जब-जब पर्दे पर विलेन बने गोविंदा, तब-तब थिएटर्स में पसरा सन्नाटा; कॉमेडी किंग का भी हो गया था बुरा हाल

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Govinda as Villain Movies: बॉलीवुड के इतिहास में जब भी किसी मजबूत और जमे-जमाए हीरो ने अपनी इमेज बदलकर विलेन का रोल किया है, तो या तो उसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा है या मेकर्स को करोड़ों का भारी नुकसान हुआ है. शाहरुख खान (‘डर’, ‘बाजीगर’) और ऋतिक रोशन (‘धूम 2’) जैसे स्टार्स के लिए विलेन का रोल करना एक मील का पत्थर साबित हुआ. लेकिन, जब हिंदी सिनेमा के ‘कॉमेडी किंग’ गोविंदा ने पर्दे पर एक खूंखार और नेगेटिव किरदार निभाने का हिम्मत वाला फैसला किया, तो थिएटर्स में इतना सन्नाटा छा गया कि खुद गोविंदा भी हैरान रह गए.

नई दिल्ली. 90 के दशक में गोविंदा का मतलब था जबरदस्त एंटरटेनमेंट, बेमिसाल डांस मूव्स, कल्ट कॉमिक टाइमिंग और दर्शकों की जोरदार तालियां. कुली नंबर 1, हीरो नंबर 1 और साजन चले ससुराल जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से गोविंदा ने अपनी इतनी मजबूत इमेज बना ली थी कि दर्शक बस उन्हें हंसते और नाचते देखना चाहते थे. लेकिन, जब एक कलाकार के तौर पर कुछ नया करने की कोशिश में गोविंदा ने इस मजबूत इमेज को तोड़ा और विलेन का रोल करने का रिस्क लिया, तो नतीजे चौंकाने वाले और निराशाजनक थे. इतिहास गवाह है कि जब भी गोविंदा एक बेरहम और धोखेबाज विलेन के तौर पर पर्दे पर आए, डिस्ट्रीब्यूटर्स को भारी नुकसान हुआ और थिएटर्स में सन्नाटा छा गया.

‘शिकारी’ (2000): 2000 में जब गोविंदा अपने करियर के मुश्किल मोड़ पर थे, तो उन्होंने मशहूर डायरेक्टर एन चंद्रा की सस्पेंस वाली साइको-थ्रिलर ‘शिकारी’ साइन की. इस फिल्म में गोविंदा ने करिश्मा कपूर और तब्बू जैसी दमदार एक्ट्रेस के साथ काम किया था. गोविंदा का किरदार ‘ओम श्रीवास्तव’ एक साइकोटिक विलेन था जो अपने फायदे के लिए किसी का भी मर्डर कर सकता था.

गोविंदा ने फिल्म में दमदार और जबरदस्त परफॉर्मेंस दी, लेकिन थिएटर में बैठे दर्शक चीखने-चिल्लाने, मर्डर करने वाले और डरावने चेहरे वाले विलेन ‘गोविंदा’ को स्वीकार नहीं कर पाए. जो दर्शक आमतौर पर गोविंदा की फिल्में देखने थिएटर आते थे, वे उनके डरावने रूप को देखकर हैरान रह गए. लगभग 9 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म कड़े कॉम्पिटिशन के बीच बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 7.5 करोड़ नेट कमा पाई. ट्रेड एनालिस्ट ने इसे फ्लॉप घोषित कर दिया, जिससे गोविंदा के करियर को बड़ा झटका लगा.

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‘किल दिल’ (2014): ‘शिकारी’ के करीब 14 साल बाद, गोविंदा ने एक बार फिर ‘किल दिल’ में पूरी तरह विलेन का रोल करने का फैसला किया, जिसे शाद अली ने डायरेक्ट किया था और यशराज फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया था. इस फिल्म में उन्होंने ‘भैयाजी’ नाम के एक खतरनाक लोकल गैंगस्टर का रोल किया, जो अनाथ बच्चों (रणवीर सिंह और अली जफर) को पालता है और उन्हें खतरनाक शार्पशूटर बनाता है.

हालांकि ‘नखरे’ गाने और गोविंदा के दमदार डांस मूव्स को काफी पसंद किया गया, लेकिन फिल्म की कमजोर स्क्रिप्ट और खराब डायरेक्शन ने गोविंदा के खतरनाक कैरेक्टर को कमजोर कर दिया. फिल्म न तो पूरी तरह कॉमेडी थी और न ही कोई सॉलिड थ्रिलर.

यशराज फिल्म्स ने फिल्म को प्रमोट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इसका कुल बजट लगभग 40 करोड़ होने का अनुमान था. लेकिन, फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 31-32 करोड़ कमाए. थिएटर बंद हो गए और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई.

ट्रेड पंडितों का मानना ​​है कि गोविंदा की कॉमिक इमेज इतनी मजबूत और पावरफुल थी कि दर्शकों के सबकॉन्शियस में उनकी एक ‘पॉजिटिव’ इमेज बैठ गई थी. जब वह विलेन के तौर पर बंदूक लहराते थे, तो दर्शक उम्मीद करते थे कि कोई मजेदार मजाक या कॉमेडी सीन आएगा.

गोविंदा की दो फिल्मों (‘शिकारी’ और ‘किल दिल’) को उस तरह के मजबूत और जबरदस्त विलेन रोल नहीं मिले, जैसे शाहरुख खान को ‘डर’ में या संजय दत्त को ‘अग्निपथ’ में मिले थे. उनके विलेन वाले रोल बहुत ज्यादा लाउड और एकतरफा दिखाए गए. गोविंदा के डाई-हार्ड फैन उनके ट्रांसफॉर्मेशन से पूरी तरह निराश थे, जिसका नतीजा यह हुआ कि फिल्म की माउथ पब्लिसिटी खराब रही और रिलीज के पहले वीकेंड के बाद थिएटर खाली हो गए.

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