Ground Report : लेंटर टूटा, सरिया बाहर…मौत के मुहाने पर रहने को मजबूर, गाजियाबाद की इस सोसाइटी की हालत इतनी खराब

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Ghaziabad ki local news : दिल्ली में इमारत ढहने की घटना के बाद गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार में फ्लैटों की जर्जर हालत सवाल खड़े कर रही है. करीब 15 साल पुराने इन आवासों में टूटे लेंटर, बाहर निकली सरिया और दीवारों पर दरारें दिख रही हैं. इसमें रहने वाले लोग हादसे की आशंका से सहमे हुए हैं. सिद्धार्थ विहार में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत करीब 2 हजार फ्लैट बनाए गए थे. लोकल 18 से सोसाइटी में रहने वाली इल्मा ने बताया कि इमारतें अब इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि हर समय अनहोनी का डर बना रहता है.

गाजियाबाद. देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने की घटना ने जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इस हादसे के बाद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सिद्धार्थ विहार स्थित कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के फ्लैटों की मौजूदा हालत भी सवाल खड़े कर रही है. करीब 15 साल से अधिक पुराने इन आवासों में जगह-जगह टूटे लेंटर, बाहर निकली सरिया, जर्जर छज्जे और दीवारों पर आई दरारें नजर आ रही हैं. यहां रहने वाले परिवारों का कहना है कि लंबे समय से मरम्मत और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई. दिल्ली की घटना के बाद अब उन्हें अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है और वे चाहते हैं कि प्रशासन समय रहते सोसाइटी का तकनीकी निरीक्षण कराकर जरूरी मरम्मत कराए.

सिद्धार्थ विहार में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत करीब 2 हजार फ्लैट बनाए गए थे. वर्ष 2009 में इन भवनों का निर्माण कराया गया जबकि वर्ष 2011-12 में 1500 से अधिक फ्लैटों का आवंटन शुरू हुआ और परिवार यहां रहने लगे. वर्तमान में इन आवासों में हजारों की संख्या में लोग रह रहे हैं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण के बाद से अब तक सोसाइटी की मरम्मत और सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभागों की ओर से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.

हो चुका है हादसा

सोसाइटी निवासी इल्मा ने लोकल 18 को बताया कि इमारतें अब इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है. कई जगह लेंटर से मलबा झड़ चुका है और सरिया बाहर दिखाई दे रही है. छज्जे भी कमजोर हालत में हैं उनका कहना है कि बारिश के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है. छतों से पानी टपकने के साथ लेंटर में नमी और पानी भर जाता है जिससे घरों के अंदर तक दरारें दिखाई देने लगी हैं. कई परिवार मजबूरी में खुद ही मरम्मत करा रहे हैं. सीढ़ियों से गुजरते समय भी बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है. इस परिसर में पहले भी एक हादसा हो चुका है जिसमें एक बच्चा घायल हुआ था.

छज्जे बेहद कमजोर

सोसाइटी निवासी पुष्पा का कहना है कि वह करीब 15 साल से यहां रह रही हैं और समय के साथ इमारत की हालत लगातार खराब होती गई. उनका कहना है कि बच्चों को अकेले बाहर भेजने में भी डर लगता है. कई स्थानों पर लेंटर टूट चुके हैं और कुछ छज्जे बेहद कमजोर हो गए हैं. कुछ दिन पहले छज्जा गिरने की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी उनका कहना है कि बारिश के मौसम में घरों में पानी टपकने से परेशानी बढ़ जाती है और प्रशासन को समय रहते पूरे परिसर का निरीक्षण कराना चाहिए.

सिर्फ एक ही मांग

सोसाइटी निवासी वसीम का कहना है कि 15 साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से नियमित निरीक्षण और मरम्मत की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई. सोसाइटी में 1500 से ज्यादा फ्लैट हैं और कई भवनों के लेंटर तथा छज्जे जर्जर हो चुके हैं. छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर परिवार लगातार चिंतित रहते हैं. सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सोसाइटी का तकनीकी निरीक्षण कराकर जर्जर हिस्सों की तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि किसी बड़े हादसे से पहले सुरक्षा के जरूरी कदम उठाए जा सकें.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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