दिल्‍ली दंगा: चिकन नेक काटने के आरोपी शरजील इमाम 6 साल बाद जेल से रिहा, अपनों के साथ मनाएंगे ईद, भाई की शादी में होंगे शामिल

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दिल्‍ली दंगा: चिकन नेक काटने के आरोपी शरजील इमाम 6 साल बाद जेल से रिहा

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इमाम पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है. दिल्ली पुलिस का आरोप है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान उनके भाषण भड़काऊ थे, जिससे 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़की. पुलिस के अनुसार, यह सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा था और इमाम की गतिविधियों ने अशांति को बढ़ावा दिया. हालांकि, इमाम ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है.

दिल्‍ली दंगा मामलों में आरोपी शरजील इमाम तकरीबन 6 साल बाद अंतरिम जमानत पर जेल से रिहा हो गए हैं.

Sharjeel Imam: दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश रचने के मामले में आरोपी शरजील इमाम को मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत मिल गई है. करीब छह साल से जेल में बंद इमाम शुक्रवार को रिहा होकर बाहर आए. उन्हें अपने भाई की शादी में शामिल होने और ईद मनाने के लिए सीमित अवधि के लिए राहत दी गई है. शरजील इमाम पर आरोप है कि उन्‍होंने चिकन नेक को काट कर पूर्वोत्‍तर को देश से अलग करने संबंधी बयान भी दिया था. इमाम 2020 से तिहाड़ जेल में बंद थे और अदालत के आदेश के बाद शुक्रवार को जेल से बाहर निकले. उनकी रिहाई की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें उन्हें कार से जाते हुए देखा जा सकता है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह जमानत केवल अस्थायी है और उन्हें 30 मार्च तक हर हाल में सरेंडर करना होगा.

यह आदेश समीर बजपेई (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुनाया. सुनवाई के दौरान इमाम के वकील ने अदालत को बताया कि उनके भाई का निकाह 25 मार्च को होना है और परिवार में इमाम ही मुख्य सहारा हैं. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इमाम ने पिछले पांच वर्षों से अधिक समय जेल में बिताया है और इस दौरान उन्होंने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया. हालांकि, बचाव पक्ष ने छह हफ्ते की जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए केवल 10 दिनों की अंतरिम राहत दी. अदालत ने अपने फैसले में मानवीय पहलुओं और आरोपों की गंभीरता के बीच संतुलन बनाने की बात कही.

इमाम पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है. दिल्ली पुलिस का आरोप है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान उनके भाषण भड़काऊ थे, जिससे 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़की. पुलिस के अनुसार, यह सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा था और इमाम की गतिविधियों ने अशांति को बढ़ावा दिया. हालांकि, इमाम ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है.

इस मामले में एक अन्य आरोपी उमर खालिद भी हैं, जो पूर्व में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जुड़े रहे हैं. इससे पहले भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने इस साल इमाम और उमर खालिद की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं. इमाम की अस्थायी रिहाई के दौरान सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं. प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए हैं कि जमानत की शर्तों का पालन हो. अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत तुरंत रद्द की जा सकती है. इस बीच, इमाम की रिहाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है. फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद वह तय समय पर आत्मसमर्पण करते हैं या नहीं.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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