की उम्र में हुला-हूप सीखना शुरू करने वाली सनाया आज गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति देने वाली कलाकार और बच्चों की प्रेरणा बन चुकी हैं. वह दुबई, अबू धाबी, इंग्लैंड और भारत के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रदर्शन कर चुकी हैं. अपनी प्रतिभा, अनुशासन और लगातार अभ्यास के दम पर सनाया ने कम उम्र में बड़ी पहचान बनाई है.
जयपुर की 8 वर्षीय सनाया बियानी ने हुला-हूप खेल में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया है. सनाया ने महज 30 सेकेंड में 101 रोटेशन पूरे कर यह उपलब्धि हासिल की. इससे पहले यह रिकॉर्ड यूके के एक प्रतिभागी के नाम दर्ज था. अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर सनाया ने न केवल जयपुर बल्कि पूरे राजस्थान का नाम रोशन किया है. कम उम्र में इस बड़ी उपलब्धि के कारण वह राजस्थान की सबसे प्रतिभाशाली और कम उम्र की हुला-हूप खिलाड़ियों में गिनी जा रही हैं. उनकी इस सफलता से खेल जगत में खुशी का माहौल है.
जयपुर के गोपालपुरा इलाके में रहने वाली सनाया बियानी अपनी उम्र से कहीं बड़े सपने और हुनर रखती हैं. यही वजह है कि महज 8 साल की उम्र में उन्होंने हुला-हूप खेल में खास पहचान बनाई है. जहां ज्यादातर बच्चे इस उम्र में सामान्य खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, वहीं इस नन्ही प्रतिभा ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर कई स्टेज शो, वर्कशॉप और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया है. सनाया बियानी जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की छात्रा हैं, जो अपने शानदार कौशल और आकर्षक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. कम उम्र में मिली उनकी उपलब्धियां उन्हें हुला-हूप खेल की उभरती हुई प्रतिभाओं में शामिल करती हैं.
सनाया बियानी ने हुला-हूप खेल की शुरुआत 6 वर्ष की उम्र में की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने पियानो, स्केटिंग, डांस, बास्केटबॉल और जादू जैसी कई गतिविधियां सीखीं, लेकिन इनमें उनका मन नहीं लगा. एक दिन उनकी मां ने उन्हें खेलने के लिए बाजार से एक हुला-हूप लाकर दिया. हुला-हूप के साथ खेलते-खेलते सनाया को यह खेल इतना पसंद आया कि उन्होंने अपनी मां से पूछा कि क्या इसे सीखने के लिए कोई क्लास या अकादमी भी होती है. इसके बाद उनका दाखिला एक हुला-हूप अकादमी में कराया गया. वहां नियमित प्रशिक्षण और लगातार अभ्यास के दम पर उन्होंने बेहद कम समय में शानदार प्रगति की. महज दो साल के भीतर ही सनाया ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर अपनी अलग पहचान स्थापित कर ली. आज वह हुला-हूप की सिंगल, डबल, ट्रिपल और सिक्स-हूप्स स्प्लिट जैसी कठिन तकनीकों में भी महारत हासिल कर चुकी हैं.
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महज 8 साल की उम्र में सनाया बियानी हुला-हूप खेल में अब तक 65 से अधिक स्टेज शो कर चुकी हैं. इनमें आईआईटी जोधपुर, मुंबई, दुबई के ग्लोबल विलेज और अबू धाबी के प्रसिद्ध मंदिर सहित कई प्रतिष्ठित मंचों पर उनकी प्रस्तुतियां शामिल हैं. स्टेज शो के अलावा सनाया बच्चों के लिए 10 से अधिक वर्कशॉप भी आयोजित कर चुकी हैं. सनाया बियानी को मूव मास्टर्स और रीफा जैसे आयोजनों में बेस्ट हूपर और बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है. अपने खेल के साथ-साथ वह युवाओं को प्रेरित करने और समाज सेवा में भी सक्रिय भागीदारी निभाती हैं. सनाया अपनी प्रस्तुतियों और वर्कशॉप से प्राप्त होने वाली राशि का एक हिस्सा जयपुर फुट अस्पताल को दान करती हैं. वह अब तक लगभग 65 हजार रुपये से अधिक की राशि अस्पताल को दान कर चुकी हैं. इसके साथ ही वह 800 से अधिक बच्चों को हुला-हूप खेल का प्रशिक्षण भी दे चुकी हैं.
सनाया हुला-हूप खेल में इतनी माहिर हैं कि कम उम्र में ही उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है. इस रिकॉर्ड के तहत उन्होंने 30 सेकेंड में 101 हुला-हूप आर्म रोटेशन पूरे कर नया कीर्तिमान स्थापित किया. यह उपलब्धि हासिल करने के लिए सनाया ने लगातार तीन महीने तक रोजाना अभ्यास किया. बिना एक भी दिन का अंतराल लिए वह प्रतिदिन 15 मिनट तक लगातार हुला-हूप की प्रैक्टिस करती रहीं.हालांकि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से हार नहीं मानी और आखिरकार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बनाने में सफल रहीं. आज सनाया न केवल एक प्रोफेशनल हुला-हूप खिलाड़ी हैं, बल्कि सिक्स-हूप स्प्लिट जैसी कठिन और चुनौतीपूर्ण ट्रिक्स भी बेहद आसानी से कर लेती हैं.
सनाया बियानी हुला-हूप खेल की प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन उनका जुड़ाव राजस्थानी संस्कृति से भी गहरा है. यही कारण है कि वह कई मंचों पर पारंपरिक राजस्थानी परिधान पहनकर घूमर नृत्य के साथ-साथ हुला-हूप की शानदार प्रस्तुति देती हैं. कम उम्र में ही उन्होंने आधुनिक खेल और लोक संस्कृति का अनूठा संगम पेश कर अपनी अलग पहचान बनाई है.हाल ही में जयपुरी तीज और गणगौर महोत्सव जैसे प्रमुख आयोजनों में सनाया ने राजस्थानी वेशभूषा में हजारों लोगों के सामने नृत्य और हुला-हूप का आकर्षक प्रदर्शन किया था, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा. उनकी प्रस्तुतियां सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं और लोग उन्हें प्यार से “जयपुर हूपर” के नाम से जानते हैं.
सनाया बियानी ने जयपुर और राजस्थान ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई प्रतिष्ठित मंचों पर भी हुला-हूप खेल की शानदार प्रस्तुतियां दी हैं. वह दुबई में बुर्ज खलीफा के आसपास आयोजित कार्यक्रमों से लेकर इंग्लैंड तक बड़े स्टेज शो में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं. वर्ल्ड रिकॉर्ड और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के अलावा सनाया अंडर-16 कैटेगरी में भी कई रिकॉर्ड बना चुकी हैं. इसके साथ ही वह अपनी आयु वर्ग से ऊपर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर विजेता रह चुकी हैं. सनाया प्रसिद्ध हुला-हूप कलाकारों और भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली से प्रेरणा लेती हैं. उनका कहना है कि विराट कोहली की कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं. वर्तमान में सनाया विश्व स्तर पर पहचान बना चुकी हुला-हूप कलाकार हैं. उनका सपना भविष्य में हुला-हूप और जिम्नास्टिक के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल करना है. इसके अलावा वह पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और मैथ्स ओलंपियाड में राष्ट्रीय स्तर पर कई गोल्ड मेडल और पुरस्कार जीत चुकी हैं.
सनाया बियानी ने अपने खेल के प्रति जुनून, अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर महज 8 साल की उम्र में ऐसी पहचान बनाई है, जो हर किसी के लिए हासिल करना आसान नहीं होता. हुला-हूप खेल में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद वह एक युवा स्पोर्ट्स सेलिब्रिटी के रूप में उभरी हैं. आज जिस भी मंच पर सनाया प्रस्तुति देने पहुंचती हैं, वहां उन्हें देखने और उनका प्रदर्शन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं. सोशल मीडिया पर भी उनकी जबरदस्त लोकप्रियता है. इंस्टाग्राम पर उन्हें 6 लाख से अधिक लोग फॉलो करते हैं, जो उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों का प्रमाण है.
