ताहिर हुसैन को फांसी होगी या मिलेगी उम्रकैद? अंकित शर्मा हत्याकांड की इन धाराओं में छिपा है सजा का जवाब

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फांसी होगी या उम्रकैद? ताहिर हुसैन की इन धाराओं में छिपा है सजा का पूरा जवाब

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Tahir Hussain Punishment: दिल्ली दंगों के सबसे खौफनाक अंकित शर्मा हत्याकांड में आज कड़कड़डूमा कोर्ट ने वो ऐतिहासिक फैसला सुना दिया जिसका पूरे देश को इंतजार था. अदालत ने पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन को हत्या और अपहरण का दोषी करार दिया है. अब बड़ा सवाल यह है कि किन धाराओं में ताहिर दोषी है और इन धाराओं में कितनी सजा का प्रावधान है? चलिए इसपर नजर डालते हैं.

ताहिर हुसैन की सजा पर सुनवाई होनी अभी बाकी है.

नई दिल्ली. साल 2020 के दिल्ली दंगों का वो सबसे खौफनाक और रूह कंपा देने वाला जख्म आईबी अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड आज इंसाफ की चौखट पर खड़ा था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीन सिंह ने जैसे ही इस जघन्य हत्याकांड पर अपना अंतिम फैसला सुनाया, कोर्ट रूम का पूरा मंजर ही बदल गया. अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण और दंगा भड़काने का दोषी करार दे दिया. यह सुनते ही अब तक खुद को बेकसूर बताने वाला दंगों का मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन घुटनों के बल बैठ गया और फूट-फूटकर रोने लगा. अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर अंकित शर्मा को किन धाराओं में दोषी ठहराया गया है और उन धाराओं में ताहिर को अधिकतम और न्‍यूनतम कितनी सजा हो सकती है? चलिए हम आपको विस्‍तार में समझाते हैं.

आईपीसी की धारा 302 (हत्या) – सबसे बड़ी सजा

अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या का दोषी पाया है. कानून की नजर में यह सबसे गंभीर अपराधों में से एक है.
• अधिकतम सजा: इस धारा के तहत अपराधी को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है.
• जुर्माना: इसके साथ ही दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है.

अन्य धाराएं और उनमें सजा का प्रावधान

• आईपीसी की धारा 365 (अपहरण): किसी व्यक्ति का गुप्त और अवैध रूप से अपहरण या बंधक बनाने के लिए इसमें अधिकतम 7 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है.
• आईपीसी की धारा 153A (विभिन्न समूहों के बीच नफरत फैलाना): धर्म, जाति या भाषा के आधार पर नफरत फैलाने के इस अपराध में अधिकतम 3 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं.
• आईपीसी की धारा 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना): हथियारों से लैस होकर दंगा करने की स्थिति में अधिकतम 3 साल तक की कैद या जुर्माना हो सकता है.
• आईपीसी की धारा 147 (दंगा करना): साधारण दंगे के मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 2 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.
• आईपीसी की धारा 188 (सरकारी आदेश की अवज्ञा): लोक सेवक द्वारा जारी आदेश का उल्लंघन करने पर 1 महीने से 6 महीने तक की कैद या जुर्माना हो सकता है.

ताहिर की सजा पर क्या कहती है कानून की नजर?
चूंकि अदालत ने ताहिर हुसैन को आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक साजिश) के आरोप से बरी कर दिया है लेकिन मुख्य अपराध यानी धारा 302 (हत्या) और धारा 365 (अपहरण) में दोषी ठहराया है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी मामले में धारा 302 के तहत दोष सिद्ध हो जाता है, तो अदालत बाकी छोटी सजाओं को उसी के साथ समानांतर चलाने का आदेश देती है.

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार धारा 302 के तहत अपराध सिद्ध होने पर अदालत के पास केवल दो ही विकल्प बचते हैं आजीवन कारावास या मृत्युदंड या फांसी की सजा. चूंकि इस मामले में क्रूरता की हदें पार की गई थीं और आईबी अफसर के शरीर पर धारदार हथियारों के अनगिनत घाव मिले थे, इसलिए अभियोजन पक्ष इसे दुर्लभ से दुर्लभतम मामला बताकर फांसी की मांग कर सकता है. हालांकि, अदालत ने ताहिर को धारा 120B (आपराधिक साजिश) के आरोप से बरी कर दिया है, जिससे साफ है कि सीधे हत्या और मौके पर दंगे व अपहरण की धाराओं (147, 148, 149, 153A, 365) के आधार पर ही सजा तय होगी. अगर अदालत फांसी नहीं देती है तो भी ताहिर हुसैन का पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे कटना बिल्कुल तय माना जा रहा है.

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Sandeep GuptaChief Sub Editor

पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…और पढ़ें

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