गाजियाबाद: गुर्जर समाज की पंचायत का बड़ा फैसला, मृत्युभोज और डीजे पर रोक और बेटियों की पढ़ाई को बढ़ावा

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Ghaziabad News: गाजियाबाद के दौसा बंजारपुर गांव में गुर्जर समाज की पंचायत ने सामाजिक कुरीतियों और दिखावे पर रोक लगाने का सराहनीय फैसला लिया है. पंचायत में मृत्युभोज, शादी-समारोहों में महंगे डीजे और अनावश्यक खर्चों पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है. इस पहल के तहत फिजूलखर्ची रोककर पैसे को बेटियों की उच्च शिक्षा और गांव में लाइब्रेरी निर्माण में लगाने का संकल्प लिया गया है. पूर्व प्रधान ने मृत्युभोज रद्द कर लाइब्रेरी के लिए 21 हजार रुपये दान दिए.

Ghaziabad News: गाजियाबाद के भोजपुर क्षेत्र स्थित दौसा बंजारपुर गांव में गुर्जर समाज की एक अहम पंचायत आयोजित की गई. इस पंचायत में मृत्युभोज, शादी-समारोहों में महंगे डीजे और मांगलिक कार्यक्रमों में होने वाले बेहिसाब खर्चों पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है. फिजूलखर्ची पर लगाम कसने के साथ ही इस पैसे को बेटियों की उच्च शिक्षा और गांव में लाइब्रेरी निर्माण जैसे ज्ञानवर्धक कार्यों में लगाने का सर्वसम्मत संकल्प लिया गया है.

पंचायत का अहम फैसला: कुरीतियों पर रोक और शिक्षा पर जोर
गाजियाबाद के भोजपुर क्षेत्र के दौसा बंजारपुर गांव में हुई गुर्जर समाज की पंचायत में ऐसे कई फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ने वाले सामाजिक खर्च को कम करने के साथ शिक्षा को बढ़ावा देने पर होगा. पंचायत में सर्वसम्मति से मृत्युभोज बंद करने, मांगलिक कार्यक्रमों में डीजे नहीं बजाने और गांव में होने वाले माता पूजन के बाद सामूहिक भोज जैसी परंपराओं पर रोक लगाने पर सहमति बनी. साथ ही समाज की बेटियों को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया.

500 साल पुराना ऐतिहासिक गांव और नई सामाजिक चेतना
गाजियाबाद के भोजपुर क्षेत्र का दौसा बंजारपुर गांव गुर्जर समाज के प्रमुख और बड़े गांवों में गिना जाता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक गांव का इतिहास करीब 500 से 600 साल पुराना है. बताया जाता है कि राजस्थान के दौसा से पहले दो परिवार यहां आकर बसे थे. धीरे-धीरे परिवार बढ़ते गए और बसावट का विस्तार होता चला गया. आज गांव की आबादी करीब 10 हजार बताई जाती है. गाजियाबाद शहर से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव अपने पुराने इतिहास के साथ सामाजिक रूप से भी खास पहचान रखता है. अब गांव में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ शुरू हुई पहल ने इसे एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.

अनावश्यक खर्चों से मुक्ति और मेरठ गुर्जर परिसंघ की पहल
गांव दौसा बंजारपुर निवासी बबली गुर्जर ने बताया कि मेरठ गुर्जर परिसंघ की ओर से करीब एक साल पहले सामाजिक कुरीतियों और अनावश्यक खर्चों को खत्म करने की पहल शुरू की गई थी. इसी कड़ी में अब गाजियाबाद के गांवों में भी पंचायत कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कई परिवार सामाजिक दबाव और दिखावे के चलते अपनी क्षमता से अधिक खर्च कर देते हैं, ऐसे में इन परंपराओं पर रोक लगने से आम लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि किसी पर दबाव नहीं है, लेकिन पंचायत के फैसले को गांव के लोगों का पूरा समर्थन मिल रहा है.

मृत्युभोज रद्द कर लाइब्रेरी के लिए दिए 21 हजार रुपये
इस पहल को गांव के पूर्व प्रधान सुनील ने भी आगे बढ़ाया. उन्होंने बताया कि 27 अगस्त को उनके पिता की पुण्यतिथि पर हर वर्ष मृत्युभोज कराया जाता था, लेकिन इस बार परिवार ने पंचायत के फैसले का सम्मान करते हुए मृत्युभोज रद्द कर दिया. इसके खर्च में से 21 हजार रुपये गांव में लाइब्रेरी बनाने के लिए देने की घोषणा की गई. उनका कहना है कि जिस पैसे को भोज में खर्च किया जाना था, उसे अब बच्चों की शिक्षा और ज्ञान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

आसपास के गांवों में भी दिखने लगा बदलाव का असर
गांव निवासी राहुल गुर्जर ने बताया कि समाज में फैली कुरीतियों और दिखावे को कम करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है. शादियों में महंगे डीजे, मृत्युभोज और अन्य आयोजनों पर होने वाले खर्च को शिक्षा की ओर मोड़ने की जरूरत है. बेटियों को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाना और परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना ही इस अभियान का लक्ष्य है. बताया गया कि इस पहल के बाद दूसरे गांवों के लोग भी आगे आ रहे हैं. एक अन्य गांव में मृत्युभोज होने वाला था, लेकिन समझाइश के बाद दोनों परिवारों ने कार्यक्रम रद्द कर दिया. करीब 10 हजार की आबादी वाले दौसा बंजारपुर से शुरू हुई यह पहल अब आसपास के गांवों तक पहुंच रही है.

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Rahul Goel

Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…

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