अली खामनेई की मौत के गम में शिया समुदाय ने किया सादगी से ईद मनाने का फैसला
Last Updated:March 17, 2026, 15:10 IST
Shia community celebrates Eid in simple way: ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारत के शिया समुदाय ने ईद सादगी और शोक के साथ मनाने का फैसला किया है. दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, हैदराबाद में विरोध प्रदर्शन हुए.
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शिया समुदाय ने इस बार ईद सादगी के साथ मनाने का फैसला किया है.
Shia community celebrates Eid in simple way: ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में मौत के बाद भारत के शिया समुदाय ने इस बार ईद बेहद सादगी और शोक के साथ मनाने का फैसला किया है. घरों में सिवइयां नहीं बनाई जाएंगी, नए कपड़े नहीं पहने जाएंगे और एक-दूसरे के घर आने-जाने से परहेज रखा जाएगा. ईद की नमाज के दौरान लोग बाजू पर काली पट्टी बांधकर इबादत करेंगे. दिल्ली के ओखला इलाके में अबुल फजल एन्क्लेव के शिया समुदाय के लोगों ने खामनेई की तस्वीर वाले पोस्टर चिपकाए हैं, जिन पर लिखा है- क्या आप ईद मनाएंगे? और हम ईद बेहद सादगी से मनाएंगे. स्थानीय लोगों ने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने धोखे से हमारे रहबर-ए-मोअज्जम अली खामनेई को शहीद कर दिया. वे ईरान के ही नहीं, बल्कि पूरे शिया समुदाय और मुस्लिम दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक गुरु थे.
समुदाय के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस गम में हम कोई उत्सव नहीं मनाएंगे. घरों में न सिवइयां बनेंगी, न मीठा बनेगा और न ही नए कपड़े पहनेंगे. ईद की नमाज अदा करते समय हम काली पट्टी बांधकर जाएंगे. यह सिर्फ शिया भाइयों की अपील नहीं है, हम अहले सुन्नत (सुन्नी) भाइयों से भी गुजारिश करते हैं कि वे भी इस शोक में ईद सादगी से मनाएं. खामेनेई साहब पूरे मुस्लिम उम्माह के उलेमा थे. खामनेई की मौत 28 फरवरी को तेहरान में अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों में हुई थी. उनकी मौत की पुष्टि के बाद ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था.
शिया संगठनों में मौत पर जताया दुख
भारत में भी शिया संगठनों और आम लोगों ने इस घटना पर गहरा दुख जताया. दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, हैदराबाद और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की गई और काली झंडियां फहराई गईं. अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड समेत कई संगठनों ने तीन दिनों तक व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने और घरों पर काली झंडियां लगाने की अपील की है. समुदाय का कहना है कि यह फैसला केवल शोक व्यक्त करने के लिए नहीं, बल्कि खामनेई की शहादत के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए भी है.ईद-उल-फित्र की तैयारियां आमतौर पर रंग-बिरंगे कपड़ों, स्वादिष्ट व्यंजनों और खुशियों से भरी होती हैं, लेकिन इ स बार कई शिया परिवारों में मातम का माहौल है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें
First Published :
March 17, 2026, 15:10 IST
