Usha Rani Loan Fraud Case: पूर्वी दिल्ली से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां के विवेक विहार में रहने वाली 55 वर्षीय ऊषा रानी ने आमदनी के लिए अपने दो फ्लैट किराए पर उठा दिए लेकिन उन्हीं किराएदारों ने ऊषा रानी के नाम पर 18 करोड़ रुपये का भारी-भरकम लोन ले डाला और फरार हो गए. इसकी जानकारी उन्हें तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट के दो वकील उनके दरवाजे पर पहुंचे.
दिल्ली में किराएदारों के द्वारा मकान मालिक ऊषा रानी को धोखा देने के इस मामले ने लोगों के कान खड़े कर दिए हैं. साथ ही किराए पर मकान उठाने को लेकर लोगों के मन में सैकड़ों सवाल पैदा कर दिए हैं.
बता दें कि बात जून 2012 की है. जब विवेक विहार में रहने वाली 55 वर्षीय ऊषा रानी सेठी ने ब्लॉक-डी में अपने 4 फ्लैटों में से दो फ्लैट किराए पर उठा दिए. उनके पास घर ढूंढते आए सचिन ने खुद को जगदम्बा मेटल्स का मालि बताया और 47000 रुपये महीने में दूसरी फ्लोर का फ्लैट लिया. वहीं उसके साथ आए संजय ने तीसरे फ्लोर पर 17 हजार रुपये महीने में छोटा फ्लैट किराए पर ले लिया.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक कुछ दिन तक फ्लैटों में सही रहने के बाद दोनों किराएदार घर छोड़कर चले गए. वहीं ऊषा रानी भी इन्हें भूल गईं.दिन बीतते गए और एक दिन साल 2013 में अचानक सुप्रीम कोर्ट के दो वकील ऊषा रानी के घर पहुंचे और उन पर 70 लाख रुपये का पंजाब एंड सिंध बैंक से लोन लेने और न चुकाने का मामला दर्ज है.साथ ही पूछा कि उन्होंने लोन क्यों नहीं चुकाया है?
यह मामला सामने आते ही ऊषा रानी पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शिकायत दर्ज कराई. जैसे ही पुलिस ने जांच की तो ऊषा रानी के पैरों के तले जमीन खिसक गई. उन्हें पता चला कि उनके नाम पर सिर्फ 70 लाख रुपये नहीं बल्कि 18 करोड़ रुपये का लोन है जो उनके दस्तावेज लगाकर लिया गया है.
यह लोन का पैसा 11 अलग-अलग शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया था. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने संपत्ति की बिक्री से जुड़े दस्तावेज और मालिकाना कागजात ट्रांसफर कर बैंक में जमा कर दिए. बाद में पता चला कि दस्तावेजों में ऊषा के पति पंचानंद के नाम और PAN कार्ड की कॉपी का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन हस्ताक्षर असली नहीं थे.
जांच अधिकारियों ने पाया कि असली ऊषा रानी की जगह एक महिला ने खुद को ऊषा बताकर फरवरी में सब-रजिस्ट्रार ऑफिस का दौरा किया था. उसने दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को चकमा देकर संपत्ति के कागज अपने नाम करवाने की कोशिश की थी.
जांच के दौरान जब पुलिस ने बिक्री दस्तावेजों को परखा तो एक नया नाम सामने आया. संपत्ति पहले सचिन के नाम ट्रांसफर की गई थी, लेकिन कुल 18 करोड़ रुपये का लोन उसके और उसके साले संजीव ने लिया था.
आगे जांच में पता चला कि मामले की शिकायत के बाद CBI और ACB भी जांच में शामिल हुईं. 2017 में पुलिस ने आरोपी उपेंद्र दीक्षित को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबे समय तक फरार चल रहा था. यह वही व्यक्ति था जिसे जनवरी 2011 में CBI ने धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत भी केस दर्ज था.
कैसे हुआ ये घोटाला
पुलिस के मुताबिक सचिन और संजय ने जानबूझकर इस फ्रॉड को अंजाम दिया और वे प्लान के तहत ही घर ढूंढ़ने के लिए आए थे. सचिन का मुख्य मकसद घर में रहना नहीं बल्कि किसी भी तरह ऊषा रानी से रेंट एग्रीमेंट लेना था, ताकि वह ऊषा रानी की प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी हासिल कर सके और किराया चुकाने के लिए पैन कार्ड हासिल कर सके. जिसके सहारे वह फ्रॉड को अंजाम दे सकें.
कहीं आप तो नहीं करते ऐसी गलती?
अगर आप भी किराएदार रख रहे हैं तो उसका पुलिस वेरिफिकेशन कराएं, उसके डॉक्यूमेंट्स लें और अपने डॉक्यूमेंट्स शेयर करते वक्त सतर्क रहें वरना ऊषा रानी की तरह आपको भी भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.
