दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत ने ताहिर हुसैन सहित 5 लोगों को दोषी करार दिया है.कोर्ट के इस फैसले के पीछे सिर्फ अदालत में चली लंबी सुनवाई ही नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों की लंबी और बेहद चुनौतीपूर्ण जांच भी रही. एक अधिकारी ने दंगाइयों के बीच जान जोखिम में डालकर हालात संभाले और अंकित शर्मा का शव बरामद कराया, जबकि दूसरे अधिकारी ने लॉकडाउन, गवाहों की कमी और सबूत मिटाने की कोशिशों के बावजूद ऐसा केस तैयार किया कि आखिरकार अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहरा दिया.
30 पुलिसकर्मी, सामने 15 हजार की भीड़
23 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा की शुरुआत हुई तो खजूरी चौक और चांद बाग सबसे संवेदनशील इलाकों में बदल गए. उस समय खजूरी चौक पर तैनात तत्कालीन एसीपी हरीश कुकरेती के पास महज 30 पुलिसकर्मी थे, जबकि सामने देखते ही देखते करीब 15 हजार लोगों की भीड़ जमा हो गई. भीड़ लगातार पथराव कर रही थी, लेकिन पुलिस टीम पीछे नहीं हटी.
एसीपी हरीश कुकरेती के मुताबिक, सुबह उन्हें सूचना मिली कि खजूरी चौक और चांद बाग पुलिया के पास हजारों लोग इकट्ठा हैं. वह तत्काल एसएचओ पवन कुमार और अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. शुरुआती दौर में करीब छह से सात हजार लोग थे, लेकिन कुछ ही देर में चांद बाग और वजीराबाद रोड की भीड़ भी वहां पहुंच गई. हालात इतने बिगड़ गए कि तत्कालीन डीसीपी अमित शर्मा भी पथराव में घायल हो गए.
स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और करीब पांच घंटे तक लगातार मोर्चा संभाले रखा. शाम करीब पांच बजे अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचा, जिसके बाद दंगाइयों को इलाके से पीछे धकेला जा सका. इसके बाद पुलिस ने दोनों समुदायों के लोगों के साथ बातचीत शुरू कराई, शांति मार्च निकाला और लगातार दो दिनों की कोशिशों के बाद हालात को काफी हद तक सामान्य किया.
नाले में लाश की मिली खबर…
इसी दौरान 26 फरवरी की सुबह एसीपी हरीश कुकरेती को सूचना मिली कि खजूरी खास नाले में एक शव पड़ा है. जब वह चांद बाग पुलिया पहुंचे तो वहां एक बुजुर्ग अपने लापता बेटे की तलाश में भटक रहे थे. बाद में पता चला कि वह आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा के पिता रविंदर शर्मा थे. कुकरेती ने तुरंत दमकल विभाग और नगर निगम के गोताखोरों को बुलाया. नाले में कीचड़, कचरे और गंदे पानी के बीच करीब एक घंटे तक तलाशी चली. आखिरकार अंकित शर्मा का शव बरामद हुआ. शव बुरी तरह क्षत-विक्षत था, लेकिन पिता ने मौके पर ही उसकी पहचान कर ली. पुलिस ने भारी तनाव के बीच परिवार को समझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा.
इसके बाद मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एसआईटी को सौंपी गई. तत्कालीन डीसीपी जॉय टिर्की की निगरानी में जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर अमलेश्वर राय को मिली. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि घटनास्थल के कई सीसीटीवी कैमरों के तार काट दिए गए थे, कुछ कैमरों को कपड़े से ढंक दिया गया था और कई कैमरों का रुख ही बदल दिया गया था ताकि घटना रिकॉर्ड न हो सके.
ताहिर हुसैन के गुनाहों का कैसे हुआ पर्दा फाश?
जांच के दौरान पुलिस ने ताहिर हुसैन की इमारत की छत से पेट्रोल बम, ईंट-पत्थर, टूटी बोतलें और गुलेल बरामद कीं. तभी देश में कोरोना महामारी फैल गई और लॉकडाउन लागू हो गया. इसके बावजूद जांच नहीं रुकी. जांच टीम को एक अहम वीडियो मिला, जिसमें तीन लोग अंकित शर्मा के शव को नाले में फेंकते दिखाई दिए. यही वीडियो पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सबूत बना. इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, वायरल वीडियो, तस्वीरों और फॉरेंसिक जांच को एक-दूसरे से जोड़ना शुरू किया.
जांच अधिकारी अमलेश्वर राय के सामने सबसे कठिन काम गवाह जुटाना था. दंगे और कोरोना के कारण लोग डरे हुए थे. आरोपी और गवाह एक ही इलाके के रहने वाले थे, इसलिए कोई भी खुलकर सामने आने को तैयार नहीं था. पुलिस ने गवाहों को सुरक्षा का भरोसा दिया. इसके बाद 91 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और कई अहम गवाहों को पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई गई.
पुलिस ने ऐसे बनाया पुख्ता केस?
फॉरेंसिक जांच के दौरान नाले की दीवार से मिले खून के नमूने अंकित शर्मा के डीएनए से मेल खा गए. हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद किए गए. पुलिस ने मुख्य चार्जशीट के अलावा छह पूरक चार्जशीट दाखिल कीं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक रिपोर्ट शामिल थीं.
सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की गंभीरता को देखते हुए खुद घटनास्थल का निरीक्षण किया. ट्रायल जज सरकारी और बचाव पक्ष के वकीलों के साथ मौके पर पहुंचे. जांच अधिकारी अमलेश्वर राय और इंस्पेक्टर प्रियंका भी वहां मौजूद रहीं. अदालत ने पुलिस द्वारा तैयार किए गए साइट प्लान का मिलान मौके से किया और उसे सही पाया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर धारदार और कुंद हथियारों से किए गए 51 घावों की पुष्टि हुई. पुलिस की ओर से जुटाए गए डिजिटल, फॉरेंसिक और प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को हत्या, दंगा और अन्य गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया. हालांकि ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश के आरोप से बरी कर दिया गया. सजा का ऐलान अभी होना बाकी है.
करीब पांच साल तक चली इस कानूनी लड़ाई में एसीपी हरीश कुकरेती की मौके पर दिखाई गई बहादुरी और एसीपी अमलेश्वर राय की बारीक जांच ने इस बहुचर्चित मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. दंगों की अराजकता, कोरोना लॉकडाउन और सबूत मिटाने की कोशिशों के बावजूद पुलिस ने जिस तरह वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से केस तैयार किया, उसी ने अदालत में अभियोजन पक्ष की नींव मजबूत की और आखिरकार अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषियों तक कानून का शिकंजा पहुंचा.
