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दिल्ली की हवा इस वक्त संजीवनी बूटी से कम नहीं है. क्योंकि जिस दिल्ली में 500 तक एयर क्वालिटी इंडेक्स चला जाता है, वहां बुधवार को AQI सिर्फ 59 दर्ज किया गया. यह सिर्फ दिल्ली की बात नहीं, एनसीआर के सभी शहरों में यही हाल देखा गया.
दिल्ली का एक्यूआई बुधवार को सिर्फ 59 दर्ज किया गया.
जिस दिल्ली की पहचान अक्सर धुआं उगलती चिमनियों, ट्रैफिक जाम के धुएं, कंस्ट्रक्शन की धूल और सर्दियों में गैस चैंबर वाले तमगे से होती है, वहां आज कुछ ऐसा चमत्कार हुआ है जिसे देखकर हर कोई हैरान है. ऐसा लग रहा है मानो हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ों वाली साफ-सुथरी हवा सीधे दिल्ली-एनसीआर में उतर आई है. बुधवार शाम 4 बजे जब राजधानी का AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स मापा गया, तो वह लुढ़ककर मात्र 59 पर आ गया. यह इस साल का रिकॉर्ड है. यानी इस साल दिल्ली ने इससे साफ हवा में सांस नहीं ली थी.
टूट गया जून का रिकॉर्ड
अगर बात करें कि इससे पहले दिल्ली की हवा कब इतनी मेहरबान हुई थी, तो हमें थोड़ा पीछे जाना होगा. इस बुधवार से पहले, वर्ष 2026 का सबसे कम दैनिक औसत AQI 73 दर्ज किया गया था. यह कमाल 12 जून 2026 को हुआ था. उस वक्त भी दिल्ली वाले काफी खुश हुए थे, लेकिन अब 59 के इस नए रिकॉर्ड ने तो 73 वाले उस पुराने रिकॉर्ड को भी मीलों पीछे छोड़ दिया है. 12 जून के बाद से अब जाकर दिल्ली के फेफड़ों को वो असली ठंडक मिली है, जिसकी उन्हें दरकार थी.
मानसून की मेहरबानी
लगातार हो रही बारिश और मॉनसून की जबरदस्त सक्रियता ने दिल्ली की हवा को धो-पोंछकर चमका दिया है. आसमान से गिरती बारिश की बूंदों ने हवा में तैरते धूल के बारीक कणों यानी PM 2.5 और PM 10, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण के तमाम खतरनाक तत्वों को जमीन पर बैठा दिया है. इसी वजह से प्रदूषण गायब सा हो गया है.
दिल्ली ही नहीं पूरे एनसीआर वालों की मौज |
| दिल्ली | 59 |
| गुरुग्राम | 128 |
| गाजियाबाद | 49 |
| ग्रेटर नोएडा | 57 |
शरीर पर कैसा असर?
- प्रदूषण वाले दिनों में हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे जहरीले कण सीधे हमारे फेफड़ों में घुसकर वहां चिपक जाते हैं. फेफड़ों को इन्हें बाहर निकालने के लिए एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ती है. AQI 59 होने का मतलब है कि हवा में ये खतरनाक कण न के बराबर हैं.
- आपके फेफड़े पूरी क्षमता के साथ फैलते और सिकुड़ते हैं. अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सांस की बीमारी झेल रहे लोगों के लिए यह हवा किसी संजीवनी बूटी जैसी है. इनहेलर का इस्तेमाल कम हो जाता है और सीने में होने वाली जकड़न छूमंतर हो जाती है.
- गंदी हवा सीधे आपके दिल पर वार करती है. प्रदूषण के बारीक कण जब खून में मिलते हैं, तो नसों में सूजन आ जाती है और खून गाढ़ा होने लगता है इससे हार्ट अटैक और बीपी का खतरा बढ़ता है
- साफ हवा में सांस लेने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह एकदम स्मूथ हो जाता है. आपके दिल को खून पंप करने के लिए एक्स्ट्रा जोर नहीं लगाना पड़ता. दिल की धड़कन नॉर्मल रहती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है
- स्मॉग वाले दिनों में आप बिना कुछ किए भी थका-थका और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं? यह ऑक्सीजन की कमी के कारण होता है. 59 के AQI वाली हवा में भरपूर और शुद्ध ऑक्सीजन होती है. जब यह प्योर ऑक्सीजन आपके दिमाग तक पहुंचती है, तो दिमाग की नसें रिलैक्स होती हैं. आपका फोकस बढ़ता है, सुस्ती दूर भागती है और आपका मूड बेवजह ही अच्छा रहने लगता है.
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Gyanendra Kumar Mishra is a senior journalist with nearly 20 years of experience in the media industry. He is currently associated with News18 Hindi (hindi.new…और पढ़ें
