अभिजीत दिपके को बड़ी राहत, SEM कोर्ट ने सीजेपी चीफ को दी जमानत, मगर लगाई एक बड़ी शर्त

कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक प्रमुख अभिजीत दिपके को दिल्ली की सब-डिविजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत (SEM कोर्ट) से शर्तों के साथ जमानत मिल गई है. उन्हें जमानती बॉन्ड भरने के साथ पीस बॉन्ड यानी शांति बनाए रखने का बांड भरने को कहा गया है. शर्त के मुताबिक, दिपके को ऐसी कोई गतिविधि नहीं करनी होगी, जिससे शांति भंग होने की आशंका हो. जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा किया जाएगा.

दिपके को शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में सीजेपी की प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली के दौरान हिरासत में लिया गया था. शनिवार को उन्हें एसईएम अदालत के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें शर्तों के साथ जमानत मिली.

सीजेपी ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया था कि अभिजीत दिपके को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें एसईएम अदालत में पेश किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा था कि उस समय दिपके की लोकेशन की जानकारी नहीं मिल पा रही थी और वकीलों की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी थी.

दिपके की हिरासत से पहले सीजेपी के दो सह-संयोजकों, सौरव दास और आशुतोष रांका को भी गिरफ्तार किया गया था. दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में चुपके से प्रवेश करने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित जंतर-मंतर स्थल को एक दिन पहले ही अधिसूचना से बाहर कर दिया गया था.

हफ्ते भर में दूसरी बार हिरासत, दूसरी जमानत

हफ्तेभर में यह दूसरा मौका था जब दिल्ली पुलिस ने दिपके को हिरासत में लिया. इससे पहले ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के चलते मुंबई से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था.

पुलिस ने दिपके को क्यों हिरासत में लिया था?

शुक्रवार को प्रस्तावित रैली से पहले दिल्ली पुलिस ने दिपके को एक नोटिस भेजा था, जिसमें बताया गया था कि कनॉट प्लेस विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत जगह नहीं है और नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने प्रस्तावित ‘तिरंगा यात्रा’ के लिए अनुमति नहीं दी है.

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी इस नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि मार्च निकालना या भीड़ इकट्ठा करना इलाके में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन होगा. अपने आवास पर पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान दिपके ने अपनी हिरासत के आधार पर सवाल उठाते हुए पूछा, ‘आपने मुझ पर किस तरह का आरोप लगाया है?’

जब उन्हें बताया गया कि वह नई दिल्ली नहीं जा सकते और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है तो उन्होंने कहा कि वह कहीं और जा सकते हैं और पूछा कि उन्होंने किस कानून का उल्लंघन किया है.

पुलिस ने साफ किया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन बिना इजाजत के जुलूस निकालना और पाबंदियों का उल्लंघन करते हुए भीड़ इकट्ठा करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है. दिपके को राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक प्रदर्शित करने से जुड़े ‘फ्लैग कोड’ (ध्वज संहिता) के नियमों के बारे में भी याद दिलाया गया.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *