गाजियाबाद में बेकार फ्लेक्स से तैयार हो रहे उपयोगी बैग, 35 महिलाओं को मिला रोजगार, अनोखी पहल से पर्यावरण सुरक्षा

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गाजियाबाद में साथी फाउंडेशन और नगर निगम मिलकर बेकार फ्लेक्स से मजबूत बैग बना रहे हैं. यह पहल महिलाओं को रोजगार दे रही है और पर्यावरण बचा रही है. साथी फाउंडेशन की यह पहल वर्ष 2022 में शुरू हुई थी. काजल छिब्बर ने बताया कि एक कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में फ्लेक्स बोर्ड बेकार पड़े थे इन्हें देखकर उनके मन में सवाल आया कि जब एक कार्यक्रम के बाद इतना फ्लेक्स कचरे में चला जाता है तो पूरे शहर में हर दिन कितनी मात्रा में फ्लेक्स बेकार होते होंगे इसी सोच से उन्होंने फ्लेक्स को दोबारा इस्तेमाल करने का तरीका तलाशना शुरू किया. संस्था ने पहले बेकार फ्लेक्स से बैग बनाने का प्रयोग किया. फ्लेक्स को पहले साफ किया जाता है फिर जरूरत के हिसाब से उसकी कटिंग की जाती है.

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गाजियाबाद की सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक जगहों पर नजर आने वाले फ्लेक्स बोर्ड कुछ दिनों बाद ही कचरे में तब्दील हो जाते हैं. कार्यक्रम खत्म होते ही यही फ्लेक्स कूड़े के ढेर, खाली प्लॉट या लैंडफिल तक पहुंच जाते हैं. लेकिन अब इसी बेकार समझे जाने वाले फ्लेक्स को गाजियाबाद नगर निगम के साथ मिलकर साथी फाउंडेशन एक नई पहचान दे रहा है. संस्था की संस्थापक काजल छिब्बर की पहल पर बेकार फ्लेक्स को इकट्ठा कर उससे मजबूत और उपयोगी बैग तैयार किए जा रहे हैं. खास बात यह है कि इन बैगों को लोगों को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है जबकि इन्हें बनाने का काम महिलाओं को देकर उनके लिए रोजगार का जरिया भी तैयार किया गया है. यानी जो फ्लेक्स कभी शहर के लिए कचरा थे वही अब पर्यावरण बचाने के साथ महिलाओं की आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रहे हैं.

बेकार फ्लेक्स को दोबारा इस्तेमाल के लिए सोचा

साथी फाउंडेशन की यह पहल वर्ष 2022 में शुरू हुई थी. काजल छिब्बर ने बताया कि एक कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में फ्लेक्स बोर्ड बेकार पड़े थे इन्हें देखकर उनके मन में सवाल आया कि जब एक कार्यक्रम के बाद इतना फ्लेक्स कचरे में चला जाता है तो पूरे शहर में हर दिन कितनी मात्रा में फ्लेक्स बेकार होते होंगे इसी सोच से उन्होंने फ्लेक्स को दोबारा इस्तेमाल करने का तरीका तलाशना शुरू किया. संस्था ने पहले बेकार फ्लेक्स से बैग बनाने का प्रयोग किया. फ्लेक्स को पहले साफ किया जाता है फिर जरूरत के हिसाब से उसकी कटिंग की जाती है. इसके बाद सिलाई के जरिए बैग तैयार किए जाते हैं और उनमें पट्टियां लगाई जाती हैं तैयार बैग काफी मजबूत होते हैं और इनमें अच्छा खासा वजन भी रखा जा सकता है. एक सामान्य आकार के फ्लेक्स से करीब छह हैंडबैग तैयार हो जाते हैं.

नगर निगम भी इस काम में कर रहा सहयोग

इस काम में गाजियाबाद नगर निगम भी संस्था का सहयोग कर रहा है. नगर निगम की ओर से इस्तेमाल हो चुके फ्लेक्स संस्था को दिए जाते हैं. इसके अलावा शहर के लोग भी अपने पुराने फ्लेक्स संस्था को उपलब्ध कराते हैं तैयार बैगों को अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाकर लोगों को निशुल्क वितरित किया जाता है इसके जरिए लोगों को प्लास्टिक और पॉलिथीन का इस्तेमाल कम करने के लिए जागरूक किया जा रहा है. इस पहल की खास बात यह है कि इससे सिर्फ पर्यावरण को फायदा नहीं हो रहा बल्कि महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है. साथी फाउंडेशन से जुड़ी करीब 35 महिलाएं फ्लेक्स से बैग तैयार करने के काम में रोजगार पा रही हैं. संस्था रोजाना करीब 50 बैग तैयार कर रही है.

काजल छिब्बर का कहना है कि बेकार फ्लेक्स और प्लास्टिक को कूड़े में फेंकने के बजाय संस्था को दिया जाए ताकि उससे दोबारा उपयोगी सामान बनाया जा सके यानी जिस फ्लेक्स को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं वही अब पर्यावरण बचाने के साथ महिलाओं के हाथों में रोजगार और लोगों के लिए उपयोगी बैग का जरिया बन रहा है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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