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Delhi News Today: दिल्ली की एक अदालत ने पत्नी पर जानलेवा हमले और दहेज प्रताड़ना के आरोपी पति को बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में फेल रहा. 15 जून 2018 को हुए इस हमले में पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि हमलावर का चेहरा मफलर से ढका था और उसने पति को पहचानने से इनकार कर दिया. गवाहों की कमी और कमजोर साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को बरी किया गया.
कोर्ट ने पति को बरी कर दिया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
दहेज की हवस, चाकू के खौफनाक वार और लहूलुहान जिंदगी. 15 जून 2018 की वो दर्दनाक रात जब एक शादीशुदा महिला अपने ही मायके में मौत से जंग लड़ रही थी. पुलिस की जांच का सुई सीधे पति की तरफ घूमी. उस पर कातिलाना हमले और क्रूरता का संगीन ठप्पा लगा लेकिन जब इंसाफ की अदालत सजी तो एक ऐसे सच का पर्दाफाश हुआ जिसने पूरे मामले को ही पलट कर रख दिया. कटघरे में खड़ी पीड़िता ने ही जब हमलावर के रूप में पति को पहचानने से इनकार कर दिया तो अदालत के कमरे में सन्नाटा पसर गया. मफलर से ढके एक रहस्यमयी चेहरे और बिखरे हुए गवाहों की कहानी के बीच दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने आरोपी पति को बेकसूर मानते हुए बाइज्जत बरी कर दिया!
सबूतों के अभाव का फायदा आरोपी को
इस मामले की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुनीत पाहवा (2018 में गोकलपुरी पुलिस थाने में दर्ज मामला) ने कहा कि पेश किए गए गवाहों में से कोई भी आरोपी का दोष साबित नहीं कर सका. 3 अगस्त के अपने आदेश में अदालत ने टिप्पणी की, “अभियोजन पक्ष की कहानी में कई बड़ी कमियां रह गई हैं. कानून के तय सिद्धांतों के अनुसार, इन कमियों और संदेह का लाभ आरोपी को मिलना ही चाहिए.”
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के दावों के मुताबिक, यह वारदात 15 जून 2018 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली स्थित पीड़िता के मायके में हुई थी. आरोप लगाया गया था कि मोटरसाइकिल, सोने की चेन और अंगूठी जैसे दहेज की मांग को लेकर हुए विवाद के बाद पति ने अपनी पत्नी पर चाकू से ताबड़तोड़ कई हमले किए. गंभीर रूप से घायल महिला को आनन-फानन में जीटीबी अस्पताल (GTB Hospital) में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसकी चोटों को जानलेवा और बेहद गंभीर बताया था.
सुनवाई के दौरान कमजोर पड़ी पुलिस
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि समय के साथ अभियोजन पक्ष का मामला बेहद कमजोर पड़ता चला गया. केस के मुख्य और अहम गवाह या तो अपने बयानों से मुकर गए या फिर वे आरोपी के खिलाफ अदालत में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके.
पीड़िता का बयान और चश्मदीद की मौत बनी वजह
इस केस में अभियोजन पक्ष को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कथित चश्मदीद गवाह और पीड़िता की बहन की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई. जिरह पूरी न हो पाने के कारण उनकी गवाही का कानूनी तौर पर कोई साक्ष्य मूल्य नहीं बचा.
इसके अलावा, खुद पीड़िता ने भी अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन नहीं किया. अपने बयान में पत्नी ने साफ कहा कि घटना के वक्त एक अज्ञात शख्स, जिसने अपना चेहरा मफलर से ढका हुआ था, कमरे में घुसा और हमला कर दिया. महिला ने अपने पति की पहचान हमलावर के रूप में करने से इनकार कर दिया. वहीं, परिवार के अन्य सदस्यों की गवाही भी केवल सुनी-सुनाई बातों पर आधारित निकली, जिससे मामला पूरी तरह खारिज हो गया.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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