नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के क्लियर ऑर्डर के बावजूद यूपी के एक एसीपी (मजिस्ट्रेट) की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि वो स्टूडेंट को 5 लाख का नोटिस थमा दे? चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने जब यह तीखा सवाल दागा तो ग्रेटर नोएडा प्रशासन से लेकर यूपी पुलिस के आला अफसरों तक हड़कंप मच गया. देश की सबसे बड़ी अदालत ने पूरे देश के छात्रों को सीजेपी प्रोटेस्ट मामले में नो-कोअर्सिव एक्शन यानी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की राहत दे रखी है. लेकिन, लेकिन पहले डीएम मेधा रूपम और अब कानून का पाठ पढ़ाने वाली नोएडा पुलिस के सीनियर अफसर ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर ऐसा कारनामा कर दिखाया कि अब उनपर सीधे कोर्ट की अवमानना की तलवार लटक गई है. इससे पहले डीएम डीएम मेधा पर छात्र पर गलत एक्शन के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट सैलरी से 5 लाख देने का सख्त आदेश पारित कर चुकी है.
CJP प्रोटेस्ट और छात्र अक्षत की कहानी
झांसी के रहने वाले अक्षत त्रिपाठी ने ग्रेटर नोएडा की मशहूर गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) में B.Tech में एडमिशन लिया था. कुछ समय पहले अक्षत ने जंतर-मंतर पर CJP द्वारा आयोजित एक प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया था. अक्षत का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों को प्रोटेस्ट के लिए संगठित किया था. न कोई तोड़फोड़, न कोई हिंसा. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेक्शन 142 के तहत पूरे मामले को रद्द किए जाने और राहत देने के ठीक 3 दिन बाद यानी 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट/एसीपी डॉ. रवि शंकर मिश्रा ने अक्षत को BNSS की धारा 126/135 (130) का नोटिस थमा दिया. आरोप लगाया गया कि अक्षत सरकार विरोधी भ्रामक बातें फैला रहा है और शांति बनाए रखने के लिए उससे 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और 2 स्थानीय जमानतें मांगी गईं.
CJI सूर्य कांत का गुस्सा
छात्र की तरफ से वरिष्ठ वकीलों सुभाष चंद्र ने जब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच के सामने मेंशन किया तो CJI बेहद नाराज हुए. एडवोकेट सुभाष चंद्रन ने पीटीआई को बताया कि कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है. जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश साफ था कि किसी छात्र पर कार्रवाई नहीं होगी तो अफसर ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह नोटिस कैसे जारी किया?
कौन हैं एसीपी डॉ. रवि शंकर मिश्रा?
जिस अफसर की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की भौंहें तनी हैं, उनके प्रशासनिक रिकॉर्ड की डिटेल्स इस प्रकार हैं:
• नाम: डॉ. रवि शंकर (Dr. Ravi Shanker)
• बैच / कैडर: PPS 2018 (भर्ती तिथि: 31 मई 2021)
• वर्तमान पद: ACP / कार्यपालक मजिस्ट्रेट (तृतीय), पुलिस कमिश्नरेट गौतम बुद्ध नगर
• मूल निवास: प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश
• शैक्षणिक योग्यता: Ph.D (D.Phil)
मेधा रूपम से रवि शंकर तक… कोर्ट की सख्ती
1. पहले DM मेधा रूपम पर हंटर: अभी कुछ ही दिन पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 साल की छात्रा पर गलत तरीके से NSA लगाने के लिए नोएडा की डीएम मेधा रूपम को कड़ी फटकार लगाई थी. कोर्ट ने जॉर्ज ऑरवेल (George Orwell) के 1984 का जिक्र करते हुए चेतावनी दी थी कि ऐसा तानाशाही रवैया यूपी को ‘Orwellian Dystopia’ बना देगा. कोर्ट ने 5 लाख का जुर्माना डीएम और पुलिस अफसरों की सैलरी से काटने का आदेश दिया था.
2. अब ACP रवि शंकर का ओवर-एक्शन: हाईकोर्ट की मार से भी नोएडा प्रशासन ने सबक नहीं लिया. बिना लीगल क्लैरिटी के 5 लाख का मुचलका ठोकना यह दर्शाता है कि पुलिस अफसर अदालत के आदेशों से ऊपर उठकर काम करना चाहते हैं.
3. अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला: किसी प्रोटेस्ट में शामिल होना या छात्रों को संगठित करना लोकतंत्र में अधिकार है. लेकिन सरकार विरोधी का टैग लगाकर लाखों का बॉन्ड मांगना सीधे-सीधे असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश है.
सवाल-जवाब
सवाल 1: छात्र अक्षत त्रिपाठी के मामले में सुप्रीम कोर्ट (CJI) ने क्या नाराजगी जताई?
जवाब: CJI की बेंच ने सख्त लहजे में पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक कार्यपालक मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि उसने छात्र को 5 लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस जारी कर दिया.
सवाल 2: CJP प्रोटेस्ट मामले में अक्षत त्रिपाठी पर क्या आरोप लगाए गए थे?
जवाब: ग्रेटर नोएडा पुलिस ने आरोप लगाया कि अक्षत ने जंतर-मंतर पर CJP प्रोटेस्ट में छात्रों को शामिल करने के लिए सरकार विरोधी बातें फैलाईं, जबकि उसके खिलाफ हिंसा या संपत्ति के नुकसान का कोई सबूत नहीं था.
सवाल 3: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इससे पहले नोएडा डीएम मेधा रूपम पर क्या कार्रवाई की थी?
जवाब: हाईकोर्ट ने छात्रा पर गलत NSA लगाने पर डीएम मेधा रूपम और संबंधित अफसरों की सैलरी से 5 लाख रुपये रिकवर कर पीड़िता को देने का ऐतिहासिक आदेश दिया था.
सवाल 4: ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट डॉ. रवि शंकर मिश्रा कौन हैं?
जवाब: डॉ. रवि शंकर मिश्रा PPS 2018 बैच के अधिकारी हैं, जो वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में ACP व कार्यपालक मजिस्ट्रेट (तृतीय) के पद पर तैनात हैं.
