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Avocado Plant Growing Tips : कुछ पौधों में इतने ज्यादा पोषक तत्व सुपरफूड का काम करते हैं. एवोकैडो में फाइबर, पोटेशियम और विटामिन सी, ई, के भरपूर होता है. यह वजन कंटोल करने में मदद करता है. शरीर की ताकत बढ़ाता है. यह ऐसा फल है जो दिल को स्वस्थ रखता है. पाचन सुधारता है, और त्वचा में चमक लाता है. इसी वजह से भारत में इसे मक्खन फल भी कहते हैं. आमतौर पर ₹200 से ₹500 प्रति किलो तक मिलता है. प्रीमियम ‘हैस’ एवोकाडो की कीमत ₹800 से ₹1,200 प्रति किलो या उससे अधिक भी होती है. अगर इस जादुई फल को घर में भी उगा सकते हैं. इसके लिए मिट्टी कैसे तैयार की जाती है, तापमान कितना होना चाहिए, कौन सी वेरायटी सही रहेगी, इसकी देखरेख कैसे करें, आइये सिलसिलेवार ढंग से इन सवालों के जवाब जानते हैं.
Avocado Ko Ghar Par Kaise Ugaye : एवोकाडो एक महंगा फल है लेकिन इसमें वसा, कई विटामिन और खनिज होते हैं. विटामिन सी, ई, के और बी-कॉम्प्लेक्स इसमें पाया जाता है. एक दिन में आधा एवोकाडो खाना से भी शरीर को जरूरी फाइबर-विटामिन मिल जाते हैं. इसका जूस भी बनाया जाता है. यह मुख्य रूप से मैक्सिको का फल है. भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में होती है. अब इसकी कई हाइब्रिड वैरायटी आ गई हैं. यूपी-एमपी-गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में भी यह फल होने लगा है. अगर आप बागवानी का शौक रखते हैं और इस फल को घर में लगाना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना होगा. आइये इन सभी प्वॉइंट पर विस्तार से चर्चा करते हैं.
एवोकाडो 40-45 डिग्री तक के टेंपरेचर में उगाया जा सकता है. इसकी तीन वैरायटी मारकस, मैक्सिकन हैश और पिंकेर्टन
बेहद खास हैं. एवोकाडो के पौधे लगाने का सबसे सही समय मानसून (जुलाई-अगस्त) का सीजन होता है. इसके अलावा अक्टूबर, फरवरी-मार्च यानी वसंत का महीना इसके पौधरोपण के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. अगर आप इस पौधे को घर पर लगाना तो चाहते हैं तो आपको अपने आसपास के वातावरण और मिट्टी के बारे में पता होना चाहिए. हर टेंपरेचर में हर वैरायटी नहीं उग पाती.
अगर आपके यहां का तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाता है तो लैम हैश वैरायटी का पौधा लगाएं. प्रमाणित नर्सरी से ही पौधे लाएं. पौधा कम से कम एक साल पुराना हो. नर्सरी से ग्राफ्टेड पौधे में फल आने की संभावना बहुत ज्यादा होती है. नर्सरी से पौधा लेते समय यह जरूर चेक कर लें कि पौधा अच्छी से ग्राफ्टेड है या नहीं. पौध मैच्योर है या नहीं. अगर अपने यहां की जलवायु के हिसाब से आप सही वैरायटी का पौधा नहीं लगाएंगे तो उसमें फल नहीं आएंगे.
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एवोकाडो का पौधा गमले में ऐसे समय में लगाएं जब बहुत ज्यादा बारिश ना हो, बहुत ज्यादा ठंड ना हो और बहुत ज्यादा गर्मी ना हो. 15 से 30 डिग्री के बीच टेंपरेचर पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त होता है. अगर पौधे को गमले में लगा रहे हैं तो यह कम से कम 18X18 का होना चाहिए. 60 फीसदी कोकोपीट लें. 10 फीसदी बगीचे की मिट्टी, 20 परसेंट वर्मि कंपोस्ट डालें. 250 ग्राम नीम की खली डालें. सभी को मिक्स कर लें. अगर फार्म हाउस में जमीन पर पौधे को लगा रहे हैं तो गड्ढा 2X2 का होना चाहिए. पौधे को गमले में लगाने के बाद पानी दें. पौधे को सपोर्ट जरूर दें. कोई लकड़ी का सहारा जरूर दें.
विदेशी वैरायटी के पौधे की लंबाई बहुत ज्यादा नहीं होती लेकिन देसी वैरायटी का पौधा 15 फीट लंबा हो सकता है. पौधे को बारिश के सीजन के बाद हर दिन दो लीटर पानी चाहिए होता है. पानी अगर ड्रिप से देंगे तो बेहतर होगा. स्प्रे कैन से ही पानी दें. पानी के अलावा निराई-गुड़ाई समय-समय पर करते रहें. महीन में एक बार सड़े गोबर की खाद दें. जब पौधे की जड़ें बढ़ जाएंगी तो पानी कम दे सकते हैं. नमी बनी रहनी चाहिए. पौधे में अगर ग्रोथ ना आ रही हो तो जैविक खाद वर्मि कंपोस्ट दे सकते हैं.
एवोकाडो के पौधे 3 से 4 साल बाद फल देना शुरू करते हैं. अगर पौधा बीज से उगाया गया है तो उसमें 5 से 10 साल तक का समय लग सकता है. इसलिए पौधा नर्सरी से लाकर ही गमले में लगाएं. एक प्लांट से 10 किलो का प्रोडक्शन मिल सकता है. एवोकाडो का पौधा 40 साल तक फल देता है. हर साल उत्पादन बढ़ता जाता है. इस पौधे में कीडों का अटैक कम ही होता है. तने पर कीड़े जरूर कभी-कभी लग जाते हैं. ऐसे में कीटनाशक का छिड़काव करें. एवोकाडो का फल पौधे पर नहीं पकता. जब फल मैच्योर होगा तो कालापन आ जाएगा. यानी फल हरे से काले रंग का हो जाएगा.
