गाजियाबाद में बिजली का 'डिजिटल' झटका: एक दिन में 20,000 स्मार्ट मीटर कटे, रिचार्ज के बाद भी अंधेरे में डूबे घर!

Ghaziabad News: गाजियाबाद में बिजली विभाग की एक बड़ी कार्रवाई ने हजारों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है. डिजिटल इंडिया के दौर में जहां ‘स्मार्ट मीटर’ को सहूलियत बताया गया था, वहीं अब यही मीटर आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गए हैं. गुरुवार का दिन गाजियाबाद के उपभोक्ताओं के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा, जब विभाग ने बिना किसी बड़ी चेतावनी के एक ही दिन में 20,591 प्रीपेड स्मार्ट मीटरों के कनेक्शन काट दिए. आलम यह रहा कि लोग अपने मोबाइल से रिचार्ज करते रहे, पैसे कटते रहे, लेकिन घर की बत्ती नहीं जली. विभाग का दावा है कि इन उपभोक्ताओं पर करोड़ों का बकाया है, जबकि जनता का कहना है कि यह सरासर तकनीकी लापरवाही और सिस्टम की विफलता है.

करोड़ों का बकाया और विभाग की ‘स्ट्राइक’
बिजली विभाग (PVVNL) के आंकड़ों के मुताबिक, इन करीब 20 हजार उपभोक्ताओं पर कुल 2.64 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है. विभाग ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने लंबे समय से एरियर (बकाया राशि) जमा नहीं की थी या जिनका बैलेंस ‘नेगेटिव’ में चला गया था, उनके कनेक्शन ऑटोमैटिक और मैन्युअल तरीके से काट दिए गए हैं. विभाग की इस अचानक कार्रवाई से ट्रांस हिंडन समेत गाजियाबाद के तीनों जोनों में हड़कंप मच गया.

किस ज़ोन में कितनी हुई कार्रवाई?
नीचे दिए गए आंकड़ों से आप समझ सकते हैं कि विभाग ने किस स्तर पर शिकंजा कसा है:

जोन कटे कनेक्शन (मीटर) कुल बकाया राशि
जोन-1 7,327 ₹ 94.75 लाख
जोन-2 7,350 ₹ 93.38 लाख
जोन-3 5,914 ₹ 77.98 लाख

रिचार्ज के बाद भी नहीं आई बिजली: उपभोक्ताओं का दर्द
इस पूरी कार्रवाई में सबसे ज्यादा परेशान वो लोग हुए, जिन्होंने तुरंत भुगतान तो कर दिया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उनके घर की सप्लाई बहाल नहीं हुई. सर्वर में देरी और डेटा अपडेट न होने की वजह से हजारों लोग बिजली दफ्तरों के चक्कर काटते नजर आए.

केस 1: वैशाली सेक्टर-3 के निवासी नमित कुमार ने बताया कि उन्होंने बिल जमा कर दिया था, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी बिजली नहीं आई. विभाग बस ‘जल्द आएगी’ का आश्वासन देता रहा.
केस 2: विजय नगर के कन्हैया ने बुधवार को ही 3,551 रुपये का रिचार्ज किया था, लेकिन लाइट नहीं आई. इसके बाद उन्होंने फिर 5,000 रुपये डाले, फिर भी अंधेरा ही रहा. विभाग के ऑफिस पहुंचने पर उन्हें कोई समाधान नहीं मिला.
केस 3: गोविंदपुरम के मोहम्मद अफजल के पास दो कनेक्शन हैं. 6000 रुपये जमा करने के बाद भी उनके बिल में पुराना बकाया (एरियर) ही दिख रहा है. विभाग का कहना है कि ‘बिल ठीक है’, लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हो रही.

तकनीकी खामी या विभागीय लापरवाही?
इस पूरे मामले पर जोन-2 के मुख्य अभियंता नरेश भारती का कहना है कि तकनीकी कारणों और डेटा अपडेट में होने वाली देरी की वजह से उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन लोगों ने बिल जमा कर दिया है, उनकी बिजली जल्द ही बहाल कर दी जाएगी. विभाग ने इसके लिए विशेष टीमों को भी तैनात किया है. हालांकि, सवाल यह उठता है कि अगर सिस्टम इतना ही ‘स्मार्ट’ है, तो पैसे जमा होते ही सप्लाई अपने आप चालू क्यों नहीं हुई?

आपकी मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
स्मार्ट मीटर की इन बढ़ती समस्याओं और शिकायतों को देखते हुए विद्युत निगम ने उपभोक्ताओं के लिए राहत की घोषणा की है. मेरठ मंडल के 7 जिलों के लिए MD ऑफिस की ओर से एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है.

हेल्पलाइन नंबर: 9217900683
उपभोक्ता इस नंबर पर कॉल करके या व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस नंबर का कंट्रोल रूम सीधे एमडी ऑफिस में बनाया गया है ताकि शिकायतों की मॉनिटरिंग की जा सके.

समाधान कब?
गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन इलाके के चीफ इंजीनियर ब्रजेश कुमार ने कहा है कि उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, जैसे-जैसे डेटा अपडेट हो रहा है, सप्लाई जोड़ी जा रही है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि डिजिटल मीटरिंग के इस दौर में उपभोक्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है. एक तरफ विभाग अपनी रिकवरी के लिए सख्त है, वहीं दूसरी तरफ अपनी तकनीकी खामियों को सुधारने में सुस्त नजर आ रहा है. अगर आप भी स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हैं, तो अपना बैलेंस चेक करते रहें और किसी भी समस्या पर तुरंत आधिकारिक हेल्पलाइन पर संपर्क करें.

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