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दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित शामनाथ मार्ग का चर्चित 33 नंबर सरकारी बंगला, जिसे वर्षों से ‘मनहूस’ माना जाता रहा है, अब नई पहचान पाने जा रहा है. दिल्ली सरकार यहां अल्ट्रा मॉर्डन यूनिफाइड कमांड सेंटर बनाने की तैयारी कर रही है. आपदा, बाढ़, आग, भूकंप और अन्य आपात स्थितियों में यही केंद्र राजधानी का मुख्य कंट्रोल रूम होगा. इस बंगले से जुड़ा राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है, क्योंकि यहां रहने वाले कई नेताओं और अधिकारियों के साथ अनहोनी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.
दिल्ली के शामनाथ मार्ग स्थित 33 नंबर सरकारी बंगला, जिसे अब यूनिफाइड कमांड सेंटर के तौर पर तैयार किया जाएगा.
33 Shamnath Marg: दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके के शामनाथ मार्ग का 33 नंबर का सरकारी बंगला एक बार फिर चर्चा में है. सालों से खाली पड़ा यह बंगला राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के बीच ‘मनहूस’ माना जाता रहा है. अब इसी बंगले को दिल्ली सरकार शहर के यूनीफाइड कमांड सेंटर में बदलने की तैयारी कर रही है. यानी जिस इमारत में रहने से लोग बचते थे, वहीं से अब आपदा के समय पूरे दिल्ली शहर की निगरानी रखी जाएगी.
पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एक कंसल्टेंसी कंपनी की तलाश शुरू कर दी है. चुनी गई कंपनी को दो महीने के भीतर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करनी होगी. इस रिपोर्ट में कंस्ट्रक्शन कॉस्ट, मेंटेनेंस प्लान, टेक्निकल अरेंजमेंट और जरूरी मैनपावर का पूरा ब्लूप्रिंट शामिल होगा. इस शुरुआती प्लानिंग पर करीब 17 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे.
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस साल के बजट में इस कमांड सेंटर की घोषणा की थी. इसका मकसद बाढ़, आग, भूकंप सहित अन्य परिस्थितियों में सभी डिपार्टमेंट्स के बीच कोऑर्डिनेशन बनाना है.
- यह सेंटर दिल्ली के सेंट्रल कंट्रोल रूम के तौर पर काम करेगा, जहां से अलग-अलग एजेंसियों की एक्टिविटीज पर एक साथ नजर रखी जाएगी.
- इस बंगले की पहचान सिर्फ इसकी भव्यता नहीं, बल्कि इससे जुड़ी रहस्यमयी घटनाओं को लेकर रही है. माना जाता है कि यहां रहने वाले कई लोगों के साथ अनहोनी हो चुकी है.
- इस बंगले में सबसे पहले दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश रहे थे. लेकिन 1955 में कथित स्कैम के बाद उन्हें अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा देना पड़ा.
- इसके बाद 1993 में मुख्यमंत्री बने मदन लाल खुराना को भी यही बंगला अलॉट हुआ, लेकिन उन्होंने यहां रहने के बजाय इसे ऑफिस बनाया और 1996 में उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा.
- साल 2013 में तत्कालीन प्रिंसिपल सेक्रेटरी (एनर्जी) शक्ति सिन्हा को यह बंगला मिला, लेकिन उन्होंने महज चार महीने में इसे खाली कर दिया.
- वहीं, दिल्ली सरकार के पूर्व इंडस्ट्री मिनिस्टर दीप चंद बंधु को भी यही बंगला अलॉट हुआ था और वर्ष 2003 में कार्यकाल के दौरान उनका निधन हो गया.
- पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी इस बंगले में रहने के बजाय मथुरा रोड स्थित अपेक्षाकृत छोटे सरकारी रेजिडेंस को चुना था.
1920 में अंग्रेजों ने तैयार किया था यह बंगला
करीब 100 साल पुराना यह बंगला ब्रिटिश दौर में 1920 के दशक में बनाया गया था. विशाल कैंपस में बने इस दो मंजिला भवन में चार बेडरूम, कई मीटिंग रूम, बड़ा दीवानखाना, फाउंटेन, बड़ा लॉन, आउटहाउस और सात स्टाफ क्वार्टर हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि ‘मनहूस’ कहलाने वाला यह बंगला अपनी नई भूमिका में दिल्ली की सेफ्टी और डिजास्टर मैनेजमेंट का सबसे बड़ा कमांड सेंटर बनकर नई पहचान बना पाता है या नहीं.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें
