दिल्‍ली जिमखाना क्‍लब: अंग्रेजों की 'मौज-मस्‍ती' का वो अड्डा, जहां मेनन ने राजाओं को झुकाया… अब होगा जमींदोज?

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अंग्रेजों की ‘मौज-मस्‍ती’ का अड्डा, मेनन ने राजाओं को झुकाया… होगा जमींदोज?

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दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित और रसूखदार क्लबों में शामिल दिल्ली जिमखाना क्लब अब सरकार के नियंत्रण में जाने वाला है. केंद्र सरकार ने 27.3 एकड़ में फैले इस वीवीआईपी परिसर को खाली कराने का आदेश जारी कर दिया है. सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित इस जमीन का इस्तेमाल रक्षा बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए किया जाएगा. क्लब की लीज डीड तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है और 5 जून को पूरे परिसर का कब्जा लेने की तैयारी है. इस फैसले से सत्ता गलियारों और क्लब सदस्यों में हलचल मच गई है. आइए आज आपको इस ऐतिहासिक क्‍लब का पूरा इतिहास बताते हैं.

इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब: दिल्‍ली जिमखाना क्लब की स्थापना 3 जुलाई 1913 को ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के नाम से हुई थी. ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित यह क्लब केवल ब्रिटिश अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों के लिए बनाया गया था, हालांकि इसकी स्थापना में आर्थिक सहायता के लिए सात भारतीय रियासतों के महाराजाओं को सदस्य बनाया गया था. इसके पहले अध्यक्ष श्री स्पेंसर हारकोर्ट बटलर थे, जो ब्रिटिश भारत के एक प्रमुख अधिकारी थे.

रॉबर्ट टोर रसेल की देन है क्‍लब की वास्तुकला: क्लब की मौजूदा इमारतें प्रसिद्ध वास्तुकार रॉबर्ट टोर रसेल द्वारा डिजाइन की गई थीं, जिन्होंने कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन जैसी दिल्ली की पहचान भी बनाई थी. 1928 में बना यह भवन अपने विशाल बरामदों, हरे-भरे लॉन और शालीन किंतु भव्य डिजाइन के लिए जाना जाता है. यह स्थापत्य कला उस औपनिवेशिक शैली का बेहतरीन नमूना है, जो ब्रिटिश भव्यता और भारतीय परिस्थितियों का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है.

लेडी विलिंगडन का तोहफा था यहां का स्विमिंग पूल: 1930 के दशक की शुरुआत में वायसराय की पत्नी लेडी विलिंगडन को क्लब में उचित तैराकी सुविधा नहीं होने से नाराजगी हुई. इस असंतोष को उन्होंने दान में बदल दिया और मार्च 1936 में ₹21,000 की लागत से स्विमिंग पूल का निर्माण करवाया. इस पूल और उसी समय बने स्क्वैश कोर्ट ने क्लब के खेल बुनियादी ढांचे को एक नया आयाम दिया और इसे दिल्ली के सबसे संपन्न मनोरंजन केंद्रों में शुमार किया.

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यही पर हुए थे महात्‍मा गांधी और इरविन के बीच समझौता: यह क्लब केवल खेल और विलासिता का केंद्र नहीं था, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक मूक साक्षी भी रहा है. महात्मा गांधी और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच कई बैठकें यहीं हुईं. इन्हीं वार्ताओं का परिणाम था 1931 में हुआ ऐतिहासिक ‘गांधी-इरविन समझौता’. इस कमरे की दीवारों ने उन क्षणों को महसूस किया है जब दो दिग्गज शख्सियतें भारत के भविष्य को लेकर बातचीत कर रही थीं.

विभाजन की करुण विदाई: 1947 में देश के विभाजन का दंश झेल रहे भारत के लिए दिल्ली जिमखाना एक भावुक मंच भी बना. जनरल केएम करिअप्पा ने यहां उन अपने साथियों के सम्मान में एक विदाई भोज का आयोजन किया था, जिन्होंने नए बनने वाले पाकिस्तान को चुना था. यह भोज औपचारिकता भरा नहीं था, बल्कि यह एक सहृदय विदाई थी, जो उस दर्दनाक ऐतिहासिक दौर की अनकही त्रासदी को अपने भीतर समेटे हुए है.

आजादी के बाद मिला नया नाम और नई पहचान: 1947 में जैसे ही भारत आजाद हुआ, इस क्लब से ‘इंपीरियल’ शब्द हटा दिया गया और यह केवल ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ बन गया. इसके बाद यह क्लब नए भारत के सत्ता प्रतिष्ठान का अनौपचारिक केंद्र बन गया, जहां राजनेताओं, शीर्ष नौकरशाहों, न्यायाधीशों और उद्योगपतियों का जमावड़ा देश के महत्वपूर्ण फैसलों की पृष्ठभूमि बनता था.

जहां बना था एकीकृत भारत: स्वतंत्रता के बाद की सबसे बड़ी चुनौती थी 500 से अधिक देशी रियासतों का भारत में विलय. सरदार वल्लभभाई पटेल के कुशल सहयोगी वीपी मेनन ने इन महाराजाओं को समझाने और मनाने के लिए इसी क्लब में गुप्त और महत्वपूर्ण बैठकों की शृंखला चलाई. इसी परिसर में उन योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया, जिससे एक भौगोलिक रूप से अखंड भारत का निर्माण संभव हो सका.

खेलों के लिए बने थे 26 घास वाले टेनिस कोर्ट: दिल्ली जिमखाना का नाम आते ही खेल प्रेमियों की नजर इसके 26 घास वाले टेनिस कोर्ट पर जाती है, जिनकी तुलना अक्सर विंबलडन के कोर्ट से की जाती है. यहां स्क्वैश, बैडमिंटन और क्रिकेट की भी बेहतरीन सुविधाएं हैं. इसी क्लब ने राष्ट्रीय चैंपियन स्क्वैश खिलाड़ी भूबनेश्वरी कुमारी और माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली टीम के कप्तान एमएस कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं, जो इसकी खेल विरासत को दर्शाता है.

दुर्लभ धरोहर हैं क्लब का पुस्तकालय: शानदार खेल सुविधाओं के अलावा, इस क्लब के पास एक समृद्ध बौद्धिक धरोहर भी है. इसका पुस्तकालय 36,000 से अधिक पुस्तकों का विशाल संग्रह है, जिसमें 1843 से प्रकाशित होने वाली प्रसिद्ध व्यंग्य पत्रिका ‘पंच’ के दुर्लभ अंक शामिल हैं. यह पुस्तकालय क्लब के उन सदस्यों के लिए एक ज्ञान-तपस्या का केंद्र रहा है, जो खेल और सामाजिक मेलजोल के साथ-साथ साहित्यिक चर्चाओं का भी आनंद लेते थे.

आज का दिल्ली जिमखाना: सदियों से सत्ता और प्रतिष्ठा का यह क्लब आज एक बड़े विवाद के केंद्र में है, जहां केंद्र सरकार ने इसे 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का आदेश दिया है. एक समय जहां सदस्यता पाने के लिए 37 साल तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब इसके भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है. यह क्लब, जो औपनिवेशिक अतीत, आजाद भारत की सत्ता और आज के बदलते राजनीतिक समीकरणों का प्रतीक रहा है, एक बार फिर सुर्खियों में है.

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