अक्षरधाम मंदिर में 'केशव काव्य कलरव 2026', गूंजे भक्ति और साहित्य के स्वर

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अक्षरधाम मंदिर में ‘केशव काव्य कलरव 2026’, गूंजे भक्ति और साहित्य के स्वर

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अक्षरधाम मंदिर में ‘केशव काव्य कलरव 2026’ राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन हुआ. इसमें भक्ति, गुरु महिमा और आध्यात्मिक चिंतन पर रचनाएं प्रस्तुत की गईं. कई हस्तियां शामिल हुईं.

राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन में शामिल युवा रचनाकार और बीएपीएस स्वामीनारायण शोध संस्थान के सह निदेशक डॉ. ज्ञानानंददास स्वामी.

नई दिल्ली. स्वामीनारायण अक्षरधाम में बीएपीएस स्वामीनारायण शोध संस्थान की ओर से आयोजित राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन ‘केशव काव्य कलरव 2026’ का आयोजन हुआ. सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित और युवा रचनाकारों ने अपनी कविताओं,और गजलों के माध्यम से भक्ति, गुरु महिमा और आध्यात्मिक चिंतन को प्रस्तुत किया.

इस सम्मेलन के लिए हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषाओं में मौलिक रचनाएं आमंत्रित की गई थीं. आयोजन का मुख्य विषय ‘गुरु’, ‘भगवान’, ‘आत्मविचार’, ‘सांख्य विचार’ और ‘अक्षय आनंद’ जैसे आध्यात्मिक विषय रहे. देशभर से मिली रचनाओं में से चयन समिति ने श्रेष्ठ कृतियों का चयन किया और चयनित रचनाकारों को अक्षरधाम में अपनी प्रस्तुति देने के लिए बुलाया.

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इनमें पूर्व लोकपाल समिति की न्यायिक सदस्य और मणिपुर हाईकोर्ट की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिव शंकर मिश्रा, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमोद कुमार शर्मा सहित शिक्षा, प्रशासन और मीडिया जगत की कई प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं.

सम्मेलन के पहले सत्र की शुरुआत बीएपीएस स्वामीनारायण शोध संस्थान के सह निदेशक डॉ. ज्ञानानंददास स्वामी के स्वागत संबोधन से हुई. इसके बाद मंच पर एक के बाद एक कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया. प्रस्तुतियों में गुरु-भक्ति, ईश्वरीय कृपा, आत्मचिंतन, अक्षरधाम की दिव्यता और आध्यात्मिक जीवन जैसे विषय प्रमुख रहे. श्रोताओं ने इन काव्य प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए तालियों से कवियों का उत्साहवर्धन किया.

अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि कविता केवल साहित्य की विधा नहीं, बल्कि भक्ति और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी है. उन्होंने ऐसे आयोजनों को साहित्य और आध्यात्म का सुंदर संगम बताते हुए आगे भी इसे जारी रखने की बात कही.

कार्यक्रम के अंत में चयनित और पुरस्कृत रचनाकारों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया. आयोजकों ने इसे भारतीय संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया.

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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