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Harish Rana Case Timeline: गाजियाबाद निवासी हरीश राणा का निधन हो गया है. हरीश के जाने से जहां एक ओर परिवार शोक में डूबा है, वहीं उन्हें इस बात का संतोष है कि उनके बेटे को लंबे शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिल गई. मंगलवार को जब दिल्ली एम्स में हरीश ने अंतिम सांस ली, तब परिजन उनके साथ ही थे. हरीश राणा के संघर्ष और इस विदाई ने सबको झकझोर दिया है. आइए जानते हैं हरीश राणा केस में कब-क्या क्या हुआ?
बेटे की लगातार पीड़ा को देखते हुए उनके पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दायर की थी.
गाजियाबाद. दिल्ली से सटे गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर सोसाइटी में रहने वाले 31 वर्षीय हरीश राणा का लंबा संघर्ष आखिरकार खत्म हो गया. सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली. हरीश राणा मूल रूप से पंजाब विश्वविद्यालय में बीटेक के छात्र थे. घर में हरीश राणा का एक भाई और एक बहन है. भाई का नाम आशीष राणा है. वहीं बहन की शादी हो गई है.
पिता अशोक राणा और माता निर्मला देवी हैं. हरीश राणा का परिवार 13 साल पुराने हुए उस वाकिये को कभी भूल नहीं पाएगा. साल 2013 में एक हादसे में चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद वे कोमा में चले गए. पिछले करीब 13 वर्षों से उन्हें कृत्रिम न्यूट्रिशनल और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था.
बेटे की लगातार पीड़ा को देखते हुए उनके पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दायर की थी. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमति दे दी और निर्देश दिया कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम को एक तय प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे हटाया जाए, ताकि मरीज की गरिमा बनी रहे और उन्हें मृत्यु प्राप्त हो.
धीरे-धीरे हटा लाइफ सपोर्ट सिस्टम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 14 मार्च को हरीश राणा को गाजियाबाद स्थित उनके घर से दिल्ली के डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल के पेलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों की टीम ने तय प्रोटोकॉल के तहत धीरे-धीरे न्यूट्रिशनल सपोर्ट हटाया. इसके बाद 23 मार्च को शाम करीब 4 बजे हरीश राणा ने दिल्ली में अंतिम सांस ली. उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही सोसाइटी और आसपास के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई.
परिवार के अनुसार, हरीश का अंतिम संस्कार गाजियाबाद में ही किया जाएगा. पार्थिव शरीर को वहां लाया जा रहा है. परिजनों और परिचितों का घर पर आना-जाना जारी है. परिवार गहरे दु:ख में है, लेकिन लंबे समय से चल रही पीड़ा के अंत से उन्हें कुछ हद तक राहत भी मिली है. स्थानीय लोग हरीश को याद करते हुए भावुक हो रहे हैं और उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
