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दिल्ली मेडिकल प्रॉक्योरमेंट घोटाले में एक ठेकेदार की संगीन भूमिका सामने आ रही है जिसने रेखा गुप्ता सरकार को 700 करोड़ का चूना लगाया है. इस बिचौलिए पर टेंडरों में हेराफेरी का आरोप है. इसने फर्जी कंपनियों से टेंडर में धांधली की और कई कंपनियों को फायदा पहुंचाया. इस मामले में डीजीएचएस की पूर्व प्रमुख डॉक्टर वत्सला अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया गया है.
दिल्ली मेडिकल प्रोक्योरमेंट घोटाले में ठेकेदार ने रेखा सरकार को 700 करोड़ का चूना लगा दिया है.
Delhi Medical procurement Fraud: दिल्ली में हुए मेडिकल प्रॉक्योरमेंट घोटाले ने रेखा गुप्ता सरकार की नींद उड़ा दी है. घोटाले की जांच में एक ऐसे ठेकेदार की भूमिका सामने आई है जिसने दिल्ली सरकार को करीब 700 करोड़ रुपये का चूना लगाया है. जांच एजेंसियों का कहना है कि दिल्ली स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय से जुड़े इस घोटाले में इस ठेकेदार ने न केवल टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की बल्कि सरकारी पैसे का बंदरबांट करने में भी अहम किरदार निभाया.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक जांच में सामने आया है कि इस ठेकेदार का दखल दवाइयों, सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरणों की खरीद के टेंडरों के दौरान काफी ज्यादा था. यहां तक कि इसने कई फर्जी कंपनियां बनाईं और कुछ कंपनियों को अपने हिसाब से टेंडर दिलवाने में मदद की. इसके लिए इस बिचौलिए के मोटी दलाली लेने की जांच की जा रही है.
इस ठेकेदार का नाम एफआईआर में दर्ज है. उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है. इसने कंपनियों के साथ मिलकर सप्लाई रेट तय किए, कमीशन की डील कराई और नकद रिश्वत का भी इंतजाम किया.
बता दें कि यह मामला कोरोना के दौर से जुड़ा है. जब दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के लिए खरीद में गड़बड़ी को लेकर विजिलेंस विभाग ने शिकायत दर्ज कराई थी. बाद में इसे 2 जून को एफआईआर में बदल दिया गया. यह मामला पहली बार मई में सामने आया, जब विजिलेंस विभाग ने खरीद में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद CPA कार्यालयों पर छापे मारे. हालांकि इसकी शिकायत 2023 में ही एक व्हिसिलब्लोअर ने कर दी थी.
इस बिचौलिए की पहुंच इतनी ऊपर तक थी कि इसने टेंडर की शर्तें बदलने के साथ ही CPA के हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा के जरिए टेंडर कमेटी के सामने रखा. यह भी आरोप है कि टेंडर कमेटी पर इन शर्तों को मंजूर करने का दबाव डाला गया.
शैल कंपनियों के साथ मिलीभगत के बाद बाद बिचौलिये ने यह सुनिश्चित किया कि उसकी फर्जी कंपनियां ही बोली लगाएं. टर्नओवर, अनुभव और प्रदर्शन जैसे नियम इतने सख्त रखे गए कि असली कंपनियां बाहर हो जाएं, लेकिन शेल कंपनियां आसानी से योग्य घोषित हो जाएं.इसके बाद बोलियां उसी दिन चुपचाप खोल भी ली गईं. इसके साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया.
अभी तक इस मामले में डीजीएचएस की पूर्व प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल के साथ ही विवेक शुक्ला (पूर्व अतिरिक्त रजिस्ट्रार) और अनिल कुमार (डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स) को भी गिरफ्तार किया गया है. डॉ. वत्सला ने इस डील के लिए कथित तौर पर अंतिम मंजूरी दी थी.
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरीके से सैकड़ों करोड़ रुपये के टेंडर दिए गए हो सकते हैं. अब ACB टेंडर फाइलों, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों की संरचना की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घोटाले से कितना नुकसान हुआ और पैसा कहां गया.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें
